'सीरिया में 500 लोगों में रासायनिक हमले के लक्षण'

पूर्वी ग़ूटा में जंग
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि सीरिया के पूर्वी ग़ूटा में हुए हमले में घायल हुए मरीज़ों में रासायनिक हमले के लक्षण पाए गए हैं.

संगठन ने सीरिया के डूमा इलाके में बिना किसी अड़चन के प्रवेश दिए जाने की मांग की है.

संगठन के अधिकारी इलाके में मौजूद अपने सहयोगियों से मिली इस रिपोर्ट की पुष्टि करना चाहते हैं, जिसमें कहा गया है कि 500 से अधिक लोगों में रासायनिक हमले के लक्षण पाए गए हैं.

सीरियाई सरकार इन हमलों में अपना हाथ होने से इंकार करती रही है. अमरीका ने रासायनिक हमले की ख़बरों के बाद सीरिया पर ज़ोरदार हमला करने की धमकी दी है.

अमरीका की धमकी

पूर्वी ग़ूटा में जंग

उधर रूस ने अमरीकी बयान को, सीरिया पर हमला करने का बहाना बताया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि हमले में 70 से अधिक लोग मारे गए हैं.

संगठन ने कहा है कि उनके साथियों ने उन्हें 500 लोगों में रासायनिक हमले के बाद दिखने वाले लक्षण देखे हैं.

इन लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ़, आँखों में खुजली और नर्वस सिस्टम में व्यावधान शामिल हैं. संगठन ने बयान में कहा है कि दो स्वास्थ्य केंद्र में इस हमले की चपेट में आए हैं.

'जानबूझ कर इस्तेमाल'

पूर्वी ग़ूटा में जंग
इमेज कैप्शन, ये सीरिया की सेना द्वारा दाग़ा गया एक रॉकेट है. दावा है कि ऐसे ही ज़हरीली गैस से लैस रॉकेट पूर्वी ग़ूटा पर भी दाग़े गए थे.

डब्ल्यूएचओ के डॉक्टर पीटर सलामा ने कहा, "हम सभी को इन भयावह ख़बरों और तस्वीरों पर ग़ुस्सा आना चाहिए. हमारी मांग है कि हमें इस इलाक़े में बेरोक-टोक जाने दिया जाए ताकि हम विस्तार से लोगों की सेहत की जांच कर सकें."

सीरिया में विपक्ष के कार्यकर्ता, राहतकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी आरोप लगा रहे हैं की पूर्वी ग़ूटा पर सरकारी सेना ने ज़हरीले रासायनों से भरे गोले दाग़े थे.

बताया जा रहा है कि उस संदिग्ध हमले में 60 से अधिक लोग मारे गए हैं. लेकिन राहतकर्मियों का कहना है कि सैकड़ों लोगों ने बमबारी से बचने के लिए तहख़ानों में शरण ली थी. वहां पहुंचने पर कुछ और लोगों की मरने की ख़बर आ सकती है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ़्रांस के प्रतिनिधि ने कहा है कि जानबूझ ज़हरीली गैस का प्रयोग किया गया है क्योंकि ये तहख़ाने तक भी पहुंच सकती है.

सीरिया

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