कोरोना वायरस के डर से क्या-क्या चीज़ें जमा कर रहे हैं लोग?

A woman leaving a supermarket in California
इमेज कैप्शन, जैसे ही अमरीकी प्रशासन ने कुछ इलाक़ों में लोगों से ख़ुद को अलग-थलग कर लेने के निर्देश जारी किये, बड़े स्टोर्स के बाहर भारी भीड़ देखी गई जो घर का सामान थोक में ख़रीदने के लिए पहुँची थी
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चीन के वुहान शहर से फैलना शुरू हुए कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है.

शुक्रवार सुबह तक 79 देशों के 95,300 से अधिक लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की जा चुकी है. वहीं इस वायरस की वजह से मरने वालों की संख्या बढ़कर 3,280 के पार चली गई है.

चीन के बाद दक्षिण कोरिया, इटली और ईरान में कोरोना वायरस के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किये गए हैं.

आधिकारिक तौर पर भारत में भी कोरोना वायरस के क़रीब 30 मामले दर्ज हो चुके हैं. इनमें से अधिकांश मामले केरल, तेलंगाना, यूपी और दिल्ली एनसीआर में दर्ज किये गए हैं.

जैसे-जैसे लाइलाज कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है, लोगों में भय और चिंता भी बढ़ रही है. यही वजह है कि लोग अपने स्तर पर पूरी तरह तैयार रहना चाहते हैं और इसके लिए कुछ ज़रूरी चीज़ें ख़रीदकर जमा (स्टॉक) कर रहे हैं.

लेकिन वे कौन-कौनसी चीज़ें हैं जिन्हें लोग जमा कर रहे हैं? और जमाखोरी की वजह से किन चीज़ों की आने वाले दिनों में कमी हो सकती है? उनकी एक लिस्ट हमने तैयार की है.

People queue up outside a government pharmacy in Taiwan
इमेज कैप्शन, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में पहले ही मास्क की किल्लत देखने को मिल रही है

मास्क

आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल मास्क वायरस के मामले में यूँ तो सीमित सुरक्षा ही प्रदान करते हैं, लेकिन इनकी डिमांड दुनिया में इस वक़्त सबसे ज़्यादा है.

ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनी अमेज़न समेत तमाम बड़े मेडिकल विक्रेताओं का कहना है कि उनके पास जो मास्क हैं, वो बहुत तेज़ी से ख़त्म हो रहे हैं.

ब्राज़ील की एक मेडिकल कंपनी जो बीते कुछ हफ़्तों से मास्क का दोगुना उत्पादन कर रही है, उसके सीईओ मिगवेल लुइज़ ग्रिचेनो ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "लोग मास्क ऐसे ख़रीद रहे हैं जैसे वो गोल्ड हो."

पश्चिमी देशों में मेडिकल किट जो कि सामान्य रूप से उपलब्ध होती है, वो भी नहीं मिल पा रही. कई देशों में प्रशासन यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि कुछ मेडिकल किट्स को डॉक्टरों के लिए रिज़र्व कर लिया जाये ताकि मरीज़ों के इलाज के समय उन्हें इसकी किल्लत का सामना ना करना पड़े.

विश्व स्वास्थय संगठन के एक अनुमान के मुताबिक़ 'कोरोना वायरस के प्रकोप से लड़ते हुए हेल्थ कर्मियों के लिए क़रीब 9 करोड़ मास्क, 7.6 करोड़ जोड़ी दस्ताने और क़रीब 16 लाख चश्मों की ज़रूरत पड़ने वाली है.'

विश्व स्वास्थय संगठन के डायरेक्टर जनरल टेडरोस अधानोम ने कहा है कि अगर ज़रूरी मेडिकल संसाधनों की कमी होती है, तो लोगों के इलाज में लगे डॉक्टरों और नर्सों के लिए यह लड़ाई और भी मुश्किल हो जाएगी.

A worker at a medical supply store in Brazil demonstrates the popular model of face mask shoppers are buying
इमेज कैप्शन, WHO के अनुमान के अनुसार कोरोना वायरस से लड़ने के लिए क़रीब नौ करोड़ मास्क चाहिए होंगे

दक्षिण कोरिया, जहाँ अब तक चीन के बाद कोरोना वायरस के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किये गए हैं, वहाँ की सरकार ने मास्क के निर्यात पर बैन लगा दिया है. साथ ही मास्क के उत्पादन को भी बढ़ाया गया है. और तो और स्थानीय प्रशासन ने सीमा भी तय कर दी है कि एक आदमी एक हफ़्ते में सिर्फ़ दो मास्क ही ख़रीद सकता है.

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने मास्क की कमी होने पर देश से माफ़ी भी माँगी है.

वहीं थाईलैंड में जहाँ मास्क की कमी को लेकर लोगों का आक्रोश सार्वजनिक तौर पर देखने को मिला है, वहाँ सरकार ने अधिकारियों की एक टीम बनाई है जो इस बात की निगरानी करेगी कि मास्क की कालाबाज़ारी तो नहीं हो रही या उन्हें ऊंची क़ीमत पर देश से बाहर तो नहीं भेजा जा रहा.

