बढ़ते वैश्विक दबाव के बीच बदल रही है चीन की आर्थिक रणनीति

चीन
    • Author, प्रतीक जाखड़
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

पिछले चार दशकों से चीन की अर्थव्यवस्था अपने निर्यात पर निर्भर है. लेकिन अब राष्ट्रपति शी जिनपिंग बदलाव चाहते हैं - अब वो अपने घरेलू बाज़ार को बेहतर बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं ताकि एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाई जा सके.

अपनी नई योजना को उन्होंने 'डुअल सर्कुलेशन' का नाम दिया है. इस शब्द का प्रस्ताव पहली बार मई महीने में रखा गया था. अब ये आधिकारिक बयानों, भाषणों और सरकारी मीडिया की कमेंट्री का हिस्सा बन गया है.

अर्थव्यवस्था के इस नए मॉडल से जुड़ी विस्तृत जानकारियां मौजूद नहीं हैं. इसका उद्देश्य "घरेलू मार्केट में सर्कुलेशन" पर है यानी देश के अंदर ही उत्पादन, वितरण और खपत बढ़ाना और "दुनियाभर में सर्कुलेशन" को जारी रखना यानी कि बाहरी दुनिया से चीन व्यापार करता रहेगा.

चीन अर्थव्यवस्था

चीन में खपत-आधारित विकास की दिशा में अर्थव्यवस्था का पुनर्गठन कम से कम 2008 के बाद से एक प्रमुख नीतिगत लक्ष्य रहा है - तर्क यह है कि निर्यात और निवेश के नेतृत्व वाला मॉडल लंबे समय तक स्थिरता नहीं दे सकता.

इस प्रयास में तेज़ी लाई जा रही है क्योंकि जिस अंतरराष्ट्रीय माहौल ने चीन की तरक़्क़ी में मदद की है, उसमें धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है. चीन को अब एक ऐसी अर्थव्यवस्था की ज़रूरत है जो बाहरी झटकों का सामना कर सके.

अमरीका के साथ चल रहे व्यापार और तकनीकी युद्ध, सप्लाई चेन का चीन के बाहर जाना, बढ़ता संरक्षणवाद और कोविड -19 के कारण वैश्विक माँग में गिरावट ने चीन को इस दिशा में तेज़ी लाने के लिए मजबूर किया है.

चीन अर्थव्यवस्था

लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को फिर से स्थापित करना चीनी अधिकारियों के लिए एक कठिन होगा और सिर्फ एक नया नारा देने भर से ये मुमकिन नहीं हो पाएगा.

आर्थिक बदलाव की ओर क़दम

अपने भाषणों, मीटिंग और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर जिनपिंग इस नए मॉडल के लिए ज़मीन तैयार कर रहे हैं, और चीन की अर्थव्यवस्था पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं.

मई में पोलित ब्यूरो की एक मीटिंग में जिनपिंग फ़ैसला किया कि चीन में "देश के बड़े मार्केट का पूरा इस्तेमाल करना पड़ेगा ताकि एक नए विकास का पैटर्न बन सके"

चीन अर्थव्यवस्था

अगस्त में जिनपिंग ने कहा था कि लोकल देश का "आंतरिक आर्थिक चक्र" ही देश के घरेलू मार्केट का भविष्य है. अगले ही महीने उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि चीन को अपने बल पर आगे बढ़ना होगा.

जिनपिंग चीन के अलग-अलग इलाक़ों का दौरा करने में व्यस्त हैं. वो फ़ैक्ट्रियों में जा रहे हैं, किसानों से मिल रहे हैं और इंडस्ट्रियल पार्क में जा रहे हैं ताकि नए प्लान के लिए समर्थन जुटाया जा सके.

नई विकास योजना के बारे में कहा जाता है कि यह "आर्थिक ज़ार" लियू का विचार है. वो उद्योगों की अधिक क्षमता को कम करने के लिए "आपूर्ति पक्ष में संरचनात्मक सुधार" के पीछे भी थे, जो पिछले पाँच वर्षों से चीनी आर्थिक नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: भारत-चीन रिश्ते में तिब्बत का पेंच

'डुअल साइकिल' की अवधारणा 14वीं पंचवर्षीय योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी. 2021-2025 के लिए आर्थिक और राजनीतिक लक्ष्य को निर्धारित करने के लिए इसे अगले महीने की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा.

