मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने दतिया जिले की पूरी संगठनात्मक इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है.
पार्टी ने यह कार्रवाई उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए गठित समिति की सिफारिश पर की है.
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बीजेपी को दतिया में लगातार दूसरी बार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है. उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया था.
नतीजों के बाद आशुतोष तिवारी ने भीतरघात के सवाल पर पत्रकारों से कहा था, "पहले गद्दार को तलाशना होगा."
प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश और समीक्षा समिति की अनुशंसा पर दतिया जिला संगठन की वर्तमान संरचना भंग की जाती है.
आदेश के मुताबिक जिला अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, जिला कार्यसमिति, मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभिन्न विभागों समेत जिले की सभी संगठनात्मक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है.
इससे पहले पार्टी ने प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अम्बाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति बनाई थी. समिति को चुनाव की तैयारियों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर हार के कारणों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है.
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई थी. इसी वजह से दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ.
हालांकि इस उपचुनाव से राज्य सरकार के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ना था, लेकिन इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में बीजेपी की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा माना जा रहा था.
पिछले साल जुलाई में प्रदेश अध्यक्ष बने हेमंत खंडेलवाल के लिए भी इसे संगठनात्मक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था. चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री मोहन यादव, दोनों उपमुख्यमंत्री, कई मंत्री और संगठन के वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे.
बीजेपी ने इस सीट से छह बार विधायक रहे और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर पहली बार चुनाव लड़ रहे आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था.
टिकट की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर नाराज़गी की चर्चा रही. कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया और नामांकन के दौरान नरोत्तम मिश्रा के भावुक होने की भी चर्चा हुई. हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया.
दूसरी ओर कांग्रेस भी आंतरिक खींचतान से जूझ रही थी. चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए.
मतगणना से एक दिन पहले कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था. इसके बावजूद कांग्रेस यह सीट बचाने में सफल रही.
नतीजों के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बिना किसी का नाम लेते हुए, कहा था कि पार्टी परिणामों की समीक्षा करेगी और यदि किसी स्तर पर अनुशासनहीनता सामने आती है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
इसके बाद पार्टी ने दो सदस्यीय समीक्षा समिति का गठन किया, जिसकी सिफारिश पर अब दतिया जिले की पूरी संगठनात्मक इकाई को भंग कर दिया गया है.