आप जो मेकअप लगा रहे हैं, वो कितना सुरक्षित है?

एक युवा लड़की एक दुकान में आईने में देखते हुए मेकअप लगा रही है.
    • Author, नाज़नीन मोटामेडी
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

ईमानदारी से बताइए... आपने आख़िरी बार अपने मेकअप प्रोडक्ट्स की एक्सपायरी डेट कब चेक की थी? क्या एक्सपायर हो चुके मेकअप सामान से आपकी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है या आपकी सेहत को भी ख़तरा हो सकता है?

आप अपने मेकअप ब्रश कितनी बार धोती हैं? क्या आपने कभी किसी दोस्त का मस्कारा उधार लिया है या किसी दुकान पर लिपस्टिक चेक की है? आपके मेकअप बैग में कौन सी चीज़ सबसे ज़्यादा बैक्टीरिया जमा करती है- मस्कारा, आईलाइनर, स्पॉन्ज या ब्रश?

मैं मानती हूं कि मैं अपने मेकअप के ब्रश को साफ़ करने या एक्सपायरी डेट देखने के मामले में बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करती हूं. इसलिए मैंने इन्हें लंदन की मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी में एक शोधकर्ता के माइक्रोस्कोप से देखने का फ़ैसला किया.

स्कूल ऑफ़ ह्यूमन साइंसेज़ में बायोसाइंसेस की सीनियर लेक्चरर डॉ. मारिया पिलर बोतेई-सैलो की देख-रेख में यह स्टडी हुई. उन्होंने 70 से ज़्यादा एक्सपायर हो चुके आईलाइनर, मस्कारा, लिप ग्लॉस, लिपस्टिक और फ़ाउंडेशन के साथ-साथ मेकअप ब्रश और स्पॉन्ज (मेरे अपने सहित) की लैब में जांच की.

नमूने निकाले गए और उन्हें एगर प्लेटों पर रखा गया. फिर उन्हें इनक्यूबेट किया गया ताकि पता चल सके कि उनमें क्या छिपा है.

लाल रेखा

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डॉ. बोतेई सैलो (बाएं) की तस्वीर
इमेज कैप्शन, स्कूल ऑफ़ ह्यूमन साइंसेज़ में बायोसाइंसेस की सीनियर लेक्चरर डॉ. मारिया पिलर बोतेई-सैलो (बाएं)

मेरे मेकअप के सामान की क्या स्थिति थी?

मेरे मेकअप से एगर प्लेटों पर आश्चर्यजनक रूप से काफ़ी मात्रा में बैक्टीरिया थे.

डॉ. बोतेई सैलो ने कहा, "आपकी आई पेंसिल सबसे ज़्यादा गंदी थी, जिसमें आपके दूसरे मेकअप के सामान की तुलना में काफ़ी अधिक बैक्टीरिया दिखाई दिए."

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उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि पेंसिल ने त्वचा से बैक्टीरिया को उठाया था, जिसमें स्टैफ़िलोकोकस (एक प्रकार का बैक्टीरिया) भी शामिल है. इसके पीछे की वजह पेंसिल का आंख की पलक के संपर्क में आना है.

मैंने स्वीकार किया कि मैं आमतौर पर अपना मेकअप का सामान बाथरूम में रखती हूं और अक्सर इस्तेमाल के बाद कुछ मिनटों के लिए अपने आईलाइनर को बिना ढक्कन लगाए छोड़ देती हूं.

डॉ. बोतेई सैलो ने कहा, "तो हां, यही कारण हो सकता है. अगर यह हवा से नमी प्राप्त करता है, तो इससे माइक्रोबियल (सूक्ष्मजीव) बढ़ सकते हैं. हमने अध्ययन के अन्य नमूनों में जैसे- ब्रश, स्पंज और मस्कारा में भी स्टैफ़िलोकोकस पाया."

स्टैफ़िलोकोकस कई बीमारियों के लिए जिम्मेदार हो सकता है- जैसे हल्की जलन से लेकर कंजंक्टिवाइटिस, एरिसिपेलस (त्वचा संबंधी संक्रमण) और इम्पेटिगो (त्वचा संक्रमण) जैसे गंभीर इंफ़ेक्शन तक.

तो फिर मुझे इनमें से कुछ भी क्यों नहीं हुआ, जबकि मैंने कई बार आईलाइनर का इस्तेमाल किया है?

