जी-7 की बैठक के लिए इटली में एकजुट हुए दुनिया के नेता, मोदी भी हुए रवाना
जी-7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध, ग़ज़ा-इसराइल युद्ध, जलवायु परिवर्तन, प्रवासी मुद्दे, तकनीक और अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी है.
सारांश
- नीट-यूजी में ग्रेस मार्क्स दिए गए 1,563 छात्रों के लिए दोबारा होगी परीक्षा. एनटीए ने नोटिफ़िकेशन जारी कर बताया 23 जून को होंगे एग्ज़ाम.
- पीएम नरेंद्र मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने इटली रवाना हुए. तीसरी बार पीएम पद की शपथ लेने के बाद मोदी का यह पहला विदेश दौरा है.
- अजीत डोभाल को एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है.
- चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू और कश्मीर पर की गई टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
- पेमा खांडू ने लगातार तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. चोओना मीन ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.
लाइव कवरेज
दीपक मंडल
ईरान ने कहा- होर्मुज़ स्ट्रेट तभी खुलेगा जब अमेरिका इस्लामाबाद समझौते को लागू करेगा

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इमेज कैप्शन, ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष लगातार जारी है (फ़ाइल फ़ोटो) ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के उप राजनीतिक कमांडर यदुल्लाह जवानी ने कहा है कि युद्ध का अंत इस्लामाबाद समझौते के आधार पर होना चाहिए.
साथ ही उन्होंने कहा कि "होर्मुज़ स्ट्रेट तभी खुलेगा जब अमेरिका इस समझौते में अपने दायित्वों को पूरा करेगा."
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, इस्लामिक रिपब्लिक रेडियो और टेलीविजन से संबद्ध यंग जर्नलिस्ट्स क्लब के साथ एक इंटरव्यू में यदुल्लाह ने कहा, "होर्मुज़ स्ट्रेट और इसे नियंत्रित करने की व्यवस्था युद्ध से पहले जैसी थी, वैसी अब कभी नहीं होगी."
उन्होंने कहा कि अमेरिका, इसराइल और उनके सहयोगी "होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण हासिल करने के लिए महीनों से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे सफल नहीं हुए हैं."
उन्होंने यह भी कहा, "ईरान और ओमान के बीच जिस जलमार्ग की चर्चा हो रही है, वह केवल युद्ध की समाप्ति के बाद के लिए है और युद्ध की समाप्ति निश्चित है."
इस बीच हाल के दिनों में होर्मुज़ स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद, पिछले दो दिनों (शनिवार और रविवार) में इस जलमार्ग से समुद्री परिवहन में काफ़ी कमी आई है.
यह ऐसे समय में हुआ है जब संघर्ष सुलझाने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप हो गई है.
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को पांच मालवाहक जहाज़ होर्मुज़ से गुज़रे, और रविवार को किसी भी जहाज़ इस रास्ते से गुज़रने का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया.
पिछले सप्ताह शनिवार और रविवार को होर्मुज़ स्ट्रेट से 31 जहाज़ गुज़रे थे.
त्विषा शर्मा मौत केस: पति और सास के ख़िलाफ़ सीबीआई ने दाख़िल की चार्जशीट, विष्णुकांत तिवारी, बीबीसी संवाददाता

