क्या महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट से संन्यास ले लेना चाहिए?

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    • Author, अभिजीत श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

कभी दुनिया के सबसे ख़तरनाक बल्लेबाज़ों में शुमार रहे और बेस्ट फ़िनिशर कहे जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी की एक बार फिर आलोचना की गई. वजह वही, धीमी बल्लेबाज़ी. इसे लेकर उन्हें पिछले दो सालों के दौरान कई बार आलोचना का सामना करना पड़ा है.

एशिया कप के फ़ाइनल में जहां विकेट के पीछे उनकी चपलता को सराहा गया वहीं टूर्नामेंट के दौरान उनकी बल्लेबाज़ी से खुद उनके चाहने वाले भी निराश हुए और सोशल मीडिया पर उनकी बल्लेबाज़ी की आलोचना की गई.

पिछले कुछ दिनों से कभी वनडे में तो कभी टी20 में धोनी की धीमी बल्लेबाज़ी की लगातार आलोचना की जा रही है. लगातार यह कहा जा रहा है कि कभी दुनिया के बेस्ट फिनिशर कहे जाने वाले धोनी की धार कुंद हो गई लगती है.

एशिया कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ दोनों ही मैच में धोनी को बल्लेबाज़ी का मौका नहीं मिला. बाकी चार मैचों में 19.25 की औसत से 77 रन बनाए. इसके लिए 124 गेंदें खेली. यानी स्ट्राइक रेट 62.10 का रहा. एशिया कप में नाकामी से पहले इंग्लैंड दौरे में भी धोनी का बल्ला खामोश रहा.

अब जरा वनडे में उनके अब तक के प्रदर्शन पर गौर करें.

वनडे में धोनी करीब 88 के स्ट्राइक रेट और 50 से ऊपर की औसत से खेलते हैं. लेकिन 2018 में उनके प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े चौंकाने वाले रहे हैं.

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इस साल अब तक उन्होंने 15 वनडे खेले हैं. रन बनाए हैं 225. इसके लिए उन्होंने 334 गेंदें खेली हैं. उनका औसत रहा महज 28.13 का और स्ट्राइक रेट 67.37.

आंकड़े साफ़ बता रहे हैं कि उनका प्रदर्शन उस धोनी के जैसा नहीं रहा जिसके लिए वो जाने जाते हैं.

अब जरा इसे भी देखें, 327 वनडे खेल चुके धोनी ने वनडे में पिछले साल दिसंबर के बाद से अर्धशतक और जनवरी 2017 के बाद से शतक नहीं जड़े हैं.

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ऐसा क्या है धोनी में?

ऐसा क्या था जिसकी वजह से धोनी को सबका पसंदीदा खिलाड़ी माना जाता रहा है. कभी वो कैप्टन कूल थे और मैच फिनिशर का तमगा उनसे जुड़ा था.

उनके चाहने वाले उनकी पावर हिटिंग के कायल थे. जब वो पिच पर होते थे तो विरोधियों में भी हमेशा खौफ़ का माहौल बना रहता था. स्कोरबोर्ड पर कोई भी आंकड़ा पिच पर उनके रहते असंभव नहीं रहता था. उन्होंने अपनी ताबड़तोड़ और आक्रामक बल्लेबाज़ी से भारत को कई मैच जिताए हैं.

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आज भी जब वो मैदान में उतरते हैं तो उनकी बल्लेबाज़ी के कायल उनसे ये सभी चीज़ें ही चाहते हैं लेकिन जैसा कि कहते हैं समय के साथ सब बदलता है तो उनकी पावर हिटिंग का कमाल भी अब वैसा नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था.

इसलिए सुनील गावस्कर जैसे पूर्व क्रिकेटर भी कह रहे हैं धोनी को घरेलू क्रिकेट खेल कर राष्ट्रीय टीम के लिए अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए.

ये वो ही गावस्कर हैं जो धोनी के बहुत बड़े प्रशंसक माने जाते रहे हैं और 2017 में यह कह चुके हैं कि अगर कैप्टन कूल ने संन्यास लेने की घोषणा की होती तो वो उनके घर के बाहर बैठकर उनकी वापसी के लिए धरना देते.

