बंदर-बंदरिया की शादी, इंसान बने बाराती

बंदर-बंदरिया की शादी
    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

बिहार का बेतिया शहर एक अनूठी घटना का गवाह बना है. शहर के उदेश महतो ने अपने पालतू बंदर रामू और बंदरिया रामदुलारी की समारोहपूर्वक शादी कराई.

शादी इस मायने में भी ख़ास रही कि शादी दिन में हुई और बारात रात में निकली.

बेतिया के तीन लालटेन चौक में रहने वाले उदेश महतो कुली हैं. उन्हें रामू क़रीब सात साल पहले नेपाल में मिला था.

लगभग एक साल पहले वह एक बंदरिया ख़रीद लाए.

उदेश कहते हैं, "शुरुआत में दोनों काटा-काटी करते थे, लेकिन जब दोनों में दोस्ती हो गई तो मैंने उनकी शादी कराने का फैसला किया."

शादी का कार्ड

इसके बाद उन्होंने पहले दिन तय करवाया. शादी के कार्ड छपवाए, बैंड-बाजा से लेकर विवाह-भोज तक की तैयारी की.

बंदर की शादी का कार्ड

पंडित सुनील शास्त्री के लिए जानवरों की शादी कराने का यह पहला अनुभव था.

उन्होंने बताया, "जब उदेश इस शादी के लिए आए तो बहुत अटपटा लगा. लेकिन फिर मैंने उनकी भावनाओं को देखते हुए बंदर-बंदरिया के नाम के अनुसार लगन-पतरी देखकर शुभ लगन का दिन-समय निकाला."

शुभ लगन

शादी का लगन सोमवार सुबह ग्यारह बजे का था. नियत समय पर गुलाबी रंग का फ्रॉक पहने रामदुलारी और गहरे पीले रंग के टी-शर्ट पहने रामू की शादी हुई.

बंदर-बंदरिया की शादी
इमेज कैप्शन, बंदरिया (रामदुलारी) को भी शादी का जोड़ा (फ्रॉक) पहनाया गया था

बंदरिया के कन्यादान और बंदर के पिता का फर्ज़, दोनों भूमिकाएं उदेश महतो ने ही निभाई.

जबकि, पहले यह तय था कि कन्यादान उनकी पत्नी मीना देवी करेंगी. लेकिन बकौल उदेश कुछ दिनों पहले रामदुलारी ने मीना को काट खाया तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

सजी कार में ‘दूल्हा-दुल्हन’

शुभ लगन का सारा समय शादी संपन्न कराने में ही निकल गया. और तैयारियों के बावजूद बारात नहीं निकल सकी. ऐसे में उदेश और उनके साथियों ने देर शाम बारात निकालना तय किया.

बंदर-बंदरिया की शादी

शाम को फूलों से सजी मारुति जिप्सी की छत पर नई-नवेली जोड़ी को बिठाकर बारात निकली. बड़े अधिकारियों सहित शहर के 200 से अधिक लोगों को निमंत्रण दिया गया था. अधिकारी तो नहीं आए, लेकिन बारातियों की कमी नहीं रही.

स्थानीय मीडिया के ज़रिए शादी की ख़बर लोगों को पहले से थी. ऐसे में इस बारात को देखने सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में आम लोग भी इकट्ठा हुए.

कुछ अपने बच्चों को भी यह अनूठी बारात दिखाने साथ लाए थे.

कौतुहल

बंदर बंदरिया की शादी

स्थानीय पत्रकार आशीष भट्ट के बताया कि बारात के दौरान माहौल कौतुहल भरा था.

लोग इस अनूठी बारात की तस्वीरें खींच रहे थे और कुछ इन्हें फ़ेसबुक पर साझा भी कर रहे थे.

बारात लौटकर आने के बाद भोज आयोजित हुआ.

बैंड बाजे के साथ बंदर-बंदरिया की शादी

उदेश के चार बेटे हैं, लेकिन वे बंदर रामू को ही अपना सबसे बड़ा बेटा मानते हैं.

रामू की शादी ही वे सबसे पहले करना चाहते थे. और अब यह अनूठी शादी कराने के बाद वह अपने बड़े बेटे की शादी अगले साल की शुरुआत में करेंगे.

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