ईरान की अमेरिका के साथ बातचीत फ़ेल हो गई तो वो क्या करेगा?

डोनाल्ड ट्रंप और आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई
    • Author, पार्नियान सादेगी
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

अमेरिका के साथ तनाव के मद्देनज़र अब तक ईरान का नेतृत्व अपने प्रयासों को गहन कूटनीति पर केंद्रित किए हुए है.

वह क्षेत्रीय ताक़तों को सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है ताकि वे ट्रंप पर हमले के ख़िलाफ़ दबाव बना सकें.

ईरान यह ज़ोर देकर कह रहा है कि अमेरिका का ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में युद्ध भड़का सकता है. सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि वो अपने हवाई क्षेत्र और ज़मीन का इस्तेमाल ईरान पर किसी भी संभावित हमले के लिए नहीं करने देंगे, जिससे अमेरिका के विकल्प सीमित हो गए हैं.

ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिकी और इसरायली सैन्य ठिकानों और संसाधनों को भी टारगेट कर सकता है.

यानी मध्य पूर्व में इराक, बहरीन, क़तर, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन और सीरिया में संभावित हमले हो सकते हैं.

अमेरिका के साथ पहले के संघर्षों में ईरान की प्रतिक्रिया सांकेतिक और संतुलित थी.

2025 के ईरान-इसराइल युद्ध के दौरान अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने क़तर के अल उदैद एयर बेस पर होने वाले हमले की पहले से ही चेतावनी दी थी.

इससे पहले जनवरी 2020 में क़ुद्स फ़ोर्स कमांडर क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद इराक़ के ऐन अल-असद एयरबेस पर हमले से पहले भी ईरान ने अमेरिका को आगाह किया था.

14 जनवरी 2026 को तेहरान में प्रदर्शनों के दौरान मारे गए सुरक्षा बलों के कर्मियों के अंतिम संस्कार के दौरान ईरानी महिलाएं ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की तस्वीरें थामे हुए. राज्य टीवी के मुताबिक़, 14 जनवरी 2026 को तेहरान में सुरक्षा बलों और अन्य 'शहीदों' के 100 से ज़्यादा सदस्यों के लिए अंतिम संस्कार समारोह शुरू हुआ, जो इस्लामी गणराज्य को हिला देने वाले विरोध प्रदर्शनों की लहर में मारे गए थे.
इमेज कैप्शन, 14 जनवरी 2026 को तेहरान में प्रदर्शनों के दौरान मारे गए सुरक्षा बलों के कर्मियों के अंतिम संस्कार के दौरान ईरानी महिलाएं ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की तस्वीरें थामे हुए.

हालांकि मौजूदा हालात में ईरान किसी भी अमेरिकी हमले को अपने अस्तित्व के लिए ख़तरा मान सकता है.

ईरान में हालिया अशांति के दौरान ट्रंप ने कहा था कि अब "ईरान में नया नेतृत्व" तलाशने का समय आ गया है और ख़बरों के मुताबिक उन्होंने ऐसे सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया है जिनसे नए विरोध प्रदर्शन भड़कें और इस्लामिक रिपब्लिक को गिराया जा सके.

जैसे-जैसे तनाव बढ़ा है, ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी पैमाने का हमला युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा.

इसे ईरान की ओर से अमेरिका को ईरान के कमांड और कंट्रोल ढांचे पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' से रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

निर्वासित विपक्षी नेता रज़ा पहलवी ने ऐसे हमले की मांग की है, जो मौजूदा हालात में व्यवस्था को और कमज़ोर कर सकता है और ईरान में फिर से विरोध प्रदर्शन भड़का सकता है.

