इंसान के शरीर में लगी सूअर की किडनी और बना ये नया रिकॉर्ड

    • Author, जेम्स गैलागर
    • पदनाम, स्वास्थ्य एवं विज्ञान संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

अमेरिकी डॉक्टरों के मुताबिक़, सूअर से ट्रांसप्लांट की गई किडनी ने एक मरीज़ के शरीर में 271 दिनों तक काम किया. यह अब तक का सबसे लंबा रिकॉर्ड है.

मरीज़ टिम एंड्रयूज़ ने कहा कि इस ट्रांसप्लांट से उन्हें एक नई 'उम्मीद' मिली और कई महीनों तक अस्पताल जाकर डायलिसिस मशीन से खून साफ़ कराने की ज़रूरत नहीं पड़ी.

मास जनरल ब्रिघम अस्पताल की टीम का कहना है कि उनका काम दिखाता है कि इंसानी किडनी उपलब्ध होने तक सूअर के अंगों का अस्थाई तौर पर 'ब्रिज' के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि सूअर की किडनी ने आख़िरकार काम करना बंद कर दिया और उसे निकालना पड़ा. इसके बाद एंड्रयूज़ को कुछ समय के लिए डायलिसिस करानी पड़ी, जब तक कि उन्हें एक डोनर नहीं मिल गया.

ट्रांसप्लांट के लिए अंगों की कमी के कारण डॉक्टर और वैज्ञानिक ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन की तरकीबें खोज रहे हैं, जिसमें दूसरे जानवरों के अंगों का इस्तेमाल किया जाता है.

अमेरिका में करीब 1 लाख लोग किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि हर साल सिर्फ 25,000 ट्रांसप्लांट होते हैं. ब्रिटेन में 7,000 से ज़्यादा लोग किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सूची में हैं.

'किडनी ट्रांसप्लांट में 7 साल की वेटिंग थी'

एंड्रयूज़ को बताया गया था कि उनकी बारी आने में सात साल लग सकते हैं. लेकिन डायलिसिस कराने वाले लोग औसतन सिर्फ पांच साल ही जीवित रहते हैं.

उन्होंने कहा, "मेरे पास थोड़ा कम समय था. यह बहुत निराशाजनक हो जाता है."

लेकिन उन्होंने सूअर की किडनी के प्रत्यारोपण के विचार को 'उम्मीद' और 'अंधेरी सुरंग के अंत में एक रोशनी' बताया.

उन्होंने कहा, "उम्मीद वो सबसे बड़ी चीज़ है जिससे मशीन से आज़ाद होने और अपनी ज़िंदगी जीने का मौका मिला."

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन क्या है?

ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन के लिए सूअर को सबसे बेहतर जानवर माना जाता है. उसके अंगों का आकार लगभग सही होता है और उन्हें पालने का इंसानों के पास कई सालों का अनुभव भी है.

लेकिन ऐसा नहीं है कि आप सीधे किसी फार्म पर जाएं, सूअर की किडनी निकालें और उसे किसी इंसान के शरीर में लगा दें.

इंसानी शरीर तुरंत उस अंग को बाहरी चीज़ के तौर पर पहचान लेगा और उस पर ऐसी प्रतिरोधी प्रतिक्रिया शुरू कर देगा, जिससे किडनी नष्ट हो जाएगी.

कुछ ही मिनटों में उसमें छेद होने लगेंगे, उसकी हर कोशिका को नुक़सान पहुंचेगा और अंदर से खून जमने के कारण अंग काला पड़ जाएगा.

इसलिए रिसर्चर्स ने 'युकाटन मिनिएचर पिग' विकसित किए. इनके जीन में 69 तरह के बदलाव किए गए हैं, ताकि इनके अंगों को 'इंसानी शरीर के अनुकूल' बनाया जा सके.

इन बदलावों से सूअर की कोशिकाओं की कुछ ऐसी विशेषताएं हटा दी जाती हैं, जिन्हें हमारा इम्यून सिस्टम पहचानकर हमला करता है.

साथ ही कुछ इंसानी डीएनए जोड़ा जाता है, जो केमोफ्लाज यानी एक ऐसा कवच बनाता है जो सूअर के टिश्यू को इंसानी इम्यून सिस्टम से छिपने में मदद करता है.

इसके अलावा संक्रमण को रोकने के लिए सूअर के डीएनए में छिपे वायरस को निष्क्रिय करने वाले भी बदलाव किए जाते हैं.

प्रत्यारोपित किडनी ने 271 दिनों तक काम किया

टाइप 2 डायबिटीज के कारण एंड्रयूज़ को किडनी की गंभीर बीमारी हो गई थी और उनकी किडनी काम करना बंद कर रही थी.

25 जनवरी 2025 को जब उनका ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन हुआ, तब उनकी उम्र 66 साल थी.

हाल ही में मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक़, ट्रांसप्लांट सूअर की किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया था.

यह किडनी 271 दिनों तक काम करती रही. इसके बाद उसी साल अक्तूबर में उसे निकाल दिया गया. इसके बाद टिम को 82 दिनों तक डायलिसिस करानी पड़ी, जब तक कि इस साल जनवरी में उन्हें एक डोनर से किडनी नहीं मिल गई.

वह किडनी अब अच्छी तरह काम कर रही है.

मास जनरल ब्रिघम के सेंटर फ़ॉर ट्रांसप्लांटेशन साइंसेज़ के डॉ. लियोनार्डो रिएला ने कहा कि प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध अंगों की कमी के कारण 'हम संकट में हैं.'

उन्होंने कहा, "हम उम्मीद देने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं. हमें सच में लगता है कि ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन उन मरीजों के लिए एक विकल्प हो सकता है, जिनके पास डोनर नहीं है. इससे हम संभावित रूप से डायलिसिस को दरकिनार कर उन्हें प्रत्यारोपण तक पहुंचा सकते हैं."

संभावनाएं और चुनौतियां

शुरुआत में ऐसे संकेत मिले थे कि प्रतिरक्षा प्रणाली एंड्रयूज़ के अंग को अस्वीकार कर रही है, लेकिन उनकी दवा में बदलाव करके इसका सफलतापूर्वक इलाज किया गया.

हालांकि, लगभग छह महीने बाद गुर्दे की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगीं और अंग में सूजन आ गई और फिर वह काम करना बंद करने लगा.

इसका सटीक कारण स्पष्ट नहीं है क्योंकि सुअर की किडनी पर एंटीबॉडी के हमले के कोई संकेत नहीं मिले थे.

लैंसेट में लिखे अपने लेख में डॉक्टरों ने कहा है, "यह केस क्लीनिकल किडनी ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन की संभावनाओं और चुनौतियों दोनों को दिखाता है."

हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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