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इमेज कैप्शन, त्विषा के पति समर्थ सिंह ने 22 मई को जबलपुर में सरेंडर किया था (फ़ाइल फ़ोटो) मध्य प्रदेश के भोपाल में 33 साल की त्विषा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई ने उनके पति समर्थ सिंह और पूर्व जज रहीं उनकी सास गिरिबाला सिंह के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की है.
सीबीआई ने दोनों के ख़िलाफ़, आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता से जुड़ी धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं.
सीबीआई ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 के तहत पति या रिश्तेदार की ओर से क्रूरता और धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोप लगाए हैं.
इसके अलावा बीएनएस की धारा 3(5) के तहत साझा आपराधिक मंशा से किए गए काम के भी आरोप लगाए गए हैं.
हालांकि सीबीआई ने शुरुआत में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु के लिए सज़ा के तहत एफआईआर दर्ज़ की थी.
सीबीआई की चार्जशीट पर त्विषा के परिवार के वकील अंकुर पांडे ने बीबीसी से कहा, “चार्जशीट फाइल करने में पेपरवर्क में थोड़ा गड़बड़ था. मेरी सीबीआई के अधिकारियों से बात हुई है, उन्होंने बताया कि पहले दहेज प्रताड़ना और मृत्यु से संबंधित धाराओं में केस दर्ज़ किया गया था लेकिन जांच के बाद उन्होंने इसे आत्महत्या के लिए उकसाना और क्रूरता की धाराओं में मामला दर्ज किया है. वो दहेज प्रताड़ना वाले पहलू की जांच अभी भी जारी है”.

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इमेज कैप्शन, पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह और पूर्व जज उनकी सास गिरिबाला सिंह के ख़िलाफ़ दहेज प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया था (फ़ाइल फ़ोटो) क्या है पूरा मामला?
त्विषा शर्मा का शव 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में मिला था. उनकी शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी.
त्विषा की मौत के बाद उनके परिवार ने ससुराल में त्विषा के साथ मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे.
मामले की जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर छह चोटों का ज़िक्र किया गया था. मौत की वजह फांसी बताई गई थी.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर 24 मई को एम्स (दिल्ली) के डॉक्टरों की एक टीम ने त्विषा का दूसरा पोस्टमार्टम किया. इसी दौरान मध्य प्रदेश सरकार की अनुशंसा के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई.
कार्टून: पी फॉर प्रोटेस्ट

इमेज कैप्शन, स्कूली बच्चों के प्रदर्शन पर आज का कार्टून तुकाराम मुंढे: खाने के सामान में मिलावट के ख़िलाफ़ अभियान चलाने वाले आईएएस कौन हैं?
कांग्रेस ने कहा, बीजेपी-आरएसएस के लिए 2026 अपमानजनक साल बनता जा रहा है

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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में निर्देश जारी किया है (फ़ाइल फ़ोटो) सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में चल रही कार्यवाही को अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश दिया.
इस मामले पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "बीजेपी-आरएसएस के लिए 2026 अपमानजनक घटनाओं का साल बनता जा रहा है. वे राहुल जी को जितना बांधने की कोशिश करते हैं, रस्सी उतनी ही तेज़ी से टूटती जाती है."
पवन खेड़ा ने लिखा, "ईडी, सीबीआई, एसएफ़आईओ, सीबीडीटी, वित्त मंत्रालय, एमसीए और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को इस मामले के संबंध में लखनऊ हाई कोर्ट में आगे कोई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया है."
लाइव लॉ के अनुसार, राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई और ईडी को भी निर्देश दिया कि वे इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाख़िल न करें.
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों केंद्रीय एजेंसियों को राहुल गांधी के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने के निर्देश दिए थे.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को बताया गया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की है.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की कार्यवाही को अगले आदेश तक स्थगित रखने का निर्देश दिया.
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका भी दायर की है, जिसमें उन्होंने इस मामले की कार्यवाही को इलाहाबाद हाई कोर्ट से दिल्ली हाई कोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- नए संशोधन से पुरानी ट्रांसजेंटर पहचान पर असर नहीं