1. बैलिस्टिक मिसाइलें दागना

27 सितंबर 2025 को तेहरान के बहारिस्तान स्क्वायर में ईरान के 'सेक्रेड डिफ़ेंस वीक' के तहत और ईरान-इराक युद्ध की 45वीं बरसी के मौके पर बैलिस्टिक मिसाइलें, वायु रक्षा प्रणालियाँ और मानवरहित हवाई वाहन (ड्रोन) प्रदर्शित किए गए. यह युद्ध 1980 में शुरू हुआ था और आठ साल तक चला था.
इमेज कैप्शन, 27 सितंबर 2025 को तेहरान के बहारिस्तान स्क्वायर में ईरान के 'सेक्रेड डिफ़ेंस वीक' के तहत और ईरान-इराक युद्ध की 45वीं बरसी के मौके पर बैलिस्टिक मिसाइलें, वायु रक्षा प्रणालियाँ और मानवरहित हवाई वाहन (ड्रोन) प्रदर्शित किए गए.

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 28 जनवरी को कहा था कि मध्य पूर्व में आठ या नौ ठिकानों पर 30 से 40 हज़ार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और ये सभी 'हज़ारों ईरानी यूएवी (ड्रोन) और ईरानी कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक सीमा में हैं.'

अनुमान है कि ईरान के पास लगभग 2,000 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें छोटी और मध्यम दूरी की प्रणालियां शामिल हैं जो क्षेत्रीय लक्ष्यों पर हमला कर सकती हैं.

इसराइल के साथ युद्ध के दौरान ईरान ने कई बार बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से कुछ इसराइल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली को भेदने में सफल रहीं.

अमेरिका के पास क्षेत्र में एंटी-मिसाइल सिस्टम हैं, लेकिन उन्हें इसरायल की तुलना में कहीं बड़े क्षेत्र की रक्षा करनी होगी.

ईरान का दावा है कि युद्ध के बाद उसकी मिसाइल क्षमताएं फिर से तैयार की गई हैं और उन्हें मज़बूत किया गया है.

यह भी रिपोर्ट किया गया है कि रूस और चीन पिछले साल जून से ईरान की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं.

2. काउंटर अटैक की नीति

26 जनवरी 2026 को लेबनान के बेरूत में हुए एक प्रदर्शन में लोग हिज़्बुल्लाह के महासचिव नईम क़ासिम का भाषण सुनते हुए. दाहिये इलाक़े में लोग हिज़्बुल्लाह और ईरान के झंडे और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के पोस्टर लेकर इकट्ठा हुए ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले के ख़िलाफ़ विरोध किया जा सके.
यह समूह ईरान के नेता अली ख़ामेनेई और ईरानी जनता के साथ एकजुटता जताने के लिए जुटा था.
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ईरान की पुरानी सैन्य तकनीक अमेरिकी तकनीक का मुक़ाबला नहीं कर सकती, इसलिए वो अपनी परंपरागत रणनीति को बदल सकता है.

वो तेज़ हमलावर नौकाओं या ड्रोन को एक साथ भेजकर दुश्मन के सेंसर और वायु रक्षा प्रणालियों को मात देने की कोशिश कर सकता है.

ईरान फारस की खाड़ी में अपनी स्पीडबोट्स और शाहेद-136 ड्रोन के ज़रिये ऐसी रणनीति अपना सकता है, जिनका रूस यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर चुका है.

बढ़ते तनाव के बीच ईरान के कुछ मीडिया संस्थानों, खासकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े आउटलेट्स ने इस रणनीति पर ज़ोर दिया है.

वहीं 29 जनवरी को ईरानी सेना ने घोषणा की कि उसे 1,000 'रणनीतिक ड्रोन' मिले हैं.

3. क्षेत्रीय सहयोगी गुटों को सक्रिय करना

4 फ़रवरी 2026 को लेबनान के बेरूत में संयुक्त राष्ट्र के पश्चिमी एशिया के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCWA) के मुख्यालय के बाहर हुए एक प्रदर्शन में हिज़्बुल्लाह और अन्य लेबनानी राजनीतिक दलों के समर्थक जुटे. उन्होंने लेबनान में हालिया इज़राइली सैन्य कार्रवाइयों की निंदा की और दक्षिणी सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की.
इमेज कैप्शन, ईरान दशकों से अपने सहयोगी मिलिशिया नेटवर्क को धन और हथियार देता रहा है जिसमें हिज़्बुल्लाह भी शामिल है
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ईरान दशकों से अपने सहयोगी मिलिशिया नेटवर्क को धन और हथियार देता रहा है, जिसे 'एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस' कहा जाता है.

