भारत-पाकिस्तान: बजबजा रही है गंदगी... वुसअत का ब्लॉग

गंदा दरिया
    • Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

सब कहते हैं धरती मां है लेकिन जिस तरह हम सबने मिलके इस मां के सिर से पर्यावरण की चादर उतारी है उसके बाद हमें धरती को मां कहने का क्या हक़ है.

चलिए धरती मेरी और आपकी मां है तो हमारा बाप कौन है?

दरिया...यह दरिया ही तो है जो धरती की मांग में सिंदूर की तरह गुज़रता है और धरती की गोद हरी-भरी रखता है.

धरती और दरिया ना हो तो हमारी क्या औक़ात.

मगर धरती माता के साथ हम जो कर रहे हैं सो कर रहे हैं, पिताजी के साथ हमारा व्यवहार तो इससे भी ज़्यादा बेरहम है.

रोज़ाना लाखों टन कचरा, औद्योगिक कूड़ा, कैमिकल्स, गंदा तेल दरिया पिता के मुंह पर कालिख की तरह मल रहे हैं.

हम कितने संस्कारी बच्चे हैं, हैं ना!

बेवक़ूफ़ी की इंतहा यह है कि एकतरफ़ तो हम रोते हैं कि अगले दो-ढाई दशक के बाद हम पानी की बूंद-बूंद को तरसेंगे.

मगर आज नदी-नालों-झीलों-बारिश की शक्ल में जो मीठा पानी उपलब्ध है उसे हम साफ़ करके महफ़ूज़ और जमा करने की बजाय उसमें दुनियाभर का गंद घोल रहे हैं और चीख़ भी रहे हैं कि हाय! हाय! हमारा पानी किसने ज़हरीला कर दिया.

गंदा दरिया

सब कहते हैं सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है. सिंधु में तिब्बत से लेकर नीचे तक कम से कम आठ छोटे-बड़े दरिया और सैकड़ों नाले गिरते हैं.

सबको मालूम है कि सिंधु दरिया ना हो तो पाकिस्तान रेगिस्तान हो जाए.

कल ही मैं पढ़ रहा था कि जहां तक धरती और दरिया से अच्छे व्यवहार की बात है तो इसमें भारत हो या पाकिस्तान दोनों तरफ़ एक जैसी हरकतें हो रही हैं.

भारतीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड कहता है कि गंगा और नर्मदा समेत देश के 445 में से 275 दरिया इतने प्रदूषित हो चुके हैं कि उनका पानी इंसानों के पीने के लायक़ नहीं. और कावेरी नदी के पानी से तो कई इलाक़ों में खेतों की सिंचाई भी ख़तरनाक हो चली है.

ऐसे में प्रयागराज से गंगा और जमुना के संगम से यह अच्छी ख़बर आई है कि इस बार कुंभ मेले के यात्री साफ़ नीले गंगा में डुबकी लगा रहे हैं क्योंकि इलाहाबाद के संगम में रोज़ाना जो 270 मिलियन लीटर गंद दरिया में दाख़िल होता है, उसका बायोटेक्नोलॉजी के ज़रिए ट्रीटमेंट किया जा रहा है और इलाहाबाद से ऊपर दरिया के किनारे क़ायम कानपुर के कारख़ानों को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया है.

प्रयागराज मं कुंभ के दौरान गंगा
इमेज कैप्शन, प्रयागराज मं कुंभ के दौरान गंगा

इसका मतलब है कि नीयत हो तो नदी-नालों-झीलों की सफ़ाई कोई रॉकेट साइंस नहीं.

कहते हैं अगली जंग पानी की वजह से होगी. आप बेशक पानी के लिए एक-दूसरे का ख़ून बहाने से मत चूकना. मगर गंदे पानी के लिए नहीं साफ़ पानी के लिए एक-दूसरे के लिए लड़ें.

ऐसा हो जाए तो शायद इसके बाद आप एक दूसरे से पानी पर लड़ने का भी ना सोचें.

वुसअतुल्लाह ख़ान के पुरान ब्लॉग पढ़ेंः

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