म्यूनिख ओलंपिक: वह रात, जब चरमपंथियों ने खेला था खूनी खेल

ओलंपिक विलेज में खिलाड़ियों के अपार्टमेंट से झांकता चरमपंथी
इमेज कैप्शन, ओलंपिक विलेज में खिलाड़ियों के अपार्टमेंट से झांकता चरमपंथी
    • Author, रेहान फ़ज़ल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

कैलिशनिकोव एसॉल्ट राइफ़ल का आविष्कार एक साइबेरियाई किसान ने किया था. इस राइफ़ल में 7.62 एमएम गोलियों के 30 राउंड होते हैं.

अगर इसे ऑटोमैटिक मोड पर लगा दिया जाए तो इससे एक मिनट में 100 गोलियाँ निकलती हैं और उनकी रफ़्तार होती है एक सेकेंड में 2330 फ़ीट या दूसरे शब्दों में 1600 मील प्रति घंटे.

5 सितंबर, 1972 को इस तरह की कुछ राइफ़लों को उनकी चिकनाई युक्त रैपिंग्स से निकाल कर 'ब्लैक सेप्टेंबर' के आठ चरमपंथियों के हवाले किया गया. इन्हें लेकर ये ओलंपिक गाँव में '31 कोनोलीस्ट्रास' की तरफ़ बढ़े जहाँ इसराइली एथलीटों का दल गहरी नींद में सो रहा था.

इन फ़िदाइनों में से अब तक जीवित बचे एकमात्र शख्स जमाल अल गाशी को वो दिन अभी तक याद है. गाशी बताते हैं, "उस रात हम खाने के लिए एक रेस्तराँ में गए. वहाँ हम पहली बार अपने चीफ़ से मिले जिन्होंने पहली बार हमें बताया कि हमें करना क्या है. मुझे गर्व हुआ कि पहली बार मुझे इसराइलियों का सामना करने का मौका मिलेगा. हमसे हमारे पासपोर्ट ले लिए गए ताकि इस बात का कोई सुराग न मिल सके कि हम कौन हैं. इसके बाद हम ओलंपिक गाँव के लिए रवाना हो गए."

चरमपंथी
इमेज कैप्शन, बंधकों वाले कमरे से बालकनी पर खड़ा चरमपंथी समूह का सदस्य.

रास्ते में मिले थे अमरीकी खिलाड़ी

सुबह 4 बजे इन लोगों को खेल गाँव की 6 फ़ुट ऊँची तार की बाड़ को फलांगते देखा गया. जमाल अल गाशी याद करते हैं, "जब हम चहारदीवारी पर चढ़ रहे थे तो अचानक हमारा सामना कुछ अमरीकी एथलीटों से हो गया जो रात भर तफ़रीह करने के बाद अपने फ़्लैट लौट रहे थे. मुझे याद है वो शराब के नशे में थे. दिलचस्प बात ये है कि हम लोगों ने एक-दूसरे को तार की बाड़ पर चढ़ने में मदद की. मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनमें से एक का हाथ खींचकर अंदर खींच लिया. हमने एक-दूसरे को शुक्रिया कहा और आगे बढ़ गए."

जमाल गाशी आगे बताते हैं, "हम फ़्लैटों की तरफ़ बढ़ चले. हम में से हर एक के पास एक स्पोर्ट्स बैग था जिसमें कपड़ों के नीचे हमारे हथियार छिपे हुए थे. हर एक को ख़ास ज़िम्मेदारी दी गई थी. मेरे सारे साथी तो अंदर चले गए. मेरा काम था बाहर रहकर इमारत की निगरानी करना."

