बिहार: गैंगरेप सर्वाइवर को मिली ज़मानत, दो सहयोगी अब भी जेल में

प्रतीकात्मक तस्वीर
    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से. बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

बिहार में पिछले कुछ दिनों से चर्चा में रही रेप सर्वाइवर को अररिया कोर्ट ने विशेष सुनवाई करते हुए ज़मानत दे दी है.

हालांकि उनके दो सहयोगियों और जन जागरण शक्ति संगठन की कार्यकर्ता तन्मय निवेदिता और कल्याणी बडोला को ज़मानत नहीं मिली है.

बता दें कि देश भर के वकीलों और 63 संस्थाओं ने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर रेप सर्वाइवर और उसके दो सहयोगियों को रिहा करने की मांग की थी. पत्र में रेप सर्वाइवर के दुष्कर्म मामले में भी न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की मांग की थी.

जिसके बाद पटना उच्च न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए 17 जुलाई को सुनवाई की तारीख़ तय की थी. हालांकि शुक्रवार को भी पटना हाईकोर्ट में जज नहीं बैठे. जिसके बाद अररिया में सीजेएम आनंद कुमार सिंह ने इस मामले में विशेष सुनवाई करते हुए रेप सर्वाइवर को पीआर बांड पर ज़मानत दे दी.

बता दें कोरोना संकट के चलते निचली अदालतों में फ़िलहाल सुनवाई बंद है.

रेप सर्वाइवर और उनके सहयोगियों के वकील देव नारायण सेन ने बीबीसी को बताया, "रेप सर्वाइवर को ज़मानत मिलने से हम लोग ख़ुश हैं, लेकिन कल्याणी और तन्मय को ज़मानत नहीं मिली है. इसकी वजह फ़िलहाल स्पष्ट नहीं है. जजमेंट पढ़ने के बाद ही ये स्पष्ट हो पाएगा."

वहीं जन जागरण शक्ति संगठन के रंजीत पासवान ने बीबीसी को बताया, "ये दोनों ही रेप सर्वाइवर के सहयोगी थे. ऐसे में पीड़िता अलग तरह के ट्रॉमा से अब गुज़रेगी. इस मामले पर हम क़ानूनी सलाह ले रहे है."

11 जुलाई को अररिया में सामूहिक दुष्कर्म की एक रेप सर्वाइवर को न्यायालय की अवमानना के आरोप में जेल भेज दिया गया था.

जिसके बाद इस क़दम की देशभर में आलोचना हुई थी. इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने और बिहार राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है.

क्या है पूरा मामला

छह जुलाई को हुए इस गैंगरेप की रिपोर्ट रेप सर्वाइवर ने अररिया महिला थाना में 7 जुलाई को दर्ज कराई थी.

महिला थाने में कांड संख्या 59/2020, भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (डी) के तहत दर्ज इस एफ़आईआर में ज़िक्र है कि मोटरसाइकिल सिखाने के बहाने उनको एक परिचित लड़के ने बुलाया.

रेप सर्वाइवर को एक सुनसान जगह ले जाया गया. जहाँ मौजूद चार अज्ञात पुरूषों ने उसके साथ बलात्कार किया. एफ़आईआर के मुताबिक़ रेप सर्वाइवर ने अपने परिचित से मदद मांगी, लेकिन वो वहाँ से भाग गया.

घबराई रेप सर्वाइवर, अररिया में काम करने वाले जन जागरण शक्ति संगठन (जेजेएसएस) के सदस्यों की मदद से अपने घर पहुँची. लेकिन जब उन्हें अपने घर में भी असहज लगा तो रेप सर्वाइवर ने अपना घर छोड़कर जन जागरण शक्ति संगठन के सदस्यों के साथ ही रहने लगी.

7 और 8 जुलाई को उनकी मेडिकल जाँच हुई. जिसके बाद 10 जुलाई को बयान दर्ज कराने के लिए रेप सर्वाइवर को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में ले जाया गया.

