जी-7 की बैठक के लिए इटली में एकजुट हुए दुनिया के नेता, मोदी भी हुए रवाना
जी-7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध, ग़ज़ा-इसराइल युद्ध, जलवायु परिवर्तन, प्रवासी मुद्दे, तकनीक और अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी है.
सारांश
- नीट-यूजी में ग्रेस मार्क्स दिए गए 1,563 छात्रों के लिए दोबारा होगी परीक्षा. एनटीए ने नोटिफ़िकेशन जारी कर बताया 23 जून को होंगे एग्ज़ाम.
- पीएम नरेंद्र मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने इटली रवाना हुए. तीसरी बार पीएम पद की शपथ लेने के बाद मोदी का यह पहला विदेश दौरा है.
- अजीत डोभाल को एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है.
- चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू और कश्मीर पर की गई टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
- पेमा खांडू ने लगातार तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. चोओना मीन ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.
लाइव कवरेज
दीपक मंडल
मध्य प्रदेश का एक परिवार जिसने 109 साल पहले अंग्रेज़ों को कर्ज़ देने का दावा किया
हज़ारीबाग़ का ये कपल संसाधनों की कमी के बीच कैसे कर रहा है सरकारी नौकरी की तैयारी?
उमर अब्दुल्लाह ने कहा- निलंबित रहे सिंधु जल संधि, ये हमारी नदी

इमेज स्रोत, ANI
सिंधु जल संधि के निलंबन को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "ये हमारी नदियां हैं और इन पर पहला हक़ हमारा बनता था."
उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "पंजाब की छह में से तीन नदियां भारत ने रखी हैं और तीन नदियां पाकिस्तान के हवाले किया. तब से लेकर आज तक इस सिंधु जल संधि का हम खामियाजा भुगत रहे हैं. अब सिंधु जल संधि निलंबित हुई है और इसे निलंबित ही रहना चाहिए, ताकि हम इस पानी का सही इस्तेमाल कर सकें."
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत को सीधी चेतावनी दी.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पानी की एक-एक बूंद उसकी रेडलाइन है और अगर भारत ने अपना रुख़ नहीं बदला तो उसे सीधे जवाब दिया जाएगा.
इस्लामाबाद में गुरुवार को ‘यादगार-ए-फतह’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने भारत की ओर से सिंधु जल संधि को ‘एकतरफा तौर पर निलंबित’ किए जाने पर टिप्पणी की.
दरअसल, अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था.
सिंधु जल संधि क्या है
सन 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के दौरान जब पंजाब को विभाजित किया गया तो इसका पूर्वी भाग भारत के पास और पश्चिमी भाग पाकिस्तान के पास गया.
भारत और पाकिस्तान ने सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे के लिए विश्व बैंक की मध्यस्थता में नौ साल की बातचीत के बाद सितंबर 1960 में सिंधु जल संधि की थी.

इमेज कैप्शन, सिंधु जल संधि उस समय भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्राध्यक्ष जनरल अय्यूब ख़ान ने कराची में इस समझौते पर दस्तख़त किए थे.
तब यह उम्मीद जताई गई थी कि यह संधि दोनों देशों के किसानों के लिए ख़ुशहाली लाएगी और शांति, सद्भावना व दोस्ती की गारंटी होगी.
नदियों के पानी के बंटवारे का यह समझौता कई युद्धों, विवादों और झगड़ों के बावजूद 65 वर्षों से बरक़रार था.
इस संधि के तहत भारत को ब्यास, रावी और सतलुज नदियों के पानी पर पूरा अधिकार दिया गया जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों- सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी पर अधिकार दिया गया. समझौते के अनुसार इन नदियों के 80 प्रतिशत पानी पर पाकिस्तान का हक़ है.
भारत को पश्चिमी नदियों के बहते पानी से बिजली पैदा करने का अधिकार है लेकिन समझौते के अनुसार वह पानी जमा करने या उसके बहाव को कम करने वाली परियोजनाएं नहीं बना सकता.
इसके विपरीत उसे पूर्वी नदियों यानी रावी, ब्यास और सतलुज पर किसी भी तरह के प्रोजेक्ट बनाने का अधिकार है और इस पर पाकिस्तान एतराज़ नहीं कर सकता.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी, 13 मरणोपरांत

