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सांप के काटने और कीड़े के काटने में क्या फर्क, बारिश में क्यों बढ़ते हैं स्नेकबाइट के मामले
- Author, हरमनदीप सिंह
- पदनाम, बीबीसी पंजाबी
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
हर साल मॉनसून के मौसम में सांप के काटने की घटनाएं बढ़ने लगती हैं.
लुधियाना ज़िले के बस्सियन गांव में भी ऐसी ही एक घटना हुई, जिसमें सांप के काटने से दो भाई-बहनों की मौत हो गई.
रक्षाबंधन के दिन, आठ साल के जोबनप्रीत और उसकी छह साल की बहन की सांप के काटने से मौत हो गई.
दोनों बच्चे घर में कमरों के बाहर अपनी दादी के पास सो रहे थे.
अचानक, दोपहर करीब 3 बजे जोबनप्रीत ने अपनी दादी से शिकायत की कि उसे किसी चीज़ ने काट लिया है. लेकिन परिवार वालों को लगा कि यह कोई कीड़ा या मच्छर होगा. कुछ देर बाद, उसकी बहन जसप्रीत ने भी शिकायत की कि उसे किसी चीज़ ने काट लिया है.
इस बीच, जब बच्चों की हालत बिगड़ने लगी और घटना वाली जगह के पास एक सांप देखा गया, तो परिवार वाले बच्चों को अस्पताल ले गए.
अस्पताल पहुंचने से पहले ही जसप्रीत की मौत हो गई, जबकि जोबनप्रीत की मौत लुधियाना के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान हुई.
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर साल सांप के काटने के अनुमानित 30 से 40 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से लगभग 50,000 लोगों की मौत हो जाती है. यह संख्या दुनिया भर में सांप के काटने से होने वाली कुल मौतों का लगभग आधा है.
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सांप के काटने के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.
पंजाब में कौन से सांप पाए जाते हैं?
नवांशहर के रहने वाले निखिल सांगर को सांपों को रेस्क्यू करने का 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. इस दौरान उन्होंने हजारों सांपों की जान बचाई है. वह लंबे समय तक पंजाब वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग के साथ भी काम कर चुके हैं.
उनके अनुसार, "पंजाब में सांपों की चार प्रजातियां जानलेवा हैं. इन प्रजातियों में कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं."
जानकारों के अनुसार, सांप का काटना एक मेडिकल इमरजेंसी है. पंजाब में बहुत ज़हरीले सांप पाए जाते हैं, लेकिन हर सांप का काटना जानलेवा नहीं होता. फिर भी, सांप के काटने को गंभीरता से लेना चाहिए और तुरंत अस्पताल जाना चाहिए.
समाना के सरकारी अस्पताल में मेडिकल ऑफ़िसर के तौर पर तैनात डॉ. दीपक मोंगिया कहते हैं, "सांप के काटने के बाद सबसे ज़रूरी बात अस्पताल पहुंचना है. सांप के ज़हर का सबसे असरदार इलाज एंटी-वेनम वैक्सीन है, जिसे एंटी-स्नेक वेनम वैक्सीन भी कहा जाता है. यह वैक्सीन जितनी जल्दी दी जाए, मरीज़ के लिए उतना ही अच्छा होता है."
लुधियाना सिविल हॉस्पिटल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. अखिल सरीन बताते हैं, "सांप के ज़हर के लक्षण दिखने में कितना समय लगेगा, ज़हर का असर होने में कितना समय लगेगा, या एंटी-वेनम वैक्सीन कब दी जाएगी. यह सब सांप की किस्म और मरीज़ की उम्र, सेहत और इम्यूनिटी पर निर्भर करता है."
सांप के काटने पर अस्पताल पहुंचने से पहले क्या करें:
नेशनल हेल्थ मिशन के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और डॉक्टरों के अनुसार, ये ज़रूरी सावधानियां बरतनी चाहिएय
- मरीज़ को शांत रखें.
- घबराहट और ज़्यादा हिलने-डुलने से बचें.
- मरीज़ को दौड़ने या चलने के लिए मजबूर न करें.
- प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं.
- सांप के काटे हुए हाथ या पैर को हिलाने से बचें.
- अंग को किसी स्प्लिंट या दूसरे सहारे से स्थिर करें ताकि ब्लड सप्लाई न रुके.
- सांप के काटे हुए हिस्से से गहने, अंगूठी, ब्रेसलेट, जूते, घड़ी और टाइट कपड़े हटा दें. इनसे बाद में सूजन आ सकती है और स्थिति बिगड़ सकती है.
- घाव को ढकें नहीं.
