जम्मू-कश्मीर: चरमपंथी हमले में एक शख़्स की मौत, नाती की तस्वीर वायरल, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

कश्मीर पुलिस
    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की गर्मियों की राजधानी श्रीनगर से लगभग 40 किलोमीटर दूर उत्तरी कश्मीर के सोपोर में बुधवार सुबह एक चरमपंथी हमले के दौरान एक शख़्स की गोली लगने से मौत हो गई.

बशीर अहमद नाम के इस शख़्स के साथ उसका तीन साल का नाती भी था जो सुरक्षित बच गया है.

इस चरमपंथी हमले में सीआरपीएफ़ के एक जवान की जान गई है जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं.

चरमपंथियों ने सुबह सोपोर क़स्बे में सीआरपीएफ़ की गश्त के दौरान हमले को अंजाम दिया.

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने एक बच्चे की तस्वीरें ट्वीट की हैं जिनमें पुलिसकर्मी उसे सुरक्षित जगह ले जा रहे हैं.

इस घटना की कुछ दिल दहला देने वाली तस्वीरें भी सामने आई हैं जिनमें बच्चा अपने नाना के ख़ून से लथपथ शव के साथ नज़र आ रहा है.

जिस समय पुलिसकर्मियों ने उसे वहां से हटाया, वह बेहद डरा हुआ था.

सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप

मारे गए बशीर अहमद श्रीनगर के रहने वाले थे. 65 साल के बशीर के परिजनों ने सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

पुलिस वालों की गोद में बच्चा

मृतक की पत्नी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "उन्हें रोककर गाड़ी से उतरने को कहा गया और फिर सीआरपीएफ़ ने गोली मार दी."

परिवार के अन्य सदस्यों ने कहा, "जहां पर शूटआउट हुआ, वहां के लोगों ने हमसे संपर्क किया और घटना की जानकारी दी. अगर वह गाड़ी चला रहे होते तो उन्हें कार में गोली लगती. कार के कुछ मीटर दूर कैसे गोली लगी?"

मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया, "उन्हें मारने के बाद सुरक्षा बलों ने बच्चे को शव के पास बिठाए रखा ताकि तस्वीर खींच सकें."

हालांकि, पुलिस की ओर से किए गए ट्वीट में कहा गया है, "सोपोर में आतंकवादी हमले के दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन साल के बच्चे को गोली लगने से बचाया."

सीआरपीएफ़ ने आरोपों को बताया ग़लत

सीआरपीएफ़ के एडीजी ज़ुल्फ़िकार अली ने बीबीसी से बात करते हुए इन आरोपों को ख़ारिज किया. उन्होंने कहा, "मैं और मेरे आईजी घटनास्थल से लौट रहे थे. हमने जगह देखी है और सब चीज़ों का मुआयना किया है. ये सब झूठ है. फ़जर की नमाज़ के बाद चरमपंथी एक मस्जिद में चले गए थे. जब सीआरपीएफ वहां पहुंची, उन्होंने गोलियां चला दीं."

कश्मीर

ज़ुल्फ़िकार अली ने कहा, "मारे गए नागरिक एक गाड़ी से यात्रा कर रहे थे. अचानक वह फंस गए. जब चरमपंथियों ने गोलियां चलाईं, उनकी कार वहां से गुज़र रही थी. हमें लगता है कि उन्हें चरमपंथियों की गोलियां लगी हैं. न तो उन्हें सीआरपीएफ ने बाहर निकाला, न ही गोली मारी. हो सकता है कि वह डर के मारे कहीं छिपने की कोशिश कर रहे थे और इस बीच चरमपंथियों की गोलियां उन्हें लग गईं. दूर बैठे लोग कहानियां बना रहे हैं कि उन्हें सीआरपीएफ़ ने मारा."

सीआरपीएफ़ के एडीजी ने कहा "जब हम घटनास्थल पर पहुंचे, हमने विचलित करने वाला मंज़र देखा. हमारी प्राथमिकता बच्चे को सुरक्षित निकालने की थी. हमारे लिए यह काम चुनौतीपूर्ण था क्योंकि आतंकवादी हमारे ऊपर गोलियां चला रहे थे."

समाचार एजेंसी एएनआई ने सोपोर के एसएचओ के हवाले से लिखा है, "बच्चा अपने दादा के साथ हंदवाड़ा जा रहा था." जम्मू और कश्मीर अपनी पार्टी (JKAP) ने इस घटना में नागरिक की मौत की तय समय के अंदर जांच की मांग की है.

एक बयान में पार्टी प्रवक्ता ने कहा, "मृतक के परिवार का बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रारंभिक तौर पर बताते हैं कि ख़ान की बेरहमी से हत्या की गई है. सरकार को निष्पक्ष जांच का आदेश देना चाहिए कि किन हालात में एक नागरिक की मौत हुई."

कुछ दिन पहले दक्षिण कश्मीर के बिजबेहारा इलाक़े में सीआरपीएफ़ के नाके पर चरमपंथियों के हमले के दौरान छह साल के एक लड़के की गोलियां लगने से मौत हो गई थी. इस घटना से सभी वर्गों में ग़ुस्से का माहौल था और इसकी कड़ी आलोचना भी हुई थी.

( बीबीसी संवाददाता आमिर पीरज़ादा के इनपुट के साथ)

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