इसराइल पर जनसंहार का मुकदमा, इंटरनेशनल कोर्ट में आज से सुनवाई

ग़ज़ा
    • Author, ऑन्या गैलाग़र
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
  • प्रकाशित

ये इस सदी का सबसे बड़ा मुकदमा है. पूरी दुनिया की नज़र इस मुकदमे पर है.

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में आज यानी 11 जनवरी से इसराइल के ख़िलाफ़ दर्ज मुकदमे की सुनवाई शुरू होनी है.

दक्षिण अफ़्रीका और इसराइल का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील 11 और 12 जनवरी को कोर्ट रूम में जिरह के लिए मौजूद होंगे.

क्या इसराइल, ग़ज़ा में फ़लस्तीनी लोगों के ख़िलाफ़ जनसंहार कर रहा है?

दक्षिण अफ़्रीका का कहना है कि ऐसा ही है और उसने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस- आईसीजे) में 29 दिसंबर 2023 को एक मुकदमा दर्ज कराया है.

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का कहना है कि उनका देश ग़ज़ा अभियान में अभूतपूर्व "नैतिकता" का पालन कर रहा है.

जबकि एक सरकारी प्रवक्ता ने दक्षिण अफ़्रीका के मुकदमे की तुलना 'ब्लड लाइबल' (यहूदी विरोधी अफ़वाह कि प्राचीन कर्मकांडों में यहूदी ईसाईयों को मार कर उनका खून निकालते थे) से की.

सात अक्टूबर को हमास ने इसराइल पर हमला किया था. हमले के बाद नीर ओज़ का हाल.
इमेज कैप्शन, सात अक्टूबर को हमास ने इसराइल पर हमला किया था. हमले के बाद की तस्वीर.

दक्षिण अफ़्रीका ने क्या लगाए हैं आरोप?

दक्षिण अफ्रीका ने 84 पृष्ठों की एक अपील दायर की है, जिसमें कहा गया कि इसराइल की कार्रवाई की प्रकृति जनसंहार की है क्योंकि उनकी मंशा, ग़ज़ा में फ़लस्तीनी लोगों की अधिक से अधिक तबाही है.

इसमें कहा गया है कि जनसंहार की कार्रवाई में फ़लस्तीनी लोगों की हत्या, गंभीर मानसिक और शारीरिक क्षति पहुंचाना और ऐसे हालात पैदा करना शामिल है, जिसका उद्देश्य "सामूहिक रूप से उनकी तबाही है."

आईसीजे में दायर अपील के अनुसार, इसराइली अधिकारियों के बयानों में भी जनसंहार की मंशा झलकती है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ ऑस्ट्रेलिया में क़ानून की लेक्चरर जूलियट एम का कहना है कि दक्षिण अफ़्रीका की याचिका 'बहुत व्यापक' और 'बहुत ध्यान से लिखी' गई है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "इसमें इसराइल को हर संभावित दलील देनी होगी...और ऐसे दावों का जवाब भी देना होगा जो इस अदालत के न्याय क्षेत्र में नहीं आते."

"दक्षिण अफ़्रीका का कहना है कि उसने यह मुकदमा दायर करने से पहले इसराइल के साथ कई फ़ोरमों के जरिए इस मुद्दे को उठाया था."

वीडियो कैप्शन, 'महीनों तक जारी रहेगी ग़ज़ा में जंग'

इसराइल का क्या कहना है?

इसराइली सरकार के प्रवक्ता एलोन लेवी ने कहा है कि इसराइल इस मुकदमे को लड़ेगा.

उन्होंने ये भी कहा कि इस युद्ध को शुरू करने के लिए हमास को पूरी नैतिक ज़िम्मेदारी लेनी होगी.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय अपराधों में जनसंहार ऐसा अपराध है जिसे साबित करना सबसे कठिन है.
इमेज कैप्शन, अंतरराष्ट्रीय अपराधों में जनसंहार ऐसा अपराध है जिसे साबित करना सबसे कठिन है.
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय हेग के पीस पैलेस में स्थित है.
इमेज कैप्शन, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय हेग के पीस पैलेस में स्थित है.

क्या अभियुक्त ठहराया जा सकता है?

क्या किसी सरकार या व्यक्ति को जनसंहार का दोषी ठहराया जा सकता है, इस सवाल पर ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में क़ानून के प्रोफ़ेसर माइकल बेकर कहते हैं कि किसी व्यक्ति को जनसंहार का दोषी ठहराना तब भी आसान है लेकिन किसी सरकार को दोषी सिद्ध करना मुश्किल है.

वो कहते हैं कि जनसंहार संधि का उल्लंघन करने वाली सरकार को खोजने में अंतर है.