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न्यायिक दंडाधिकारी के साथ अभद्रता का आरोप

जन जागरण शक्ति संगठन की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, रेप सर्वाइवर और जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता 10 जुलाई को दोपहर 1 बजे कोर्ट पहुँचे. वहाँ इन लोगों ने कॉरीडोर में इंतज़ार किया. उस वक़्त केस का एक अभियुक्त भी वहीं मौजूद था. तकरीबन 4 घंटे के इंतज़ार के बाद रेप सर्वाइवर का बयान हुआ.

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़, "बयान के बाद जब उसे न्यायिक दंडाधिकारी ने बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा, तो वो(रेप सर्वाइवर) उत्तेजित हो गई. उन्होंने उत्तेजना में कहा कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है. आप क्या पढ़ रहे है, मेरी कल्याणी दीदी को बुलाइए."

कल्याणी और तन्मय निवेदिता जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता हैं.

"बाद में, केस की जाँच अधिकारी को बुलाया गया, तब रेप सर्वावइवर ने बयान पर हस्ताक्षर किए. बाहर आकर रेप सर्वावइवर ने जेजेएसएस के दो सहयोगियों तन्मय निवेदिता और कल्याणी बडोला से तेज़ आवाज़ में पूछा कि 'तब आप लोग कहाँ थे, जब मुझे आपकी ज़रूरत थी."

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बाहर से आ रही तेज़ आवाजों के बीच ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने कल्याणी को अंदर बुलाया. कल्याणी ने रेप सर्वावइवर का बयान पढ़कर सुनाए जाने की मांग की. जिसके बाद वहाँ हालात तल्ख होते चले गए. तकरीबन शाम 5 बजे कल्याणी, तन्मय और रेप सर्वाइवर को हिरासत में लिया गया और 11 जुलाई को जेल भेज दिया गया.

स्थानीय अखबार दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट में लिखा है, " न्यायालय के पेशकार राजीव रंजन सिन्हा ने दुष्कर्म पीड़िता सहित दो अन्य महिलाओं के विरुद्ध महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. दर्ज प्राथमिकी में बताया गया है कि पीड़िता ने बयान देकर फिर उसी पर अपनी आपत्ति जताई."

रिपोर्ट में लिखा है कि, "न्यायालय में बयान की कॉपी भी छीनने का प्रयास किया गया. न्यायालय में इस तरह की अभद्रता से आक्रोशित न्यायिक दंडाधिकारी ने तीनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है."

बीबीसी के पास भी एफ़आईआर की कॉपी मौजूद है.

इस मामले में बीबीसी ने जब पब्लिक प्रोसिक्यूटर (लोक अभियोजक) लक्ष्मी नारायण यादव से बात की तो उन्होंने कहा, " मुझे इस मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं है. लॉकडाउन के चलते हम लोग अभी मजिस्ट्रेट कोर्ट नहीं जा पा रहे है."

वहीं अररिया के एसडीपीओ पुष्कर कुमार ने बीबीसी के सवाल पर सिर्फ़ इतना कहा, "जेल नहीं भेजा गया है."

ये कहकर उन्होंने कहा कि आपकी (रिपोर्टर की) आवाज़ नहीं आ रही है और फ़ोन काट दिया. इसके बाद फ़ोन मिलाने पर उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. वहीं अररिया की पुलिस अधीक्षक धुरात साईली सावलाराम और महिला थाना अध्यक्ष रीता कुमारी से संपर्क करने की तमाम कोशिशें असफल रही.

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350 से अधिक वकीलों ने लिखा ख़त

इस मामले में इंदिरा जयसिंह, प्रशांत भूषण समेत 350 से अधिक नामी वकीलों ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और बाकी जजों को ख़त लिखकर इस मामले में दख़ल देने की मांग की थी.

इस पत्र में लिखा गया है कि न्यायालय की अवमानना मामले में गैगरेप सर्वाइवर को जिन परिस्थितियों में न्यायिक हिरासत में भेजा गया है वो बेहद कठोर हैं.