ओलंपिक विलेज के बाहर खड़े फोटोग्राफ़र
इमेज कैप्शन, ओलंपिक विलेज के बाहर खड़े फोटोग्राफ़र

साथियों के लिए भिड़ गए कुश्ती रेफ़री

अपार्टमेंट के अंदर सभी इसराइली गहरी नींद में सोए थे. सिर्फ़ कुश्ती के रेफ़री योसेफ़ गतफ़्रायंद थोड़े उनींदे से थे. उन्हें थोड़ी-सी आवाज़ सुनाई दी, जैसे कोई दरवाज़े को खुरच रहा हो. मामूली रोशनी में भी, नींद से भरी आँखों के बावजूद उन्हें एक फ़िदायीन की आँख और उसकी कैलिशनिकोव की नाल दिखाई दे गई. एक सेकेंड में उनकी नींद काफ़ूर हो गई और 6 फ़ुट 3 इंच ऊँचे 140 किलो वज़नी भीमकाय योसेफ़ ने चिल्ला कर हिब्रू में कहा, "चेवरेतिसतात्रू" (बचो लड़कों).

उन्होंने अपने भालू जैसे शरीर का पूरा वज़न दरवाज़े के पीछे लगा दिया. चरमपंथियों ने दरवाज़े की चाबी ज़मीन पर गिरा दी और सातों लोग एकसाथ दरवाज़े को धक्का देने लगे. योसेफ़ ने पूरे 10 सेकेंड तक दरवाज़ा नहीं खुलने दिया.

योसेफ़ गतफ़्रायंद
इमेज कैप्शन, योसेफ़ गतफ़्रायंद

एक दूसरे इसराइली एथलीट तूविया सोकोलोस्की के लिए खिड़की तोड़कर बाहर निकल भागने के लिए इतना समय काफ़ी था. वो खिड़की से नीचे कूदे और तेज़ी से भागने लगे. अरब चरमपंथी उनके पीछे दौड़ा. बाद में सोकोलोस्की ने पीटर टेलर को बताया, "वो मुझपर गोली चलाने लगा. मैं सुन सकता था कि गोलियाँ मेरे कान के बगल से होकर जा रही थीं. लेकिन मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा."

उधर अरब चरमपंथियों ने अब तक योसेफ़ गतफ़्रायंद पर काबू पा लिया था. चार और इसराइलियों केहेर शोर, लियों अमित्ज़र शपीरा, आंद्रे स्पिटज़र और याकोव स्प्रिंगर को उन्होंने बंदूक के बल पर अपने काबू में कर लिया था. वो अपार्टमेंट 2,4 और 5 तक तो नहीं पहुंच पाए, लेकिन अपार्टमेंट 3 में रह रहे इलीज़ेर हाल्फ़िन, मार्क स्लाविन, गाद ज़ोबारी और डेविड मार्क बर्गर, ज़ीव फ़्रीडमैन और योसेफ़ रोमाना उनके हत्थे लग गए. जब चरमपंथियों का नेता ईसा दूसरे बेडरूम में घुसा तो उसका सामना मोशे वेनबर्ग से हुआ जिसने फल काटने वाला चाकू उठाकर उस पर हमला कर दिया.

मोशे वेनबर्ग
इमेज कैप्शन, मोशे वेनबर्ग

ईसा ज़मीन पर गिरा लेकिन उसके पीछे खड़े चरमपंथी ने वेनबर्ग के सिर पर गोली चला दी. जमाल गाशी याद करते हैं, "हमारा लीडर पहले कमरे में गया, लेकिन उसे पता नहीं चला कि उसके पीछे एक इसराइली खड़ा है. उसने उसपर पूरी ताकत से हमला कर दिया. उसकी कैलिशनिकोव गिर गई. लेकिन हमारी टीम का एक सदस्य डर गया और उसने इसरायली को गोली से उड़ा दिया."

भारतीय खिलाड़ियों को पाकिस्तान पर हुआ शक

अब तक 25 मिनट बीत चुके थे. फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने दो इसराइली एथलीट मार दिए थे, दो एथलीट भागने में सफल हो गए थे और आठ इसराइली एथलीट बंदी बनाए जा चुके थे.