- मरीज़ को बाईं करवट लिटाएं. ऐसा करते समय सिर को हाथ का सहारा दें और दाहिने पैर को मोड़कर रखें.
क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
नेशनल हेल्थ मिशन की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार, जिस जगह पर काटा गया हो, उसे रस्सी या कपड़े से कसकर नहीं बांधना चाहिए. इससे खून का बहाव रुक सकता है और अंग को नुकसान पहुंच सकता है.
घाव को ब्लेड या चाकू या किसी अन्य चीज से नहीं काटना चाहिए और न ही जहर को चूसने की कोशिश करनी चाहिए. घाव पर बर्फ, गर्मी, बिजली या रसायन न लगाएं. ये तरीके नुकसान पहुंचा सकते हैं.
डॉ. दीपक मोंगिया का कहना है कि तांत्रिकों, बाबाओं या झाड़-फूंक करने वालों के चक्कर में पड़कर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. सांप के ज़हर का वैज्ञानिक इलाज सिर्फ़ अस्पताल में ही होता है. ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पारंपरिक इलाज के तरीके असरदार होते हैं.
किन लक्षणों पर खास ध्यान देना चाहिए?
डॉ. मोंगिया बताते हैं कि काटने की जगह पर दर्द, बढ़ती सूजन, खून बहना, छाले पड़ना, पलकें झुकना, धुंधला या दो-दो दिखाई देना, बोलने में दिक्कत, निगलने में परेशानी, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में कमजोरी और नाक, मसूड़ों या शरीर के अन्य हिस्सों से खून बहने जैसे लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए.
वे कहते हैं, "वैसे भी सांप के काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए, भले ही सांप ज़हरीला न हो. डॉक्टर या अस्पताल को यह तय करने दें कि मरीज़ को किस तरह के इलाज की ज़रूरत है या नहीं. लेकिन अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो इसका मतलब है कि स्थिति खतरनाक है."
वे आगे बताते हैं, "कुछ ज़हरीले सांपों के काटने के लक्षण देर से दिख सकते हैं. इसलिए, भले ही मरीज़ को शुरू में ठीक लगे फिर भी अस्पताल जाना ज़रूरी है."
अस्पताल में क्या होता है?
लुधियाना सिविल हॉस्पिटल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. अखिल सरीन कहते हैं, "अस्पताल पहुंचने पर मरीज़ को सबसे पहले इमरजेंसी रूम में भर्ती किया जाता है. वहां इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है. सबसे पहले यह पता लगाया जाता है कि काटा गया ज़हरीला है या नहीं और फिर उसी के अनुसार इलाज किया जाता है."
उन्होंने कहा, "सांप के काटने के इलाज के लिए एंटी-वेनम वैक्सीन हर उस सरकारी अस्पताल में उपलब्ध है, जहां इमरजेंसी विभाग है."
डॉक्टर मरीज़ की जांच करके यह पता लगाते हैं कि जिस सांप ने काटा था वह ज़हरीला है या नहीं. अगर ज़हरीला हो, तो एंटी-स्नेक वेनम दिया जाता है. अगर मरीज़ इस इंजेक्शन से ठीक नहीं होता है, तो उसे लाइफ़ सपोर्ट सिस्टम पर रखा जाता है, जहां ज़हर के असर का इलाज किया जाता है.
कीड़े के काटने और सांप के काटने में क्या अंतर है?
डॉ. मोंगिया कहते हैं, "सांप के काटने के निशान अलग-अलग तरह के हो सकते हैं. कभी-कभी चार निशान होते हैं, कभी दो और कभी-कभी सिर्फ़ एक निशान होता है. आम आदमी यह नहीं पहचान सकता कि किस प्रजाति के सांप ने काटा है. सिर्फ़ विशेषज्ञ ही यह फ़र्क बता सकते हैं."
आम तौर पर टिक (एक तरह का कीड़ा) के काटने का निशान बहुत बारीक होता है. कभी-कभी यह निशान दिखाई नहीं देता. कभी-कभी यह खरोंच जैसा दिखता है और कभी-कभी निशान साफ़ तौर पर नज़र नहीं आता.
मानसून के दौरान सांप के काटने की घटनाएं क्यों बढ़ जाती हैं?
निखिल सांगर बताते हैं, "मानसून सांपों के प्रजनन का मौसम होता है. इसीलिए इन दिनों उनकी संख्या सामान्य से ज़्यादा होती है. इन दिनों कीड़े-मकोड़े भी प्रजनन करते हैं. यही वजह है कि कीड़े-मकोड़ों का पीछा करते हुए सांप रिहायशी इलाकों तक भी पहुंच जाते हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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