साथ ही कहा गया है कि भावनात्मक दृष्टि से सर्वाइवर की हालत इस समय बेहद नाज़ुक है और उसे देखभाल करने वालों से दूर रखने पर उसके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने का डर है.

पत्र में लिखा गया है कि सर्वाइवर का गैंगरेप का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है जबकि अवमानना के मामले पर ही सबका ज़ोर है और उसके 'बोल्ड' होने की वजह से उसे बदनाम किया गया है.

महिला संगठनों ने की रिहाई की मांग

इस घटना के सामने आने के बाद बिहार के महिला संगठनों ने रेप सर्वाइवर और जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग की है.

एडवा की राज्य अध्यक्ष रामपरी के मुताबिक, " ये एक अमानवीय फ़ैसला है. वो मानसिक तनाव की स्थिति से गुज़र रही थी. उसको कई बार घटना को बताना पड़ा, उसकी पहचान उजागर की गई. एक अभियुक्त और उसके परिवार के लोगों ने शादी का प्रस्ताव देकर मामले को रफ़ा- दफ़ा करने की कोशिश की, जिसको रेप सर्वाइवर ने ठुकरा दिया. वो 22 साल की है, वयस्क है और अपना केस मज़बूती से लड़ना चाहती है, लेकिन उससे, उसके 'लीगल गार्जियन' के बारे में पूछा जा रहा है. कांउसलिंग की भी कोई सुविधा नहीं है. हम न्यायपालिका में विश्वास रखते हुए, न्याय की मांग और उम्मीद करते है."

भारत में बलात्कार क़ानून

भारत में बलात्कार क़ानूनों की बात करें तो 80 के दशक में बलात्कार क़ानूनों में एक बड़ा बदलाव ये आया कि 'ओनस ऑफ प्रूफ' महिला से पुरूष को चला गया. बाद में साल 2013 में क्रिमिनल लॉ एमेन्डमेंट एक्ट में महिला केंद्रित क़ानून बना.

मानवाधिकार कार्यकर्ता खदीजा फारूखी बताती है, "इसके मुताबिक़ पुरानी सेक्शुएलिटी हिस्ट्री डिस्कस नहीं करने, रेप सर्वाइवर की प्राइवेसी को अहम माना गया तो 164 का बयान दर्ज़ कराते वक़्त अगर रेप सर्वाइवर किसी 'पर्सन ऑफ कॉन्फिडेंस'(विश्वस्त व्यक्ति) को साथ में ले जाना चाहती है, तो इसकी अनुमति दी गई. साथ ही उसे बयान की कॉपी भी मिलने का प्रावधान किया गया. इसमें अगर संभव है तो महिला जज के सामने बयान दर्ज किया जाना चाहिए. लेकिन इन सबके बावजूद रेप सर्वाइवर्स के साथ सामाजिक, पारिवारिक और क़ानूनी स्तर पर अमानवीय व्यवहार होता है."

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रेप सर्वाइवर का ट्रामा

खदीजा जो बात कर रही है उसे 21 साल की दूसरी रेप सर्वाइवर सुलेखा (बदला हुआ नाम) के जीवन से समझा जा सकता है.

बीबीसी से वो कहती हैं, "बिहार में उसी की चलती है जिसके पास पैसा है. दुष्कर्म हो जाता है उसके बाद आप शिकायत करें तो गंदे-गंदे सवाल पूछे जाते है. बार-बार पूछते हैं, क्या हुआ था, क्यों गई थी वहाँ? क्या पहना था? ऐसा लगता है केस करके मैंने ही बहुत बड़ी ग़लती कर दी हो. मेरे साथ तो एक पुलिस वाले ने ही रेप किया था तो मुझे न्याय कैसे मिलेगा."

इस मामले में रिपोर्ट छपने तक प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

बीबीसी जन जागरण शक्ति संगठन के बताए घटनात्मक तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका है.

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