सूडान तख़्तापलटः सैन्य प्रमुख ने किया 'व्यवस्था में बदलाव' का वादा

लेफ़्टिनेंट जनरल अब्दुल फ़तह अब्दुर्रहमान बुरहान
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सूडान मिलिट्री काउंसिल के प्रमुख ने तख़्तापलट के दो दिन बाद 'व्यवस्था परिवर्तन' की शपथ ली है.

लेफ़्टिनेंट जनरल अब्दुल फ़तह अब्दुर्रहमान बुरहान ने टेलीविजन पर अपने संबोधन के दौरान 'सरकारी संस्थाओं के पुनर्गठन' की घोषणा की. साथ ही उन्होंने रातोंरात लगाए गए कर्फ़्यू को समाप्त करने और राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की घोषणा भी की.

उन्होंने सभी प्रांतीय सरकारों को भंग कर दिया और मानवाधिकार के सम्मान का वचन दिया.

इस दौरान उन्होंने साफ़ किया कि बदलाव के इस दौर में लोकतंत्र के शासन को लाने के लिए आम चुनाव करवाने तक सेना शांति, व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखेगी.

उन्होंने कहा कि इसमें अधिकतम 2 साल का वक्त लगेगा.

उन्होंने सामान्य जीवन बहाल करने में मदद करने के लिए विपक्ष का आह्वान किया. इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई छेड़ने का भी प्रण लिया.

बुरहान ने ऐसे वक़्त में यह घोषणा की है जब तख़्तापलट और उमर अल बशीर के राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा देने के बाद भी लोगों ने प्रदर्शन करना बंद नहीं किया.

अवाद इब्न औफ़
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तख़्तापलट के बाद सेना प्रमुख ने दिया इस्तीफ़ा

अफ़्रीकी देश सूडान में तेज़ी से सियासी हालात बदल रहे हैं. बुधवार को ही यहां तख़्तापलट हुआ था. फिर रक्षामंत्री (सेना प्रमुख) अवाद इब्न औफ़ ने अपना पद छोड़ दिया.

अवाद 'सूडान मिलिट्री काउंसिल' के प्रमुख थे और उनकी अगुवाई में ही तख़्तापलट हुआ था.

अवाद ने लेफ़्टिनेंट जनरल अब्दुल फ़तह अब्दुर्रहमान बुरहान को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया था.

सूडान के लोगों को यह तख़्तापलट मंज़ूर नहीं है क्योंकि उनका कहना है कि इसकी अगुवाई करने वाले नेता बशीर के क़रीबी हैं.

सूडान प्रदर्शन

तख़्तापलट के बाद सेना ने देश में आपातकाल घोषित करने के साथ ही रातोंरात कर्फ़्यू भी लगा दिया था लेकिन कर्फ़्यू के बावजूद लोग सूडान की राजधानी ख़ार्तूम में सेना के मुख्यालय पर प्रदर्शन करते रहे.

तख़्तापलट के बाद अवाद ने कहा था कि सेना दो साल बाद चुनाव कराने पर विचार कर रही है. चुनाव से पहले तक सूडान की कमान सेना के हाथ में रहेगी और सूडान की आम जनता ऐसा नहीं चाहती.

लोगों का कहना है कि वो देश में नागरिक शासन चाहते हैं, न कि सैन्य शासन. वहीं सेना ने साफ़ कह दिया है कि वो किसी भी तरह की 'अराजकता' बर्दाश्त नहीं करेगी.

उमर अल बशीर
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शुक्रवार को मिलिट्री काउंसिल के एक प्रवक्ता ने कहा कि सेना सूडान की सत्ता नहीं चाहती और देश का भविष्य प्रदर्शनकारी ही तय करेंगे.

हालांकि, प्रवक्ता ने यह भी कहा कि सेना क़ानून-व्यवस्था भंग नहीं होने देगी और न ही किसी तरह की अशांति को बर्दाश्त करेगी.

प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति उमर अल बशीर और रक्षामंत्री अवाद इब्न औफ़ के इस्तीफ़े को अपनी जीत मान रहे हैं.

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