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इमेज कैप्शन, नए संशोधन के ज़रिए जेंडर की स्वयं पहचान करने का अधिकार ख़त्म कर दिया गया था. (फ़ाइल फ़ोटो) लाइव लॉ के मुताबिक़, केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पहले से जारी किए जा चुके ट्रांसजेंडर पहचान पत्र, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 से प्रभावित नहीं होंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2026 के संशोधन को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की.
इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को बताया कि पहले जारी किए गए ट्रांसजेंडर पहचान पत्र जारी रहेंगे.
नए संशोधन के ज़रिए जेंडर की स्वयं पहचान करने का अधिकार ख़त्म कर दिया गया था.
इससे पहले अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाई गई इस चिंता पर केंद्र से जवाब मांगा था कि साल 2026 के संशोधन से पहले ट्रांसजेंडर कार्ड पा चुके लोगों के अधिकार प्रभावित हुए हैं.
3 अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा था कि 2026 का संशोधन उन अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकता जो पहले ही दिए जा चुके हैं.
अमित मालवीय की जगह बीजेपी के नए सोशल मीडिया इंचार्ज बने दीपक म्हस्के कौन हैं?
इंस्टाग्राम पर बीबीसी की पड़ताल के बाद दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस, दिव्या आर्य, बीबीसी आई रिपोर्टर

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इमेज कैप्शन, बीबीसी आई ने अपनी पड़ताल में पाया कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को प्रचारित कर रहा है (सांकेतिक तस्वीर) इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों पर बीबीसी की पड़ताल का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है.
इसके बाद कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विधि और न्याय मंत्रालय को नोटिस भेजा है.
बाल अधिकारों पर काम कर रहे संगठन, 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' और 'बचपन बचाओ आंदोलन' की ओर से दायर की गई इस याचिका में सोशल मीडिया कंपनियों के आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का ठीक से पालन ना करने पर चिंता जताई गई है.
याचिका में कहा गया है, "बीबीसी पर प्रकाशित रिपोर्ट में ये पाया गया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के पेड विज्ञापन इंस्टाग्राम पर चलाए गए, जिन्होंने यूज़र्स को टेलीग्राम से जोड़ा, जहां इस सामग्री को ख़रीदा जा सकता है. रिपोर्ट में पाया गया कि प्रकाशन से पहले, विज्ञापन इस प्लेटफॉर्म के एक रिव्यू प्रोसेस से भी गुज़रे."
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के बारे में दिशा-निर्देश जारी करे. पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन किए जाने पर, "आपराधिक कार्रवाई की जाए."
याचिका की सुनवाई करने हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस विनोद चन्द्रन की दो जजों वाली बेंच ने इसे "चिंता का विषय" बताया.
इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को तय करते हुए अदालत ने सरकार से इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने को कहा.
सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस' बनाम ‘एस. हरीश’ के केस में फ़ैसला सुनाते हुए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रचार, प्रसार और उसे सेव कर अपने पास रखने समेत तमाम मुद्दों को ग़ैर-क़ानूनी बताए हुए दिशा-निर्देश जारी किए थे.
इस याचिका में इसी फ़ैसले का हवाला देकर सोशल मीडिया कंपनियों से उन निर्देशों के पालन करने की बात कही गई है.
अमेरिकी अभिनेत्री हेडन पैनेटियर का 36 साल की उम्र में निधन

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इमेज कैप्शन, हेडन पैनेटियर (फ़ाइल फ़ोटो) अमेरिकी टीवी सीरीज़ 'हीरोज' और 'नैशविल' में अपने किरदार से मशहूर हुईं अभिनेत्री हेडन पैनेटियर का 36 साल की उम्र में निधन हो गया.
उनके पिता स्किप पैनेटियर ने एक बयान जारी कर अभिनेत्री के निधन की पुष्टि की है.
स्किप पैनेटियर ने बीबीसी समेत अन्य मीडिया संस्थानों को दिए बयान में कहा, "हम बेहद दुख के साथ अपनी प्यारी हेडन के निधन की जानकारी साझा कर रहे हैं."
उन्होंने कहा कि 'हेडन एक असाधारण प्रतिभा थीं, जिन्होंने अपने आसपास के लोगों और पर्दे पर देखने वाले लाखों दर्शकों के जीवन में प्यार और खुशी भर दी.'
अभिनेत्री की मौत क्यों हुई, इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है. उनके निधन की ख़बर के बाद हॉलीवुड और उनके प्रशंसकों के बीच शोक है.
हेडन पैनेटियर को टीवी सीरीज़ 'हीरोज' में सुपरपावर वाली चीयरलीडर का किरदार निभाने के लिए ख़ास पहचान मिली थी. इसके अलावा उन्होंने 'रिमेंबर द टाइटन्स' और 'रेजिंग हेलेन' जैसी फ़िल्मों में भी अहम भूमिकाएं निभाईं.
हेडन के पिता ने परिवार की निजता का सम्मान करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि परिवार इस "अकल्पनीय क्षति" से उबरने के लिए समय चाहता है.
अरविंद केजरीवाल ने कहा- हाँ मैं दिमाग़ी नक्सल हूं क्योंकि मैं देशभक्त हूं