इमेज स्रोत, @PresidentOfIndia/YT
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है. इनमें 13 मरणोपरांत दिए जाने वाले पुरस्कार शामिल हैं.
पुरस्कारों की सूची
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 9 कीर्ति चक्र पुरस्कारों की घोषणा की है, जिनमें से 7 मरणोपरांत दिए जाएंगे.
- 19 शौर्य चक्र, जिनमें से एक मरणोपरांत शामिल है
- वीरता के लिए 5 बार-टू सेना मेडल
- वीरता के लिए 36 सेना मेडल (5 मरणोपरांत)
- वीरता के लिए 3 नौ सेना मेडल और 5 वायु सेना मेडल शामिल हैं.
रक्षा मंत्रालय ने इन पुरस्कारों की सूची प्रकाशित की है.
बंटवारे का दर्द: 'अनजान शख़्स' के नाम लिखे ख़तों से उभरती लाहौर के एक मकान की कहानी
पीएम मोदी पर राहुल गांधी की टिप्पणी के बारे में राजनाथ सिंह ने ये कहा

इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर टिप्पणी की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की विदेश नीति को लेकर जो टिप्पणी की है वह अत्यंत निम्नस्तरीय और निंदाजनक है.
राजनाथ सिंह ने कहा, "यह मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत पीड़ा देने वाली है. अपने लंबे राजनीतिक जीवन में मैंने किसी भी नेता प्रतिपक्ष को इस तरह का अशोभनीय व्यवहार करते नहीं देखा."
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी के मन में प्रधानमंत्री के प्रति चाहे जितनी भी कुंठा भरी हो, लेकिन ऐसी अभद्र टिप्पणी स्वीकार्य नहीं हैं. इस आचरण से राहुल गांधी ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान किया है, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का अपमान किया है."
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों पर तीखे हमले किए.
इस दौरान मंच पर ऐसा कुछ हुआ जिसकी काफ़ी चर्चा हो रही है और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इसे लेकर कांग्रेस पर हमलावर है.

इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की टिप्पणियों की निंदा की राहुल गांधी मंच से एक-एक करके मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे. इसी दौरान उन्होंने सरकार की विदेश नीति पर भी तंज़ कसा.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं का ज़िक्र करते हुए कहा, "आप अपने दोस्त के घर नहीं जा रहे हो. हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री दोस्ती करने नहीं जाता. उसका काम देश की रक्षा करना होता है. इनके दिमाग में पता नहीं कहां से घुस गया कि वो मेरा दोस्त है और ये गले लगने लगते हैं."
राहुल गांधी बोले, "पता नहीं इनके दिमाग़ में ये कैसे घुस गया कि विदेश नीति का मतलब ये होता है."
ऐसा कहने के बाद राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को ज़ोर से गले लगाया और कहा कि मोदी जी को लगता है कि विदेश नीति का मतलब यही होता है.
इसके बाद संदीप दीक्षित ने राहुल गांधी को टोक कर इटली की पीएम मेलोनी का ज़िक्र कर दिया.
कार्टून: उनका मामला ...

इमेज कैप्शन, नालासार यूनिवर्सिटी मामले में सीजेआई की टिपण्णी पर आज का कार्टून उत्तर प्रदेश: देवरिया में तिरंगा यात्रा के दौरान 40 से ज़्यादा छात्राएं बेहोश, अरशद अफज़ाल खान, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए

इमेज स्रोत, Arshad Afzaal Khan
इमेज कैप्शन, छात्राओं को तेज धूप में कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा उत्तर प्रदेश के देवरिया में तिरंगा यात्रा के दौरान 40 से ज्यादा छात्राएं अचानक बेहोश हो गईं. इन छात्राओं को यात्रा के लिए तेज धूप में कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था.
गुरुवार को छात्राओं के बेहोश होने के बाद अफ़रातफ़री मच गई. सभी बेहोश छात्राओं को स्थानीय सरकारी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया.
इसी तरह बाराबंकी में भी कक्षाओं में गर्मी और उमस के कारण 18 छात्राओं के बेहोश होने की ख़बर है.
देवरिया के ज़िलाधिकारी मधुसूदन हुलगी ने पत्रकारों से कहा कि तेज धूप के कारण डिहाइड्रेशन होने से छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई.
कस्तूरबा गांधी राजकीय बालिका विद्यालय की प्रधानाचार्य मंजू राय ने कहा, "छात्राओं की तबीयत अब ठीक है. कुछ समय बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. इस दौरान कुछ छात्राओं को ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी रखा गया."
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर एचके मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी रही और सभी छात्राओं की उचित देखभाल की गई.
इसी तरह बाराबंकी में भी एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं पर तेज गर्मी और उमस का असर देखने को मिला.
सतरिख स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में सुबह की प्रार्थना के बाद क़रीब 18 छात्राएं अचानक कक्षा में गिर गईं.
चक्कर आने के बाद कई छात्राएं बेहोश हो गईं. सभी को तुरंत बाराबंकी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सतरिख ले जाया गया.
इस स्कूल में कुल 639 छात्राएं पढ़ती हैं, जिन्हें 12 कमरों में बैठाया जाता है. क्षमता से ज़्यादा छात्राओं की मौजूदगी और वेंटिलेशन की कमी के बीच गुरुवार सुबह से ही इलाक़े में बिजली नहीं थी.
60-60 छात्राओं से भरी कक्षाओं में अचानक छात्राओं ने जी मिचलाने, हाथ-पैर में दर्द और उल्टी की शिकायत शुरू कर दी.
सदर एसडीएम गुंजिता अग्रवाल ने कहा कि स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान गर्मी के कारण क़रीब 18 छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई.
एसडीएम ने बताया कि छात्राओं को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सतरिख ले जाया गया, जहां ग्लूकोज चढ़ाने और हालत सामान्य होने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया.
जंतर मंतर प्रोटेस्ट और राम मंदिर चंदा चोरी पर सरकार ने संसद में अपना पक्ष क्यों नहीं रखा?
जाति जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों पर कांग्रेस ने जताई ये आपत्ति

इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि जातिगत जनगणना के सवाल बिहार और तेलंगाना में इस मक़सद से पूछे गए सवालों की तरह होने चाहिए (सांकेतिक तस्वीर) कांग्रेस पार्टी ने जातिगत जनगणना के लिए पूछे जाने वाले सवालों और उसके तरीके पर संदेह जताया है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने इसके लिए राजनीतिक दलों के साथ कोई चर्चा नहीं की.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "6 मई 2025 को जाति जनगणना के संबंध में प्रधानमंत्री को कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र लिखा था. उनके सबसे पहले और बुनियादी सुझाव को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है. साथ ही, खरगे जी की मांग के अनुसार राजनीतिक दलों के साथ भी कोई चर्चा नहीं की गई है."
जयराम रमेश ने मल्लिकार्जुन खड़गे के उस पत्र को भी एक्स पर साझा किया है.
खड़गे के पत्र में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा गया है, "मैंने 16 अप्रैल 2023 को आपको पत्र लिखकर कांग्रेस की ओर से जातिगत जनगणना कराने की मांग आपके सामने रखी थी. अफ़सोस की बात है कि मुझे उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला. दुर्भाग्य से उसके बाद आपकी पार्टी के नेताओं और ख़ुद आपने कांग्रेस और इसके नेतृत्व पर इस मांग के लिए लगातार हमले किए."
मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस चिट्ठी में मांग की थी कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों के लिए तेलंगाना मॉडल को अपनाना चाहिए और अंत में रिपोर्ट प्रकाशित करते हुए सब कुछ सार्वजनिक किया जाना चाहिए.
जयराम रमेश ने एक अन्य पोस्ट में आरोप लगाया, "यह व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही थी कि जाति से जुड़ा सवाल पहले से तैयार राज्यवार सूची के साथ पूछा जाएगा, जैसा कि बिहार और तेलंगाना में हुए जाति सर्वेक्षणों में किया गया था. जिसमें जवाब के अनुसार सही विकल्प पर सिर्फ टिक करना होता था. दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं हुआ है, जिससे मंशा को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो रहे हैं."
इससे पहले एक गजट नोटिफ़िकेशन के ज़रिए गृह मंत्रालय के रजिस्ट्रार जनरल के दफ़्तर ने बताया है कि साल 2027 के लिए हो रही जनगणना के लिए संबंधित अधिकारी लोगों से 40 तरह के सवाल पूछ सकते हैं.
इनमें नाम, धर्म, वैवाहिक स्थिति, जन्म स्थान, स्थायी निवास, बैंक खातों की कुल संख्या, मोबाइल नंबर (अगर हो), आधार नंबर (अगर हो), वोटर आईडी नंबर जैसे सवाल शामिल हैं.
गोवा के इन दो गांवों के लोग पिछले 100 दिनों से क्यों कर रहे हैं आंदोलन? - ग्राउंड रिपोर्ट
'मुझे अपना सीवी बोटॉक्स करना पड़ा': एआई के दौर में क्या महिलाओं को नौकरी मिलना हो रहा है मुश्किल?
विकलांगों पर टिप्पणी के मामले में समय रैना समेत पांच लोगों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