उधर इसरायली अपार्टमेंट के ठीक सामने के अपार्टमेंट में रह रहे भारतीय धावक एटवर्ड सिक्वीरा की आँख भी बहुत तड़के खुल गई. उन्होंने सामने वाले अपार्टमेंट में कुछ शोर सुना तो अपने कमरे में रह रहे दूसरे एथलीट श्रीराम सिंह को जगा दिया. सिक्वीरा को लगा कि पाकिस्तानी चरमपंथियों ने भारत के खिलाड़ियों पर हमला बोल दिया है क्योंकि कुछ महीनों पहले ही भारत-पाकिस्तान का युद्ध समाप्त हुआ था. उन्होंने सामने की बालकनी पर नकाबपोश ब्लैक सेपटेंबर के चरमपंथी को देखा.

चरमपंथी
इमेज कैप्शन, बालकनी से आसपास का मुआयना करता चरमपंथी.

उधर हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार जब प्रैक्टिस के लिए अपने अपार्टमेंट के बाहर आए तो उन्होंने इसरायली अपार्टमेंट के आगे बहुत बड़ी भीड़ देखी. ऊपर से एक चरमपंथी नीचे खड़े पुलिसवालों से कुछ बात कर रहा था.

बच निकले इसराइलियों ने सबसे पहले इस हमले के बारे में शोर मचाया. आधे घंटे के अंदर जर्मन प्रशासन को चरमपंथियों की मांगों की एक लिस्ट टाइप की हुई अंग्रेज़ी में मिल गई.

रेहान फ़ज़ल से बात करते हमले के वक़्त म्यूनिख में मौजूद रहे हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार.
इमेज कैप्शन, रेहान फ़ज़ल से बात करते हमले के वक़्त म्यूनिख में मौजूद रहे हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार

इस बीच उन्होंने मोशे वेनबर्गर के शव को नीचे सड़क पर फेंक दिया था. उनकी मांग थी कि इसराइल और जर्मनी की जेलों में रह रहे उनके 234 साथियों को रिहा किया जाए और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए तीन विमानों का प्रबंध किया जाए. पहले समय सीमा सुबह 9 बजे तक रखी गई. फिर उसे दोपहर तक बढ़ाया गया.

इसराइल ने मांगें मानने से किया इनकार

जॉर्ज जोनास अपनी किताब 'वेनजिएंस- अ ट्रू स्टोरी ऑफ़ इसराइली काउंटर टेरेरिस्ट टीम' में लिखते हैं, "जर्मनी के चांसलर विली ब्रांट ने इसराइल की प्रधानमंत्री गोल्डा मईर को फ़ोन किया, लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. इन मामलों में इसराइल की नीति साफ़ थी. इस तरह के हमलों में किसी मांग को कभी स्वीकार न करना."

इसराइल की ओलंपिक टीम के क्वॉर्टर्स के पास जमा पुलिसकर्मी
इमेज कैप्शन, इसराइल की ओलंपिक टीम के क्वॉर्टर्स के पास जमा पुलिसकर्मी

इस बीच कैदियों को छोड़ने की समय सीमा को रात 9 बजे तक फिर बढ़ा दिया गया. चरमपंथी तीन विमानों के स्थान पर एक विमान लेने के लिए तैयार हो गए. आठ बजे अपार्टमेंट के अंदर खाना पहुंचाया गया. जर्मन जानबूझ कर बहुत सारा खाना ले कर गए. उन्हें उम्मीद थी कि वो जर्मन वॉलंटियर्स से खाना अंदर पहुंचाने के लिए कहेंगे और वो इस मौके का फ़ायदा उठाते हुए चरमपंथियों को दबोच लेंगे.. लेकिन उन्होंने खाना बाहर ही रखने के लिए कहा और उनका नेता ईसा एक-एक कर खाने के बड़े डिब्बे अंदर ले कर गया.

इस बीच जर्मन सरकार फ़लस्तीनी चरमपंथियों और बंधक इसराइली एथलीटों को मिस्र ले जाने के लिए अपना विमान देने को तैयार हो गई. अंदर ही अंदर तय हुआ कि जब ये लोग फ़र्सटेनफ़ेल्डब्रक हवाई अड्डे से उड़ान भरने वाले होंगे तभी जर्मन कमांडो इन पर हमला कर बंधकों को छुड़ाने की कोशिश करेंगे.