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इमेज कैप्शन, केजरीवाल से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम भी ख़ुद को 'दिमाग़ी नक्सल' कह चुके हैं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए ख़ुद को 'दिमाग़ी नक्सल' कहा है.
केजरीवाल ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया और कहा, "प्रधानमंत्री जी के हिसाब से दिमाग़ी नक्सल कौन है, जो इस देश में प्रश्न उठाने की हिम्मत करता है, जो सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है, जो अच्छे सरकारी स्कूल, अच्छे सरकारी अस्पताल चाहता है."
केजरीवाल ने आगे कहा, "जो बिजली चाहता है, पानी चाहता है, जो सीवर-ड्रेनेज और अच्छी व्यवस्था चाहता है, जो भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है वो प्रधानमंत्री जी के हिसाब से दिमाग़ी नक्सली है."
उन्होंने कहा, "जो प्रधानमंत्री और बीजेपी से डरता नहीं है, जो एक विकसित भारत का सपना देखता है, वो प्रधानमंत्री जी के हिसाब से दिमाग़ी नक्सली है. मैं प्रधानमंत्री जी को कहना चाहता हूं कि 'मैं अरविंद केजरीवाल आपके हिसाब से दिमाग़ी नक्सली हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं' और मुझे इस बात का गर्व है."
दरअसल 15 अगस्त को लाल क़िले से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा था, "हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमाग़ी नक्सल मौक़े की तलाश में हैं. हिंसा अराजकता के वो रास्ते खोज रहे हैं. इन दिमाग़ी नक्सलियों को पहचानना होगा. इन दिमाग़ी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा."
पीएम मोदी की इस टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों और आलोचकों ने पूछा कि 'दिमाग़ी नक्सल' से उनका मतलब किन लोगों से है.
कुछ आलोचकों का आरोप है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले युवाओं, बुद्धिजीवियों और विचारकों को इस तरह के शब्दों के ज़रिए निशाना बनाया जा रहा है.
मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने ई10 पेट्रोल की वकालत क्यों की
केन बेतवा आंदोलन: लोग बोले, 'हमें नदी के बदले नदी, जंगल के बदले जंगल चाहिए'
मक्का समझौते पर क्या बोले ट्रंप?
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में वसुंधरा राजे सिंधिया समेत इन नेताओं को मिली जगह

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इमेज कैप्शन, नितिन नबीन ने अपनी नई टीम की घोषणा की है (फ़ाइल फ़ोटो) भारतीय जनता पार्टी ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को नई ज़िम्मेदारी दी है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार को 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने की घोषणा की है.
इसके मुताबिक़ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, दिल्ली से राम माधव, ओडिशा से बैजयंत जय पांडा और आंध्र प्रदेश से डी पुरंदेश्वरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दी गई है.
इनके साथ ही उत्तर प्रदेश से रेखा वर्मा, गुजरात से वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, महाराष्ट्र से भारती प्रवीण पवार, पंजाब से मनप्रीत सिंह बादल भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं.
वहीं मध्य प्रदेश से लाल सिंह आर्या, कर्नाटक से एम नागराज, उत्तर प्रदेश से तारिक़ मंसूर और पश्चिम बंगाल से मधुचंद्र कर को भी यह ज़िम्मेदारी दी गई है.
नई टीम में बीएल संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) की जगह दी गई है.
इनके अलावा दो लोगों को राष्ट्रीय संयुक्त सचिव (संगठन), आठ को राष्ट्रीय महासचिव और 16 नेताओं को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है.
कॉकरोच जनता पार्टी क्या सिर्फ़ दबाव बनाने वाले एक ग्रुप के रूप में काम करेगी?
राजस्थान के जर्जर स्कूल ठीक करें या हम पर एडवांस में एफ़आईआर कर दें: सीजेपी

