दानिश सिद्दीक़ी, अपनी इन तस्वीरों के लिए याद किए जाएंगे

A member of the Afghan Special Forces keeps a watch as others search a house during a combat mission against Taliban, in Kandahar province, Afghanistan, July 12, 2021
इमेज कैप्शन, दानिश ने यह तस्वीर पिछले सप्ताह ही क्लिक की थी, जब वे कंधार में अफ़ग़ान सैनिकों के एक मिशन पर उनके साथ थे.
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पुलित्ज़र पुरस्कार विजेता भारतीय फ़ोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीक़ी शुक्रवार को अफ़ग़ान सेना और तालिबान के बीच जारी संघर्ष को कवर करते हुए मारे गए.

बताया गया कि अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान से लगी सीमा के पास उनकी मौत हुई.

एक अफ़ग़ान कमांडर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अफ़ग़ानिस्तान के विशेष सुरक्षाबल की एक टुकड़ी स्पिन बोल्डक शहर के मुख्य बाज़ार को दोबारा अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश कर रही थी, जब तालिबान के साथ मुठभेड़ में दानिश सिद्दीक़ी और कुछ अफ़ग़ान अधिकारी मारे गए.

दानिश सिद्दीक़ी, भारत में अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के चीफ़ फ़ोटोग्राफ़र थे. एजेंसी के मुताबिक़, दानिश पिछले सप्ताह से अफ़ग़ानिस्तान के विशेष दलों के साथ कंधार प्रांत में तैनात थे, जहाँ से वो अफ़ग़ान कमांडो और तालिबान लड़ाकों के बीच संघर्ष की ख़बरें भेज रहे थे.

सिद्दीक़ी 2010 से इस अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी के लिए काम कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ युद्ध के अलावा, रोहिंग्या संकट, हॉन्ग-कॉन्ग के प्रदर्शन और नेपाल के भूकंप को कवर किया.

दानिश सिद्दीक़ी साल 2018 में रोहिंग्या संकट के दौरान बेहतरीन काम करने के लिए पुलित्ज़र पुरस्कार से भी नवाज़े गये. उन्हें फ़ीचर फ़ोटोग्राफ़ी की श्रेणी में यह पुरस्कार मिला था.

सिद्दीक़ी पिछले दिनों लगातार अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीनी हक़ीक़त का ब्यौरा दे रहे थे. उन्होंने बताया था कि 13 जुलाई 2021 को वो कैसे एक हमले में बाल-बाल बचे थे.

इस गैलरी में देखिए, उनके द्वारा खींची गईं कुछ ख़ास तस्वीरें:

A member of Afghan Special Forces fires at Taliban after coming under heavy fire during the rescue mission of a police officer besieged at a check post, in Kandahar province, Afghanistan, July 13, 2021.

ये तस्वीर उनकी कुछ अंतिम तस्वीरों मे से एक है जो उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के कंधार प्रांत में खींची थी, जहाँ अफ़ग़ान स्पेशल फ़ोर्स और तालिबान लड़ाकों के बीच संघर्ष जारी है.

अंतिम समय में सिद्दीक़ी अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के काफ़िले के साथ थे.

Witnessing COVID chaos in India"s hospitals,

दानिश सिद्दीक़ी ने बड़ी मेहनत से भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर को कवर किया.

अप्रैल-मई 2021 में कोरोना की दूसरी लहर से भारत में बहुत तबाही हुई. उस समय लोग ना सिर्फ़ दवाओं और ऑक्सीजन के लिए, बल्कि अपनों के शव के अंतिम संस्कार के लिए भी जगह-जगह भटक रहे थे.

भारत में कोरोना की दूसरी लहर का असर सिर्फ़ शहरों में नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाक़ों में भी देखने को मिला था.

A mass cremation of victims who died from complications related to the coronavirus disease (COVID-19), is seen at a crematorium ground in New Delhi, India, April 22, 2021

सिद्दीक़ी ने उस समय सामूहिक अंतिम संस्कार की ऐसी दिल-दहला देने वाली तस्वीरें खींची, जिन्होंने महामारी की भयावहता को समझने में मदद की.

उन्होंने अपनी एक रिपोर्ट में तस्वीरों के साथ यह दावा किया था कि दिल्ली के अधिकांश शवदाह केंद्रों में लोगों को जगह नहीं मिल रही है. उनकी ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं.

A woman is consoled by her children after her husband died from complications related to the coronavirus disease (COVID-19) outside a mortuary of a COVID-19 hospital in New Delhi, India, April 15, 2021.

इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कोविड-19 की वजह से पिता के गुज़र जाने के बाद दो बच्चे कैसे अपनी माँ को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. यह भावुक कर देने वाली तस्वीर दानिश सिद्दीक़ी ने दिल्ली में खींची थी.

Pramila Devi, 36, who is suffering from the coronavirus disease (COVID-19), is carried by her nephew Rajesh Kumar, as he takes her to a local government dispensary, in Kaljikhal, in the northern state of Uttarakhand, India, May 23, 2021

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान दानिश सिद्दीक़ी ने उत्तराखण्ड के सुदूर इलाक़ों का भी दौरा किया था, ताकि लोगों को यह बताया जा सके कि बड़े शहरों से दूर भी इस महामारी ने लोगों पर कहर बरपाया है. इस तस्वीर में एक शख़्स अपनी मौसी को पास की डिस्पेंसरी में ले जाता दिख रहा है.

Dayaram Kushwaha carries his 5-year-old son, Shivam, as he and members of his extended family make their way back to his home village from New Delhi.

अप्रैल 2020 में, जब भारत में पहले लॉकडाउन की घोषणा हुई, तो बहुत सारे मजदूर भुखमरी के डर से अपने-अपने राज्यों की ओर लौट गये थे. उस समय मजदूरों के पलायन की बहुत सारी तस्वीरें सामने आयी थीं, जिनमें दानिश सिद्दीक़ी की कुछ तस्वीरें लोगों के ज़ेहन में आज भी हैं.

बाप-बेटे की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई थी. सिद्दीक़ी ने इनकी कहानी को कवर किया था. उन्होंने बताया था कि कैसे ये लोग कई दिन तक चलकर अपने गाँव पहुँचे.

An exhausted Rohingya refugee woman touches the shore after crossing the Bangladesh-Myanmar border by boat through the Bay of Bengal, in Shah Porir Dwip, Bangladesh September 11, 2017.

अगस्त 2017 में, म्यांमार की सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के साथ बर्बरता शुरू की थी जिसके बाद हज़ारों रोहिंग्या मुसलमान जान बचाने के लिए समंदर के रास्ते बांग्लादेश की ओर भाग गये थे. बाद में लाखों की संख्या में ये रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के कैंपों में जाकर बसे.

संयुक्त राष्ट्र ने रखाइन में सेना की कार्रवाई को 'नस्लीय नरसंहार' का आदर्श उदाहरण बताया था.

तब रोहिंग्या मुसलमानों के संघर्ष को कवर करने के लिए दानिश सिद्दीक़ी बांग्लादेश गये थे.

सितंबर में सिद्दीक़ी ने यह तस्वीर तब खींची थी, जब बुरी तरह से थक चुकी ये रोहिंग्या महिला, बांग्लादेश की सीमा तक पहुँचने में सफल होने के बाद, समंदर के किनारे को हाथ लगाकर रोने लगती है.

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