बंदर की मौत पर मुंडन और ब्रह्मभोज

बंदर की मौत पर शोक
इमेज कैप्शन, बंदर की मौत के शोक में ग्रामीणों ने अपना मुंडन कराया.
    • Author, शुरैह नियाज़ी
    • पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

इक्कीसवीं सदी में शायद ये ख़बर पढ़कर कुछ लोगों को अचरज होगा कि एक बंदर की मौत पर इंसानों की तरह उसका अंतिम संस्कार किया गया.

यह घटना मध्यप्रदेश के इंदौर शहर से 20 किलोमीटर दूर सांवेर के पास स्थित डकाचिया गांव की है.

यहां अपशगुन के डर से न सिर्फ बंदर का अंतिम संस्कार धार्मिक रीति रिवाज से किया गया, बल्कि मृत्यु भोज का भी आयोजन किया.

गांव के लगभग 200 लड़कों ने मुंडन कराया और अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर विसर्जित किया गया.

डकाचिया के रहने वाले मिथुन पटेल ने बताया, ''गांव में हनुमान मंदिर के पास पेड़ पर एक बंदर का जोड़ा रहता था. पिछले दो सितम्बर को कुत्तों ने इन्हें दौड़ा लिया. इनमें से एक की पास के तालाब में गिरकर मौत हो गई थी.''

अर्थी भी निकाली

बंदर की मौत का शोक

पटेल ने कहा,”बड़ों ने फैसला किया कि बंदर भगवान हनुमान के अवतार होते हैं और उनका पूरे सम्मान के साथ आम लोगों की तरह अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए.”

इसके बाद बंदर की अर्थी निकाली गई और उसका अंतिम संस्कार क्षिप्रा के तट पर किया गया.

गांव के सरपंच रमेशजी ने बताया, ''मृत्यु भोज में डकाचिया से लगे चार अन्य गांवों के लोगों ने भी हिस्सा लिया. इसके लिए डेढ़ लाख रुपए इकठ्ठे किए गए.''

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