फ़ि‍ल्मों को जाति, धर्म से न जोड़ें: चंद्रप्रकाश द्विवेदी

पहलाज निहलानी
    • Author, श्वेता पांडेय
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

अभी तक सेंसर बोर्ड के सदस्यों के बीच मतभेद की ख़बरें आ रही थीं, लेकिन बोर्ड के सदस्य और फ़ि‍ल्मकार डॉकटर चंद्रप्रकाश द्व‍िवेदी की चिट्ठी ने अब इन खबरों को पुष्ट कर दिया है.

यह चिट्ठी उन्होंने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी को लिखी है.

इसमें उन्होंने बिना बोर्ड की सहमति के फ़ि‍ल्म 'एनएच10' के कई सीन और डायलॉग काटने का आरोप लगाया है.

सेंसर बोर्ड

चंद्रप्रकाश द्विवेदी
इमेज कैप्शन, डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी पिंजर फ़िल्म और चाणक्य सीरियल के लिए जाने जाते हैं.

इस चिट्ठी के बारे में जब बीबीसी ने डॉ. द्विवेदी से बात की तो उन्होंने सबसे पहले 'सेंसर' शब्द पर ही आपत्त‍ि दर्ज़ कराई.

उन्होंने कहा, ''हम भारत के प्रजातंत्र का हिस्सा है, न कि ब्रिटिश शासन के अधीन. इसका नाम है 'सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़ि‍ल्म सर्टिफ़िकेशन'. अब हमारा ज़ोर फ़ि‍ल्मों के सर्टिफि‍केशन के बजाए, क्लासिफ़ि‍केशन पर होना चाहिए, ताकि हम अपने सिनेमा को विश्वस्तर पर स्थापि‍त कर सकें.''

उन्होंने बताया कि बोर्ड गठन के बाद जो बैठक हुई, उस दौरान 'सर्टिफ़िकेशन' और 'सेंसर' के बजाए 'क्लासिफ़िकेशन' की बात की गई.

निर्णय अनुचित

ओमकारा

इसके साथ ही अपशब्द या गालियों का फ़ि‍ल्मों में इस्तेमाल का मुद्दा उठा. डॉ. द्विवेदी कहते हैं कि क्या इन शब्दों को बैन किया जाए, अभी यह सवाल विचार-विमर्श के स्तर पर ही था और सर्कुलर जारी किया गया.

उनका कहना है कि कोई भी आदेश बोर्ड में चर्चा और फिर सरकार की सहमति के बिना जारी नहीं किया जा सकता.

लेकिन शब्दों पर बैन का आदेश जारी हुआ और कई फ़ि‍ल्मों में उस पर अमल भी हुआ. डॉ. द्विवेदी ने इसे अनुचित क़रार दिया.

एनएच 10

एनएच 10

वे कहते हैं, ''इस दौरान कई फ़ि‍ल्में देखी गई, लेकिन 'एनएच 10' के लिए मुझे कई लोगों के मैसेज और फ़ोन आए कि बोर्ड में आख़िर क्या हो रहा है. इसके अलावा जल्द ही बोर्ड की बैठक होने वाली थी, जिसे नहीं होता देख मैं व्यथि‍त हो गया और आख़ि‍रकार बुधवार को मैंने चिट्ठी लिख दी है.''

उनका कहना है, "फ़ि‍ल्म को फ़ि‍ल्म की तरह देखा जाए, न कि जाति, धर्म और समुदाय को केंद्र में रखकर देखा जाए."

क्या बोर्ड के अन्य सदस्यों ने भी पत्र लिखने का मन बनाया है? इसके जबाव में वे कहते हैं, ''हां, कइयों ने लिखा भी है, लेकिन चिट्ठी मेरी ही लीक हुई. हालांकि मैं बाक़ि‍यों की गोपनीयता बरक़रार रखूंगा.''

'नहीं चाहिए साथ'

पहलाज निहलानी

सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी से बात करने पर उन्होंने कहा, ''मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूं. मुझे किसी का साथ नहीं चाहिए. ये वो लोग हैं जिन्हें कुछ पता नहीं है. पहले रूल बुक पढ़े.''

अब देखने वाली बात यह है कि बोर्ड के सदस्यों की मुलाक़ात कब और कितनी जल्दी होती है और निर्णय क्या निकलता है.

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