बेकर कहते हैं, "यह अंतर जटिल है और भ्रम पैदा कर सकता है."

अंतरराष्ट्रीय अदालत की क्या भूमिका है?

आईसीजे संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत है जो सरकारों के बीच विवाद में फैसले देती है. संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य स्वतः आईसीजे के सदस्य हैं.

सरकार आईसीजे में मुकदमा दायर करती है, जिसमें 15 जज होते हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की आम सभा और सुरक्षा परिषद के जरिए 9 साल के लिए चुना जाता है.

अदालत के अधिकार क्षेत्र में 1948 की जनसंहार संधि से जुड़े विवादों की सुनवाई करना शामिल है.

द्वितीय विश्वयुद्ध में 1939 से 1945 के बीच यूरोप में नाज़ियों ने करीब 60 लाख यहूदियों की हत्या की थी. इसके बाद, विश्व के नेताओं ने भविष्य में ऐसी किसी घटना को रोकने के लिए इस संधि को स्वीकार किया था.

इसराइल, दक्षिण अफ़्रीका, म्यांमार, रूस और अमेरिका समेत 152 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं.

अंतराष्ट्रीय अपराध अदालत
इमेज कैप्शन, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का क्या काम है?

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) का गठन 2002 में किया गया था और यह भी हेग में है.

यह कोर्ट किसी मामले की तभी सुनवाई करती है जब घरेलू अदालत से विवाद का निपटारा न हो पाए. अमेरिका, रूस और इसराइल इसके सदस्य नहीं हैं.

आईसीसी आपराधिक मामलों की सुनावाई करता है और किसी व्यक्ति को युद्ध अपराध, मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और जनसंहार के लिए दोषी क़रार दे सकता है.

क़ानून में सबकी अलग-अलग परिभाषा है. आईसीसी अभियोजक कोई मामला खोल सकता है या शुरू कर सकता है.

पूर्व यूगोस्लाविया में जुलाई 1995 में स्रेब्रेनिका जनसंहार हुआ था.
इमेज कैप्शन, पूर्व यूगोस्लाविया में जुलाई 1995 में स्रेब्रेनिका जनसंहार हुआ था.

जनसंहार में मिली सज़ा

जनसंहार के आरोप में सज़ा पाने वाले पहले व्यक्ति थे रवांडा के हुतू जीन-पॉल अकायेसू.

संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल फॉर रवांडा (आईसीटीआर) ने 1998 में यह सज़ा सुनाई थी. उन पर 1994 में तुत्सी लोगों की हत्याएं करने का आरोप था. तब आठ लाख लोग मारे गए थे.

साल 2017 में इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल फॉर फॉर्मर यूगोस्लाविया (आईसीटीवाई) ने पूर्व बोस्नियाई सर्ब कमांडर रैट्को म्लैडिक को दोषी क़रार दिया.

उन पर 1995 में हुए स्रेब्रेनिका जनसंहार का आरोप था जिसमें उनके सैनिकों ने 8,000 मुस्लिम पुरुषों और लड़कों को मार डाला था.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने बोस्निया की याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें दावा किया था कि सर्बिया या पूर्व यूगोस्लाविया ने स्रेब्रेनिका में जनसंहार कराया था.

इसकी बजाय, कोर्ट ने पाया कि सर्बिया जनसंहार को रोकने और एक शीर्ष जनरल को सौंपने में विफल रहा.

आईसीजे में लॉ क्लर्क के रूप में काम कर चुके बेकर ने बताया कि सरकार की ओर से ‘जनसंहारक मंशा’ को लेकर अदालत के मानदंड बहुत ऊंचे हैं.

इसराइली सरकार का कहना है कि उसका मकसद हमास का पूरा सफाया है.
इमेज कैप्शन, इसराइली सरकार का कहना है कि उसका मकसद हमास का पूरा सफाया है.

इसराइल-ग़ज़ा युद्ध

यह संघर्ष सात अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ. तब हमास के लड़ाकों ने इसराइली क्षेत्र पर हमला किया. इसमें करीब 1,200 लोगों की मौत हो गई. हमास के लड़ाके 200 से अधिक बंधकों को अगवा कर ग़ज़ा ले गए.

तब से इसराइल ग़ज़ा पर हवाई हमले कर रहा है. बाद में उसने ज़मीनी हमला भी शुरू किया. इसराइल ने फ़लस्तीनी जनता को ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी ओर जाने का आदेश दिया है. इसने ग़ज़ा में भोजन और ईंधन की मदद को भी रोक दिया है.

हमास प्रशासित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इसराइल के हमलों में अभी तक 22,000 से अधिक लोग मारे गए जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं.

इसराइल, ब्रिटेन, अमेरिका और पश्चिमी देशों ने हमास को आतंकवादी घोषित कर रखा है.

