सोशल मीडिया पर बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट सख़्त
सोशल मीडिया पर बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील एचएस फुलका ने कहा कि ऐसे वीडियो अब सिर्फ इंस्टाग्राम पर सर्कुलेट ही नहीं हो रहे, बल्कि उन्हें प्रमोट भी किया जा रहा है.
फुलका ने कहा कि भारत सरकार ने भी इंस्टाग्राम पर इस तरह की सामग्री को रोकने के लिए सख़्त कार्रवाई की है.
उन्होंने बताया, "सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि मेटा, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की ज़िम्मेदारी है कि वे बच्चों के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार को रोकें और इसकी जानकारी पुलिस को दें."
उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर ऐसे वीडियो डाउनलोड करने और देखने वाले लोगों के ख़िलाफ़ भी पॉक्सो एक्ट के तहत आपराधिक कार्रवाई हो सकती है.
फुलका ने कहा कि जो लोग बच्चों से जुड़े अश्लील फोटो या वीडियो डाउनलोड करके आगे शेयर करते हैं, उनके ख़िलाफ़ भी क़ानून के तहत कार्रवाई हो सकती है और 7 साल तक की सजा का प्रावधान है.