इसमें इराक़ के गुट, लेबनान का हिज़्बुल्लाह और यमन के हूती शामिल हैं.

पिछले दो सालों में इसराइल ने ईरान के इन सहयोगियों को काफ़ी नुकसान पहुंचाया है, जिससे ईरान की सीमा से बाहर ताक़त दिखाने की क्षमता कम हुई है. फिर भी, अगर ये गुट मिलकर अमेरिकी ठिकानों पर हमले करें तो वे गंभीर ख़तरा बन सकते हैं.

2025 के ईरान-इसराइल युद्ध में ये गुट सीधे शामिल नहीं हुए थे, लेकिन अगर ईरान के लिए अमेरिका से युद्ध उसके अस्तित्व का सवाल बना तो ईरान और उसके सहयोगियों की प्रतिक्रियाएं बदल सकती हैं.

अब तक ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फ़ोर्स (PMF) से जुड़े कुछ इराक़ी गुटों ने ईरान की रक्षा करने की बात कही है.

काताइब हिज़्बुल्लाह ने 'एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस' से ईरान के समर्थन के लिए तैयार रहने को कहा है.

इसी तरह अल-नुजाबा मूवमेंट और बद्र संगठन ने भी ईरान का समर्थन करने का एलान किया है.

हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख़ नईम क़ासिम ने ईरान के समर्थन की बात कही है और हमले के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है, लेकिन कहा है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो समूह तय करेगा कि कब और कैसे हस्तक्षेप करना है.

हालांकि इराक़ और लेबनान दोनों जगह इन गुटों पर हथियार छोड़ने का दबाव है, और अगर वे संघर्ष में उतरते हैं तो यह दबाव और बढ़ सकता है.

अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो हूती लाल सागर में अमेरिकी जहाज़ों पर फिर से हमले शुरू कर सकते हैं.

26 जनवरी को हूतियों ने आग में घिरे एक जहाज़ की तस्वीरों वाला वीडियो जारी किया था, जिसके साथ सिर्फ़ लिखा था, 'जल्द'.

हालांकि हूती मई 2025 में अमेरिका से हुए संघर्षविराम पर बरक़रार रहना चाहें तो तो वे ईरान का साथ न देने का फ़ैसला भी कर सकते हैं.

4. होरमुज़ जलडमरूमध्य बंद करना

ईरान का व्यापार

यह ईरान की पुरानी धमकी है जिसे पश्चिमी देशों के साथ हर बड़े तनाव के दौरान दोहराया जाता रहा है.

खाड़ी का यह संकरा रास्ता दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल यातायात के लिए ज़िम्मेदार है.

इसे बंद करने के लिए नौसैनिक बारूदी सुरंगें, क्रूज़ मिसाइलें, तटीय रक्षा और स्पीडबोट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि यह ईरान के लिए आख़िरी विकल्प होगा, क्योंकि इससे उसके सबसे बड़े तेल ग्राहक और सहयोगी चीन के साथ व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा और खाड़ी देशों को भी नुकसान पहुंचेगा, जिन्होंने अब तक ईरान का समर्थन किया है.

शायद इसी वजह से हालिया अमेरिका-ईरान तनाव में ईरान की बयानबाज़ी में यह विकल्प प्रमुख नहीं रहा है और केवल एक सांसद ने ही इसकी मांग की है.

निष्कर्ष

हालांकि ईरान और अमेरिका दोनों ही कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात करते हैं, लेकिन उनके रुख़ में बड़ी खाई होने के कारण समझौता आसान नहीं होगा.

अगर ट्रंप प्रशासन बल प्रयोग करता है तो ईरान की घोषित रेड लाइन तेज़ी से बदल सकती है और वो इस्लामिक रिपब्लिक को बचाने के लिए अमेरिका को कुछ रियायतें दे सकता है.

दूसरी ओर, ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका को इतना नुकसान पहुंचा सकता है कि उसे फिर से बातचीत की मेज़ पर लौटना पड़ सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.