डॉ. बोतेई सैलो ने समझाया, "अगर आपकी त्वचा सही-सलामत है, तो यह काफ़ी अच्छी है और कुछ भी नहीं हो सकता है. हालांकि, अगर आपको कोई कट है या चोट से संबंधित घाव है तो बैक्टीरिया यहीं से घुसकर नुक़सान पहुंचा सकते हैं. अगर किसी की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कमजोर है, तो यह भी चिंता का विषय हो सकता है."

एगर प्लेट पर मेकअप प्रोडक्ट के सैंपल की तस्वीर.
इमेज कैप्शन, एगर प्लेट पर मेकअप प्रोडक्ट का सैंपल

मेकअप लगाने से पहले हाथ धोते हैं?

क्या आप मेकअप लगाने से पहले अपने हाथ धोती हैं? हाथों में कई तरह के हानिकारक तत्व हो सकते हैं और उचित सफ़ाई के बिना, इन कीटाणुओं के सौंदर्य उत्पादों में चले जाने का जोख़िम रहता है. ऐसा ख़ास तौर पर तब होता है जब हम सीधे अपने हाथों से आईशैडो, लिप बाम और फ़ाउंडेशन लगाते हैं.

डॉ. बोतेई सैलो ने चौंकाने वाले नतीजे निकाले. उन्होंने बताया, "कुछ उत्पादों में हमें एंटरोबैक्टर क्लोके मिला, जो आमतौर पर आंतों में पाया जाने वाला एक जीवाणु (बैक्टीरिया) है."

इसका मतलब है कि हाथ सही से नहीं धोने या टॉयलेट के छींटे पड़ने की वजह से इसमें मल के अंश पाए गए हैं.

रिसर्च से पता चलता है कि टॉयलेट को फ़्लश करने से एरोसोलाइज़्ड बूंदें निकल सकती हैं जो कुछ सेकंड में दो मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाती हैं. एरोसोलाइज़्ड बूंदों में अक़्सर संक्रामक वायरस होते हैं. इन बूंदों के ज़रिए एंटरोबैक्टर (एक प्रकार का बैक्टीरिया) के संपर्क में आने की आंशका होती है. इसलिए, अगर आपके मेकअप प्रोडक्ट इस दो मीटर की रेंज में हैं, तो वो बैक्टीरिया के संपर्क में आ सकते हैं.

कॉस्मेटिक उत्पादों में पाए जाने वाले कैंडिडा कवक की कंप्यूटर के ज़रिए बनाई गई तस्वीर.
इमेज कैप्शन, कॉस्मेटिक उत्पादों में पाए जाने वाले कैंडिडा कवक की कंप्यूटर के ज़रिए बनाई गई तस्वीर.

एंटरोबैक्टर की कुछ प्रजातियां चिंताजनक हैं क्योंकि वे पेशाब संबंधी संक्रमण, सांस संबंधी संक्रमण, ऑस्टियोमाइलाइटिस (हड्डी का संक्रमण) और एंडोकार्डिटिस (हृदय से जुड़ा संक्रमण) का कारण बन सकती हैं.

पिछले अध्ययनों में पाया गया है कि ई. कोलाई (ऐशेरिशिया कोलाई- मल के कारण पनपने वाला एक तरह का बैक्टीरिया) मेकअप उत्पादों पर जीवित रह सकता है. यह चिंताज़नक है, क्योंकि इन उत्पादों का उपयोग चेहरे पर और आंखों के पास किया जाता है.

मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी की शोध टीम ने कॉस्मेटिक उत्पादों में कैंडिडा नामक एक कवक (फंगस) भी पाया. यदि कवक त्वचा में प्रवेश करता है, तो यह योनि कैंडिडिआसिस (योनि में होने वाला संक्रमण) या थ्रश (मुंह में होने वाला फंगल संक्रमण) का कारण बन सकता है.

ब्रिटेन के बर्मिंघम में एस्टन यूनिवर्सिटी में लगभग 500 कॉस्मेटिक उत्पादों पर आगे भी शोध किया गया है. इस अध्ययन से पता चला है कि उपयोग किए जाने वाले 79-90% कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में किसी न किसी प्रकार के परजीवी, बैक्टीरिया या कवक होते हैं. इनमें कम जोख़िम वाले बैक्टीरिया से लेकर संभावित रूप से घातक ई. कोलाई तक शामिल हैं.

अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता डॉ. अमरीन बशीर ने कहा, "हालांकि इस्तेमाल किए गए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट और उपकरणों (ब्रश आदि) पर बैक्टीरिया होने का संकेत देते हैं, लेकिन वे जरूरी नहीं कि संक्रमण का कोई बड़ा जोख़िम पैदा करें. संक्रमण के लिए भी एक रास्ते की आवश्यकता होती है, जैसे कि कट (घाव वगैरह), श्लेष्म झिल्ली या खाने के ज़रिए. साफ़-सफ़ाई, जिसमें चीजों को धोना और कीटाणुरहित करना और एक्सपायरी डेट बीत जाने के बाद चीजों का इस्तेमाल न करना, किसी भी संभावित जोख़िम को और कम कर सकता है."

एक्सपायरी डेट का ध्यान रखना क्यों ज़रूरी?

एक्सपायरी डेट ज़रूरी है क्योंकि वह बताती है कि उत्पाद में मौजूद संरक्षक तत्व कितने समय तक प्रभावी रूप से सूक्ष्मजीवों को पनपने से रोक सकते हैं. जिन प्रोडक्ट में पानी की मात्रा ज़्यादा होती है, उनके जल्दी ख़राब होने की आशंका रहती है. क्योंकि ऐसे प्रोडक्ट बैक्टीरिया और कवक (फंगस) को बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण देते हैं.

उत्पाद के खुलने के बाद आइटम के आधार पर एक्सपायरी डेट 3 से 12 महीने तक होती है.

डॉ बशीर का कहना है, "यदि किसी कॉस्मेटिक उत्पाद पर कोई एक्सपायरी डेट नहीं है, तो इसे तीन महीने के बाद या जैसे ही उन्हें पता चले कि यह संभवतः ख़राब हो सकता है तो इसे फेंक देना उचित है, ताकि संक्रमण फैलने के जोख़िम को कम किया जा सके."

"यदि उपभोक्ता मेकअप प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट को लेकर अनिश्चित है तो उसकी जगह नया प्रोडक्ट इस्तेमाल करना ही बेहतर विकल्प है."

कॉस्मेटिक उत्पादों का लंदन मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में परीक्षण किया जा रहा है.
इमेज कैप्शन, कॉस्मेटिक उत्पादों का लंदन मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में परीक्षण किया जा रहा है

कैसे करें बचाव?

लंदन मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी की रिसर्च के अनुसार, हानिकारक बनने वाले और सूक्ष्मजीवों की विविधता वाले प्रोडक्ट मस्कारा और लिक्विड फाउंडेशन हैं, जबकि सबसे ज़्यादा हानिकारक बैक्टीरिया लिक्विड फाउंडेशन लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ब्रश और स्पॉन्ज में होता है.

डॉ. बोतेई सैलो ने कहा, "जिन उत्पादों में पानी की मात्रा ज़्यादा होती है, जैसे स्पॉन्ज और ब्रश, उनमें सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना ज़्यादा होती है. हमारा शोध एक्सपायर हो चुके मेकअप उत्पादों और इस्तेमाल किए गए उपकरणों पर ही आधारित था."

डॉ. बोतेई सैलो ने संभावित ख़तरे से बचने के लिए ये सुझाव दिए हैं:

  • मेकअप लगाने से पहले अपने हाथ धोएं.
  • दुकानों में मेकअप टेस्टर का इस्तेमाल न करें. आपको नहीं पता कि इन उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले लोगों ने पहले अपने हाथ धोए हैं या नहीं.
  • स्पंज और ब्रश जैसी चीज़ों को नियमित रूप से गर्म पानी और साबुन से साफ करें और उन्हें अच्छी तरह से सुखाना सुनिश्चित करें. महंगे तरीक़ों की कोई ज़रूरत नहीं है. बैक्टीरिया और एरोसोल के संपर्क में आने से बचाने के लिए उन्हें एक अलग छोटे बैग में रखने से पहले हवा में पूरी तरह से सूखने दें.
  • मेकअप को स्टोर करने के लिए सबसे ख़राब जगह बाथरूम है क्योंकि यह नम होती और यहां अंधेरा होता है.
  • लिक्विड फ़ाउंडेशन, मस्कारा और आईलाइनर को ढक्कन लगाकर रखना चाहिए. ऐसा हवा में मौजूद कीटाणुओं और धूल के कणों को चीज़ों पर जमने से रोकने के लिए किया जाता है.
  • एक्सपायरी डेट पर ध्यान दें. हर मेकअप उत्पाद पर एक नोट चिपका दें ताकि आपको याद रहे कि आपको इसे कब फेंकना है.
  • अपना मेकअप का सामान दूसरों के साथ शेयर न करें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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