भारत में भी मास्क थोक में ख़रीदे जा रहे हैं. दिल्ली एनसीआर में कोरोना वायरस के मामले दर्ज होने के साथ ही लोगों ने मास्क ख़रीदने शुरू कर दिये हैं.

A child wears a protective face mask and applies hand sanitiser at a school in Japan
इमेज कैप्शन, हैंड सेनेटाइज़ की डिमांड भी इस वक़्त बहुत बढ़ी हुई है

सेनेटाइज़र

मास्क की ही तरह हैंड सेनेटाइज़र की भी क़ीमत दोगुनी हो गई है जिसकी वजह है इसकी बढ़ी हुई माँग.

फ़्रांस में तो हैंड सेनेटाइज़र सामान्य से तीन गुनी क़ीमत पर बेचे जा रहे हैं. सेनेटाइज़र की बिक्री के लिए तेज़ी से विकसित हुए ब्लैक मार्केट पर नियंत्रण करना इस वक़्त फ़्रांस की सरकार के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है.

फ़्रांस के वित्त मंत्री ब्रूनो ली मेर ने चेतावनी दी है कि अगर विक्रेताओं ने मास्क और सेनेटाइज़र तय क़ीमतों से अधिक पर बेचना बंद नहीं किया तो सरकार को इनकी क़ीमतें रेगुलेट करनी होंगी.

पाकिस्तान सरकार ने भी विक्रेताओं को चेताया है कि मेडिकल किट या दवाओं की मुनाफ़ाखोरी करने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्यवाही की जाएगी.

ईरान के स्वास्थय मंत्री सईद नामाकी ने भी माना है कि कुछ कंपनियाँ सेनेटाइज़र समेत अन्य ज़रूर आइटमों को बहुत ज़्यादा क़ीमतों पर बेच रहे हैं.

सेनेटाइज़र की बढ़ती माँग के कारण भारत के कई शहरों में भी सेनेटाइज़र के रेट पहले से बढ़े हैं. ऐसी ही स्थिति रूस में भी देखी जा रही है.

Shoppers leave a supermarket in Melbourne stocked up on toilet roll
इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलिया के कई बड़े सुपर स्टोर्स से टॉयलेट रोल ख़त्म होने की रिपोर्टें मिली हैं

टॉयलेट रोल

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए दुनिया भर में ख़ुद को अलग-थलग कर लेने का तरीक़ा अपनाया जा रहा है. स्कूल बंद किये जा रहे हैं. लोगों से कहा जा रहा है कि वे घरों से काम करें. ऐसे में लोगों को जिन घरेलु चीज़ों की ज़रूरत होती है, वो उन्हें जमा कर रहे हैं.

और इनमें एक प्रमुख आइटम है - टॉयलेट रोल.

कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित हुए देशों में शामिल सिंगापुर, जापान और हांगकांग में टॉयलेट रोल की कमी पड़ने लगी है.

वहीं ऑस्ट्रेलिया के कई बड़े सुपर मार्केट टॉयलेट रोल की किल्लत के चलते हाथ खड़े कर चुके हैं, जबकि कुछ को यह सीमा तय करनी पड़ी है कि एक ग्राहक एक बार में चार पैकेट ही ख़रीद सकता है.

घरेलु उत्पादों में सिर्फ़ टॉयलेट रोल ही ऐसा आइटम नहीं है जिसकी किल्लत देखी जा रही है. बच्चों के डायपर, वाइप और पैक्ड दूध के कार्टन भी बाज़ार से ग़ायब हो रहे हैं.

The concept of someone paying for groceries with a mobile phone
इमेज कैप्शन, यूके में खाने पीने के सामान की तो कोई किल्लत नहीं है, लेकिन उन्हें घर तक डिलीवर करने वाला कोई नहीं मिल रहा

जेनेरिक दवाएं

दुनिया को जेनेरिक दवाओं की लगभग 20 फ़ीसद सप्लाई भारत से होती है.

मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने कहा है कि वो 20 जेनेरिक दवाओं के निर्यात को सीमित कर रहा है. इनमें दुनिया भर में दर्द कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली जेनेरिक दवा पेरासिटामोल भी शामिल है. हालांकि इसे बनाने में चीन से आये कुछ तत्वों का भी इस्तेमाल होता है.

Paracetamol

लेकिन भारत सरकार ने कहा है कि 'इसे लेकर घबराने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि सरकार के पास अगले तीन महीने तक का पर्याप्त स्टॉक है.'

बीबीसी की मॉनिटरिंग टीम के अनुसार केन्या और नाइजीरिया जैसे देशों में दवाओं की कमी को लेकर चिंता जताए जाने की रिपोर्टें सामने आई हैं.

केन्या के डेली नेशन अख़बार के अनुसार भारत द्वारा दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद जेनेरिक दवाओं की क़ीमत में काफ़ी उछाल दर्ज किया गया है.

वहीं नाइजीरिया के डेली ट्रस्ट अख़बार ने भी लिखा है कि भारत द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने के बाद देश में दवाओं की किल्लत हो सकती है.

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