टी शिंनज़ुआ विश्वविद्यालय के जियांग शियोजुआं बताते हैं, "इतनी बड़ी अर्थव्यावस्था सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय मार्केट के भरोसे नहीं चल सकती"

"चीन के एक अख़बार को दिए बयान में उन्होंने कहा, "घरेलू बाज़ार पर ध्यान देना सिर्फ़ एक राणनीतिक प्लान नहीं है, ये अभी के समय की ज़रूरत भी है."

अधिकारी और पॉलिसी बनाने वाले इस बात पर ज़ोर देते हैं कि चीन दुनिया को पीठ नहीं दिखा रहा है, वो वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा रहेगा. लेकिन जानकार मानते हैं कि चीन की नीतियों में थोडा सा बदलाव भी विश्व की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है.

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जिनपिंग ने 24 अगस्त को एक मीटिंग में कहा था, "आने वाले समय में हमें और ज़्यादा ख़तरों और चुनौतियों से लड़ने के लिए तैयार रहना होगा,"

"दुनिया सदी के सबसे बड़े बदलावों से गुज़र रही है." उन्होंने कहा कि चीन को इससे निपटने के लिए तैयार रहना होगा.

माओत्से तुंग के समय से ही आर्थिक आत्मनिर्भरता की अवधारणा सीसीपी के दर्शन में शामिल है - विशेषकर जब अंतरराष्ट्रीय वातावरण शत्रुतापूर्ण हो जाए.

जिनपिंग ने जुलाई में कहा था, "हमारे सामने आने वाली कई समस्याएं मध्यम और दीर्घकालिक हैं, और एक लंबी लड़ाई लड़ने की मानसिकता से देखा जाना चाहिए"

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चीनी नेतृत्व ने अमरीका के साथ प्रतिद्वंद्विता को स्थायी रूप से देखना शुरू कर दिया है, इस बात पर ध्यान दिए बिना कि अगले साल राष्ट्रपति कौन चुना जाएगा. इसलिए छोटे सुधारों के बजाय रणनीतिक सुधारों पर ध्यान दिया जा रहा है.

सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने 16 अगस्त को एक लेख में लिखा था, "आर्थिक बदलावों का मक़सद अमरीका के रवैये और आधिपत्य से लड़ना है"

ट्रंप प्रशासन ने ख़्वावे और टेनसेंट जैसी कंपनियो के ख़िलाफ़ पहले ही मोर्चा खोल रखा है.

बदलाव नहीं होगा आसान

चीन अर्थव्यवस्था

चीन के बदलाव की रणनीति दस्तावेज़ों पर अच्छी लग रही है लेकिन इन्हें लागू करना मुश्किल होगा. इसके लिए बड़े ढांचागत सुधारों की आवश्यकता होगी, जिनपिंग की ओर से इसके संकेत कम ही मिले हैं.

सत्ता में आने के बाद जिनपिंग ने बाज़ार की अहमयित की बात की है लेकिन उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था में सरकार का दख़ल बढ़ा है.

महामारी के बाद, चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिले हैं लेकिन कुछ समस्याएं बनी हुई हैं, जैसे आय असमानता और उपभोक्ता के ख़र्च.

नए विकास पैटर्न के काम करने के लिए घरेलू आय और खपत को बढ़ावा देना अनिवार्य होगा.

अगर ये सब हासिल हो भी जाता है, तब भी राह आसान नहीं होगी.

मजदूरी बढ़ाने के नुक़सान भी हैं. ये चीन की निर्यात प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय प्रसार को प्रभावित कर सकती है. ये भी चिंता जताई जा रही है कि चीन के अपने बाज़ार बड़े आकार के बावजूद देश की निर्माण क्षमता के मुक़ाबले छोटे हैं.

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