पश्चिमी जर्मनी का पुलिस अधिकारी
इमेज कैप्शन, चरमपंथियों पर नज़र रखने की कोशिश में तैनात पश्चिमी जर्मनी का पुलिस अधिकारी

अनाड़ियों जैसी थी ऑपरेशन की योजना

रात ठीक 10 बजकर बीस मिनट पर खेल गाँव के पास के हेलिपैड से दो हेलिकॉप्टरों ने उड़ान भरी. इससे पहले एक बस में नौ बंधकों और आठ चरमपंथियों को हेलिपैड पर लाया गया. ठीक 10 बजकर 35 पैंतीस मिनट पर दोनों हेलिकॉप्टरों ने पहले से ही खड़े हुए 727 बोइंग के करीब 100 गज़ की दूरी पर लैंड किया.

'वन डे इन सेपटेंबर' के लेखक साइमन रीव बताते हैं, "जैसे ही हेलिकॉप्टर लैंड करने लगे, चीज़ें ख़राब होती चली गईं. जब ये हेलिकॉप्टर लैंड करने के लिए ऊपर चक्कर लगा रहे थे, काहिरा जाने के लिए तैयार 727 बोइंग विमान में तैनात 17 जर्मन सैनिक विमान से बाहर निकल आए. उन्हें लगा कि वहाँ उनके लिए बहुत ख़तरा है. इसका नतीजा ये हुआ कि हथियारों से लैस आठ फ़लस्तीनी चरमपंथियों से निपटने के लिए सिर्फ़ पाँच जर्मन स्नाइपर बचे रह गए.

जर्मन पुलिसकर्मी
इमेज कैप्शन, मोर्चा संभाले खड़ा जर्मन पुलिसकर्मी

वो नाम भर के स्नाइपर थे. न तो उनके पास इस तरह के ऑपरेशन के लिए कोई प्रशिक्षण था और न ही उचित हथियार और बुलेट प्रूफ़ जैकेट्स. वो पूरे हवाई अड्डे पर छितरे हुए थे. उनमें से कम से कम दो लोग दूसरे स्नाइपर्स की फ़ायरिंग रेंज की सीध में थे. बिल्कुल नौसिखियों की तरह इस हमले की योजना बनाई गई थी.

जैसे ही हेलिकॉप्टर उतरा दो छापामार उतरकर उस विमान पर चढ़ गए जो उन्हें काहिरा ले जाने के लिए तैयार खड़ा था. उस जहाज़ में उन्हें कोई नहीं मिला. न तो उसमें कोई पायलट था और न ही कोई अन्य विमानकर्मी. उन्हें उसी समय पता चल गया कि उनके लिए जाल बिछा दिया गया है. वो फ़ौरन जहाज़ से उतरे और वापस अपने हेलिकॉप्टर्स की तरफ़ जाने लगे. उसी समय जर्मन मार्क्समेन ने गोली चला दी.

उसी समय पता चला कि गोली उन जगहों पर जा रही है जहाँ दूसरे जर्मन स्नाइपर छिपे हुए थे. जर्मन निशानेबाज़ों का निशाना चूक गया. एक चरमपंथी के पैर में गोली लगी. वो लंगड़ाता हुआ हेलिकॉप्टर तक पहुंचा और उसके नीचे छिप गया. जर्मन इस तरह फ़ायरिंग कर रहे थे जैसे वो कबूतरों पर निशाना लगा रहे हों. दूसरी तरफ़ चरमपंथी बहुत अधिक उत्प्रेरित थे और लगातार फ़ायरिंग कर रहे थे और ग्रेनेड फेंक रहे थे. एक जर्मन पुलिस अफ़सर के सिर में गोली लगी और उसकी तुरंत मौत हो गई.'