इमेज स्रोत, Samay Raina via YouTube
इमेज कैप्शन, समय रैना अपने शो की वजह से कई बार विवादों में आए हैं (फ़ाइल फ़ोटो) सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विकलांग लोगों को लेकर इंडियाज़ गॉट लेटेंट शो में की गई असंवेदनशील टिप्पणियों के मामले में समय रैना और चार अन्य कॉमेडियनों के ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया.
बार एंड बेंच के मुताबिक़ भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की पीठ ने यह आदेश दिया.
इस मामले में राहत पाने वाले अन्य लोगों में विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर उर्फ़ सोनाली आदित्य देसाई और निशांत जगदीश तंवर शामिल हैं.
लाइव लॉ के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने विकलांग लोगों के ख़िलाफ़ असंवेदनशील टिप्पणियों को लेकर उन पर दर्ज एफ़आईआर को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने इन चारों की विकलांग लोगों के लाभ के लिए शो आयोजित करने की कोशिशों को सराहा.
सुप्रीम कोर्ट के सामने जांच के दायरे में आया इंडियाज़ गॉट लेटेंट का विवादित एपिसोड 14 नवंबर, 2024 को खार हैबिटेट में शूट किया गया था, जो बाद में प्रसारित हुआ था.
बार एंड बेंच के मुताबिक़ कॉमेडी शो में शामिल कई लोगों के ख़िलाफ़ अश्लील और असंवेदनशील टिप्पणियां करने के लिए कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे.
बाद में एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें रैना और तीन अन्य लोगों पर स्पाइनल मस्क्युलर अट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy) के इलाज की ऊंची लागत को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया.
नवंबर 2025 में, कोर्ट ने रैना और फाउंडेशन की याचिका में नामित अन्य कॉमेडियन को विकलांग लोगों के इलाज के लिए बनाए गए कोष के लिए धन जुटाने के लिए एक महीने में कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया था.
सोशल मीडिया पर बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त

इमेज स्रोत, Getty Images
सोशल मीडिया पर बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील एचएस फुलका ने कहा कि ऐसे वीडियो अब सिर्फ इंस्टाग्राम पर सर्कुलेट ही नहीं हो रहे, बल्कि उन्हें प्रमोट भी किया जा रहा है.
फुलका ने कहा कि भारत सरकार ने भी इंस्टाग्राम पर इस तरह की सामग्री को रोकने के लिए सख़्त कार्रवाई की है.
उन्होंने बताया, "सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि मेटा, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की ज़िम्मेदारी है कि वे बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार को रोकें और इसकी जानकारी पुलिस को दें."
उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर ऐसे वीडियो डाउनलोड करने और देखने वाले लोगों के ख़िलाफ़ भी पॉक्सो एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई हो सकती है.
फुलका ने कहा कि जो लोग बच्चों से जुड़े अश्लील फोटो या वीडियो डाउनलोड करके आगे शेयर करते हैं, उनके ख़िलाफ़ भी क़ानून के तहत कार्रवाई हो सकती है और 7 साल तक की सजा का प्रावधान है.
'बंटवारा 1947' से फिर ताज़ा हुआ विभाजन का दर्द, जिसे सबसे ज्यादा महिलाओं ने सहा
शहबाज़ शरीफ़ के बयान पर पीएम मोदी को लेकर कांग्रेस ने ये कहा

इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, पवन खेड़ा ने मांग की है कि पीएम मोदी अब भी कह दें कि 'ट्रंप झूठ बोल रहे हैं' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पीएम मोदी से जवाब देने की मांग की है.
पवन खेड़ा ने कहा, "शहबाज़ शरीफ़ का जो बयान आया है वह बहुत चौंकाने वाला नहीं है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ख़ुद सौ से ज़्यादा बार कह चुके हैं कि 'मैंने (भारत-पाकिस्तान के बीच) सीज़फ़ायर करवाया. मैंने भारत को डांटा', उन्होंने जो भी कहा है आपने सुना है."
पवन खेड़ा के मुताबिक़, "अब शहबाज़ शरीफ़ भी वही बोल रहे हैं और ट्रंप को धन्यवाद दे रहे हैं. राहुल जी ने संसद में मोदी जी को मौक़ा दिया कि आप खड़े होकर बोल दीजिए की ट्रंप झूठ बोल रहे हैं, उनकी सीज़फ़ायर में कोई भूमिका नहीं थी. तब वो (पीएम मोदी) डरे हुए थे."
"अब शहबाज़ शरीफ़ भी वही बोलने लगे हैं. पड़ोसी मुल्क जो हर मायने में आपसे पीछे है, वो एक तरह से आपको चिढ़ा रहा है. हम फिर कह रहे हैं प्रधानमंत्री जी सामने आइए और बोल दीजिए कि ट्रंप झूठ बोल रहे और शहबाज़ शरीफ़ भी झूठ बोल रहे हैं. भारत ने अपनी शर्तों पर सीज़फ़ायर की थी."
इससे पहले इस्लामाबाद में गुरुवार को 'यादगार-ए-फतह' के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शुक्रिया अदा किया था.
उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में भूमिका निभाकर लाखों लोगों की जान बचाई.
22 अप्रैल को 2025 में जम्मू-कश्मीर में पहलगाम की बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए चरमपंथी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी.
भारत ने इसके ख़िलाफ़ मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था. इसके बाद भारत और पाकिस्तान की फ़ौजें आमने-सामने आ गई थीं.
तक़रीबन तीन-चार दिनों के संघर्ष के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि भारत और पाकिस्तान सीज़फ़ायर कर रहे हैं.
ट्रंप ने कई मौक़ों पर यह दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने ही युद्धविराम कराया था.
नांदेड़ में हमले के बाद आया सुखबीर सिंह बादल का पहला बयान, क्या कहा?