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सबसे सफल कप्तान, विकेटकीपर और बल्लेबाज़

भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तान, विकेटकीपर और बल्लेबाज़ रहे धोनी के कद को देखते हुए उन्हें न तो कप्तान विराट और ना ही मैनजमेंट हटने को कहेगा.

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लेकिन क्या उन्हें स्वयं वनडे और टी20 में आगे खेलते रहने को लेकर सोचना चाहिए और टेस्ट क्रिकेट की तरह ही कुछ निर्णायक फ़ैसला लेना चाहिए ताकि आगे युवा विकेटकीपर्स को मौका मिल सके.

हालांकि विशेषज्ञों की राय अलग है. वो एकमत से कहते हैं कि टीम को अभी धोनी के अनुभव की ज़रूरत है.

इसके साथ ही वो यह भी कहते हैं कि फ़िलहाल विकेट के पीछे धोनी का विकल्प कोई और नहीं दिखता है.

पूर्व क्रिकेटर मदन लाल कहते हैं, "धोनी की बल्लेबाज़ी कमजोर ज़रूर रही है लेकिन 2019 का वर्ल्ड कप खेलने के लिए वो अभी सबसे योग्य विकेटकीपर हैं. बल्लेबाज़ी में सुधार को लेकर धोनी को घरेलू क्रिकेट खेलना चाहिए. उनके खेल में सुधार हो तो यह उनके साथ ही टीम के लिए भी बेहतर होगा."

ऋषभ पंत
इमेज कैप्शन, ऋषभ पंत

'ऋषभ पंत की विकेटकीपिंग बेहद कमज़ोर'

मदन लाल कहते हैं कि बल्लेबाज़ी में धोनी का विकल्प ऋषभ पंत हो सकते हैं.

हालांकि वो कहते हैं, "वेस्टइंडीज सिरीज़ से यह और साफ़ होगा. लेकिन फिलहाल ऋषभ पंत को अपनी विकेटकीपिंग में बहुत सुधार करने की ज़रूरत है. मेरी नज़र में 2019 का क्रिकेट वर्ल्ड कप धोनी ही खेल रहे हैं."

क्या धोनी को संन्यास ले लेना चाहिए. यह पूछे जाने पर क्रिकेट विश्लेषक अयाज़ मेमन कहते हैं, "पिछले कुछ दिनों से धोनी लय में नहीं हैं लेकिन विकेटकीपिंग के मामले में उनसे बेहतर विकेटकीपर फिलहाल भारत के पास नहीं है."

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'धोनी को खोना नहीं चाहिए'

धोनी (10,123), सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ के बाद सर्वाधिक एकदिवसीय रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं.

मेमन कहते हैं, "धोनी टीम में तजुर्बा लाते हैं, युवाओं के लिए मेंटर बनते हैं और कप्तान के लिए बहुत बड़े सपोर्ट. लिहाजा टीम में उनकी जगह को लेकर कोई समस्या नहीं दिखती."

टीम के प्रदर्शन को और ऊंचाई तक ले जाना है तो यह एक ऐसी जगह है जिस पर हमें उनके ही जैसा एक दमदार बल्लेबाज़ और विकेटकीपर चाहिए.

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अयाज़ मेमन कहते हैं, "ऋषभ पंत ने इंग्लैंड में अपने प्रदर्शन से यह उम्मीद दिखाई है कि वो धोनी की जगह लेने के लिए फिलहाल सबसे योग्य उम्मीदवार दिख रहे हैं लेकिन बल्लेबाज़ी में. दिनेश कार्तिक, पार्थिव पटेल, रिद्धिमान साहा और ऋषभ पंत सभी विकेटकीपिंग के मामले में धोनी से कहीं पीछे हैं. साथ ही धोनी का अनुभव टीम के लिए बहुत कीमती है. लिहाजा 2019 के वर्ल्ड कप तक सेलेक्टर्स को भी उन्हें खोना नहीं चाहिए."

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