इराक़ से ईरान पर नज़र रखना चाहते हैं ट्रंप, बगदाद नाखुश

इराक़ में अमरीकी ठिकाना
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इराक़ के राष्ट्रपति बरहम सालेह ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस बयान की निंदा की है जिसमें ट्रंप ने कहा था कि वो ईरान पर नज़र रखने के लिए इराक़ में अमरीकी सेना की मौजूदगी बनाए रखना चाहते हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा था कि जिहादी समूह इस्लामिक स्टेट से मुक़ाबले के लिए अमरीकी सैनिक जिस ठिकाने का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो उसे बनाए रखना चाहते हैं. वो इसके जरिए 'ईरान पर नज़र बनाए रखना चाहते हैं.'

सालेह ने सोमवार को कहा है कि अमरीका ने ऐसा करने के लिए इराक़ से अनुमति नहीं मांगी है.

उन्होंने आगे कहा कि अमरीका को चरमपंथ से संघर्ष तक ही सीमित रहना चाहिए और दूसरे एजेडों को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए.

एक अनुमान के मुताबिक इराक़ में अमरीका के करीब पांच हज़ार सैनिक हैं. ये सैनिक आईएस से संघर्ष में इराक़ के सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण और सलाह देते हैं. साथ ही उन्हें सहयोग भी करते हैं. बीते एक साल से ज़्यादा वक़्त से इराक़ का कोई भी हिस्सा पूरी तरह से आईएस के नियंत्रण में नहीं है.

डोनल्ड ट्रंप

क्या है ट्रंप का इरादा?

सीबीएस को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के अपने फ़ैसले का बचाव किया. सीरिया में अमरीका के करीब दो हज़ार सैनिक हैं जो आईएस से लड़ाई में कुर्द लड़ाकों की मदद करते हैं.

ट्रंप ने कहा कि जल्दी ही इराक़ के अनबार प्रांत में सैनिक पहुंचेंगे. उनके नए काम में इसराइल की हिफाजत करना और ईरान पर नज़र रखना शामिल होगा.

ट्रंप प्रशासन ईरान पर चरमपंथ को बढ़ावा देने में अव्वल होने और परमाणु हथियार हासिल करने की चाहत रखने का आरोप लगाता रहा है.

ट्रंप ने कहा, "मैं इस ठिकाने को बनाए रखना चाहता हूं और इसका एक कारण ये है कि मैं ईरान पर नज़र रखना चाहता हूं क्योंकि ईरान एक वास्तविक समस्या है."

ये पूछने पर कि क्या इराक़ में तैनात सैनिकों को ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, ट्रंप ने कहा, "मैं जो चाहता हूं वो ये है कि हम नज़र रखने में सक्षम हों."

उन्होंने आगे कहा, "अगर कोई समस्या होती है, अगर कोई परमाणु हथियारों और दूसरी चीजों की तरफ देखता है तो उनके ये करने के पहले हमें जानकारी हो."

इराक़ के राष्ट्रपति बरहम सालेह

इराक़ की दो टूक

हालांकि, ट्रंप के बयानों ने इराक़ में हलचल पैदा कर दी है. इराक़ और ईरान के बीच दोस्ती के संबंध हैं.

राष्ट्रपति सालेह ने सोमवार को बगदाद में कहा, "आप इराक़ पर अपने मुद्दों का बोझ मत बढ़ाइये. अमरीका महाशक्ति है लेकिन अपनी नीतिगत प्राथमिकताओं का पूरा करने में मत लगिए. यहां हम रहते हैं."

सालेह ने ये भी याद दिलाया कि साल 2008 में अमरीका और इराक़ के बीच हुए रणनीतिक समझौते के तहत अमरीका इस बात पर सहमत हुआ था कि वो दूसरे देशों पर हमला करने के लिए इराक़ को इस्तेमाल नहीं करेगा.

उन्होंने कहा, "इस समझौते के बाहर जाकर उठाया गया कोई भी कदम मंजूर नहीं होगा."

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2018 में इराक़ स्थित अल असद ठिकाने का दौरा किया था.
इमेज कैप्शन, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2018 में इराक़ स्थित अल असद ठिकाने का दौरा किया था.

बीबीसी के पॉल एड्म्स की राय है कि इससे बगदाद की सरकार के लिए समस्या खड़ी हो गयी है. इसे लेकर अल असद हवाई ठिकाने के अमरीका के इस्तेमाल को लेकर बातचीत भी उलझ सकती है.

एड्म्स कहते हैं कि इस बातचीत का आधार ये है कि अल असद का इस्तेमाल आईएस के ख़िलाफ संघर्ष में किया जाएगा. दिसंबर में ट्रंप जब इस ठिकाने के दौरे पर आए थे तब उन्होंने इसका जिक्र किया था.

लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अब ईरान और इसराइल का जिक्र किया है, जो अलग तरह की प्राथमिकताओं को सामने लाता है. बगदाद में इसे लेकर ही बेचैनी है.

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