इमेज स्रोत, ANI
पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने अपने ऊपर हुए हमले पर प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा कि हमला करने वालों का मकसद पंजाब में हालात को अपने नियंत्रण में लेना और शांति भंग करना है. इसकी अनुमति ना तो मैं दूंगा और ना कभी मेरे पिता ने दी थी."
"दोनों बार उन्होंने मुझ पर सबसे पवित्र स्थानों पर हमला किया. मैं कभी डरा नहीं हूं और अब भी नहीं डरता. जिनके ऊपर गुरू जी का हाथ होता है उन पर कोई आंच नहीं आ सकती."
सुखबीर सिंह बादल ने कहा, "शिरोमणि अकाली दल पंजाब के भाईचारे और गौरव के लिए प्रतिबद्ध है. शिरोमणि अकाली दल कोई भी कुर्बानी दे सकता है, लेकिन पंजाब की तरक्की और सांप्रदायिक एवं धार्मिक सद्भाव हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं."
इससे पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हमला हुआ था.
बीबीसी पंजाबी के अनुसार, पंजाब से नांदेड़ पहुंचने के बाद शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर माता साहिब कौर गुरुद्वारा के पास हमला किया गया.
अब मुझे यानी बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल को इजाज़त दीजिए. अब से रात दस बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
बीबीसी हिन्दी के पेज पर मौजूद कुछ बड़ी ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए हुए लिंक्स पर क्लिक करें.
अमेरिका का दावा- भारत समेत 40 से ज़्यादा देशों ने चीन को टैरिफ़ से बचाने में मदद की, ऑसमंड चिया, बिज़नेस रिपोर्टर

इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फ़ोटो) व्हाइट हाउस ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत समेत 40 से ज़्यादा देशों ने चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचने में मदद की, जिसके लिए चीनी सामान को ऐसे देशों के रास्ते अमेरिका भेजा गया जहां आयात शुल्क कम है.
रिपोर्ट में कनाडा, भारत, मेक्सिको, जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों का नाम लिया गया है.
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इन देशों के जरिए चीन ने अरबों डॉलर के अमेरिकी टैरिफ से बचने की कोशिश की.
अमेरिका के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने कहा कि इस व्यवस्था की वजह से "अमेरिकी नौकरियों और अरबों डॉलर के राजस्व का नुक़सान हुआ."
वहीं, वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने बीबीसी के सवालों के जवाब में अमेरिकी आरोपों पर कहा कि "ट्रेड वॉर में किसी की जीत नहीं होती."
उन्होंने अमेरिका के टैरिफ उपायों और चीनी कंपनियों को निशाना बनाने के लिए सरकारी ताकत के इस्तेमाल का विरोध किया.
चीनी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ट्रांसशिपमेंट के जरिए भेजे जाने वाले सामान को लेकर किसी भी एकतरफा कार्रवाई या समझौते में तीसरे देशों के हितों को नुक़सान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए.
बीबीसी ने रिपोर्ट में शामिल भारत, कनाडा, मेक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के दूतावासों से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी है.
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ और प्रतिबंधों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है.
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से वॉशिंगटन में मुलाक़ात भी होने वाली है.
व्हाइट हाउस ने सरकारी और निजी क्षेत्र के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि करीब 30 अरब डॉलर से लेकर 300 अरब डॉलर तक का सामान ज़्यादा टैरिफ़ वाले देशों से कम टैरिफ वाले देशों के रास्ते अमेरिका पहुंचाया गया.