ऑपरेशन की कामयाबी की ग़लत ख़बर

इस बीच पता नहीं कहाँ से ये ख़बर फैल गई कि ऑपरेशन सफल रहा है और सभी बंधकों को ज़िंदा बचा लिया गया है. इसके बारे में सबसे पहले फ़्लैश रॉयटर्स पर आया. जैसे ही गोल्डा मईर को इसके बारे में पता चला, उन्होंने खुशी के मारे शैंपेन की बोतल खोल दी. अगली सुबह इसराइल के मुख्य अख़बार 'येरूसलम पोस्ट' की हेड लाइन थी, 'सभी बंधक बचाए गए'. यहाँ तक कि बंधकों के रिश्तेदारों को इसकी ख़बर दे दी गई और वो सब खुशी में नाचने लगे.

गोल्डा मईर
इमेज कैप्शन, गोल्डा मईर

इस बीच दोनों हेलिकॉप्टरों के पायलटों ने जान बचाने के लिए तेज़ दौड़ लगाई, लेकिन वो क्रॉस फ़ायर में फंस गए और बुरी तरह से घायल हो गए. इसराइली बंधक कुछ भी करने की स्थिति में नहीं थे क्योंकि एक तो उनकी आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी और दूसरे उनके दोनों हाथ भी बंधे थे.

साइमन रीव आगे लिखते हैं, "फ़ायरिंग शुरू होने के काफ़ी देर बाद हेलिकॉप्टर्स की तरफ़ बख़्तरबंद गाड़ियाँ भेजी गईं. इन गाड़ियों में सवार जर्मन सैनिकों ने फ़िलिस्तीनी चरमपंथी समझकर अपने ही एक साथी पर गोली चला दी.

चरमपंथियों को लगा कि अब उनका अंतिम समय आ गय़ा है और उनके पास उन बंधकों को ख़त्म करने का आख़िरी मौका बचा है. उन्होंने अपनी बंदूकों की नाल हेलिकॉप्टर्स के पीछे बैठे हुए इसराइली बंधकों की तरफ़ घुमा दी. एक दूसरे चरमपंथी ने दूसरे हेलिकॉप्टर के अंदर एक ग्रेनेड फेंक दिया जिससे उसमें आग लग गई.

उसी समय सारे नौ इसराइली बंधकों की मौत हो गई. उस समय वहाँ सैकड़ों जर्मन सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, लेकिन वो एक भी इसराइली बंधक को नहीं बचा सके. पाँच चरमपंथी मारे गए, तीन को ज़िंदा पकड़ लिया गया और एक जर्मन सैनिक की मौत हो गई.'

उस कमरे का दृश्य, जहां चरमपंथियों ने खिलाड़ियों को बंधक बनाया था.
इमेज कैप्शन, उस कमरे का दृश्य, जहां चरमपंथियों ने खिलाड़ियों को बंधक बनाया था

उसी समय हवाई अड्डे की इमारत से सारा दृश्य देख रहे इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के प्रमुख ज़्वी ज़मीर ने प्रधानमंत्री गोल्डा मईर को फ़ोन लगाया. ज़मीर धीरे से बोले, "गोल्डा मेरे पास बहुत ख़राब ख़बर है. मैं हवाई अड्डे से बोल रहा हूँ. एक भी इसराइली खिलाड़ी जीवित नहीं बचा है.'

गोल्डा मईर को यकीन ही नहीं हुआ कि वो क्या सुन रही हैं. वो कहने लगीं, "लेकिन रेडियो और टीवी पर तो कहा जा रहा है कि सब लोग बच गए?" ज़मीर ने उनको रोका, "गोल्डा... मैंने उन्हें अपनी आंखों से देखा है.. कोई भी नहीं बच सका."

मईर के हाथों से टेलिफ़ोन का रिसीवर छूट गया. कुछ मिनटों बाद टेलिविजन पर जिम मके की आवाज़ गूंजी, "हमें अब पता चला है कि कुल 11 बंधक थे. 2 लोग कल अपने कमरों में मारे गए थे. आज रात 9 लोग हवाई अड्डे पर मार दिए गए.... दे आर ऑल गॉन... किसी को भी बचाया नहीं जा सका."

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