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इमेज कैप्शन, क़रीब एक साल पहले राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की इमारत गिरने से कम से कम सात बच्चों की मौत हो गई थी (फ़ाइल फ़ोटो) कॉकरोच जनता पार्टी ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा निदेशक के दिशानिर्देशों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. सीजेपी ने इस मामले में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को सीधे चुनौती दी है.
सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "मदन दिलावर जी या तो राजस्थान के सभी जर्जर स्कूल ठीक करें, या फिर हम पर एडवांस में एफ़आईआर करवा दें. आप हमें एडवांस में गिरफ़्तार भी कर सकते हैं. आपकी सरकार है, आपकी पुलिस है."
उन्होंने कहा, "लेकिन हम तब तक स्कूलों का निरीक्षण नहीं रोकेंगे, जब तक राजस्थान के सभी स्कूल ठीक नहीं हो जाते."
आशुतोष रांका ने राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक के दिशानिर्देश को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए यह टिप्पणी की है.
दरअसल राजस्थान के सरकारी स्कूलों में लगातार सामने आ रहे छात्र विरोध के बीच शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और फ़ोटो-वीडियोग्राफ़ी को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
यह आदेश ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के लिए 'स्कूल ठीक करो अभियान' शुरू करने का एलान किया है.
सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा था, "मेरे पास नौ ज़िलों के स्कूलों के निरीक्षण के लिए शिकायतें पहुंची हैं और सीजेपी प्रदेशभर में अभियान चलाएगी."
राजस्थान में जारी आदेश के मुताबिक़, स्कूलों में प्रवेश के दौरान विज़िटर रजिस्टर में एंट्री भी करनी होगी. क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल, टॉयलेट समेत अन्य जगह भी अधिकृत शिक्षक और अधिकारी के साथ ही प्रवेश किया जा सकेगा.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस आदेश का विरोध करते हुए इसे 'तानाशाही' बताया और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है.
उन्होंने कहा, "सरकार स्कूलों की टूटी छतों, टपकती कक्षाओं और शिक्षकों की कमी को दूर करने के बजाय उनकी बदहाली छिपाना चाहती है."
महाराष्ट्र: सड़क के गड्ढे देख इन तीन लड़कियों ने बनाया वीडियो, प्रशासन ने क्या किया?
अब मुझे यानी बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा को इजाज़त दीजिए. अब से रात दस बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
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आय से अधिक संपत्ति मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई और ईडी को निर्देश दिया कि वे इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाख़िल न करें (फ़ाइल फ़ोटो) सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामले में निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही को अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्देश दिया.
दरअसल, इस मामले में राहुल गांधी के ख़िलाफ़ सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की गई है.
लाइव लॉ के अनुसार, राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई और ईडी को भी निर्देश दिया कि वे इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाख़िल न करें.
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों केंद्रीय एजेंसियों को राहुल गांधी के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने के निर्देश दिए थे.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को बताया गया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की कार्यवाही को अगले आदेश तक स्थगित रखने का निर्देश दिया.
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका भी दायर की है, जिसमें उन्होंने इस मामले की कार्यवाही को इलाहाबाद हाई कोर्ट से दिल्ली हाई कोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है.