ग़ज़ा में इस समय सिर्फ 13 आंशिक रूप से संचालित अस्पताल बचे हैं.
इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में इस समय आंशिक रूप से संचालित सिर्फ 13 अस्पताल बचे हैं.

11 और 12 जनवरी को क्या होगा?

दक्षिणी अफ़्रीका ने आईसीजे से अंतरिम उपाय करने की भी मांग की है.

वो चाहता है कि अदालत इसराइल को ग़ज़ा में अपनी सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का आदेश दे. यह आपातकालीन प्रक्रिया है जिसे पहले सुना जाएगा.

जूलियट एम कहती हैं, "इस चरण में जनसंहार तय करने की सुनवाई नहीं होगी. सबूत बहुत कमज़ोर हैं. सवाल ये पूछा जा रहा है कि क्या अपूर्णीय क्षति की संभावना है."

दक्षिण अफ़्रीका का तर्क है कि "जनसंहार का संभावित ख़तरा" है और समय बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है.

रूस ने 24 फ़रवरी 2022 को जब हमला किया तो यूक्रेन ने भी ऐसी ही याचिका दायर की थी और इसके कुछ हफ़्ते बाद ही आईसीजे ने रूस को अपनी सैन्य कार्रवाई को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन मॉस्को ने इसकी अनदेखी कर दी.

एक्सपर्ट को लगता है कि आईसीजे अपना फ़ैसला जनवरी के अंत तक सुना सकता है.

एक्सपर्ट जूलियट

बेकर कहते हैं, "मुझे संदेह है कि कोर्ट इसराइल को रुकने के लिए कहेगा. कोर्ट इसराइल को अपनी कार्रवाई सीमित करने के लिए कह सकता है."

वे कहते हैं, "इसका इतना ही मतलब है कि इसराइल को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों को मानना चाहिए."

2017 में क़रीब 10 लाख रोहिंग्या को म्यांमार छोड़कर भागना पड़ा.
इमेज कैप्शन, 2017 में क़रीब 10 लाख रोहिंग्या को म्यांमार छोड़कर भागना पड़ा.

आईसीजे में जनसंहार के अन्य मामले

जूलियट एम कहती हैं कि सबसे महत्वपूर्ण मामला है म्यांमार के ख़िलाफ़ गांबिया का जनसंहार मुकदमा.

ग़ज़ा की फ़लस्तीनी जनता और रोहिंग्या लोगों की आईसीजे में पहुंच नहीं है क्योंकि वे राष्ट्र राज्य नहीं हैं, इसलिए उनकी ओर से अन्य देश मुद्दा उठाते हैं.

मुस्लिम देशों की ओर से गांबिया ने म्यांमार पर रोहिंग्या लोगों के जनसंहार का आरोप लगाया. 2017 में क़रीब 10 लाख रोहिंग्या लोगों को मज़बूर होकर देश छोड़ना पड़ा और बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ी.

2023 के अंत में ब्रिटेन, डेनमार्क, फ़्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड्स के अलावा कनाडा ने भी इस मामले में शामिल होने की अपील की, जिसका मतलब है कि वे भी क़ानूनी दलील देंगे.

यूक्रेन के समर्थन में आईसीजे में इसी तरह का कदम पश्चिमी देशों ने उठाया था.

लेकिन जूलियट एम को लगता है कि पश्चिम इस मुकदमे से बाहर ही रहेगा.

उनके अनुसार, “पश्चिमी मुल्क दक्षिण अफ़्रीका का समर्थन नहीं करने जा रहे हैं. सवाल उठता है कि क्या अरब देश ऐसा करेंगे?”

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ग़ज़ा की 85% आबादी विस्थापित हो चुकी है, जिसमें अधिकांश कई बार विस्थापित हुए हैं.
इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ग़ज़ा की 85 प्रतिशत आबादी विस्थापित हो चुकी है, जिसमें अधिकांश कई बार विस्थापित हुए हैं.

अंतिम फैसला कब आएगा?

गांबिया ने अपना मुकदमा नवंबर 2019 में दायर किया था लेकिन इसकी सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है. अंतिम फैसले में सालों लग सकते हैं.

अगर आईसीजे ने पाया कि इसराइल ने ग़ज़ा में जनसंहार किया है तो आईसीसी में किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाने के लिए इसे सबूत के तौर पर बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है.

दोनों क़ानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि इसराइल के ख़िलाफ़ इस तरह का कोई फैसला दूसरे देशों पर दबाव बनाएगा कि वो इसराइल के साथ अपने रिश्ते पर पुनर्विचार करें, ख़ासकर उन पर जो इसराइल के समर्थक हैं.

हालांकि अमेरिका ने पहले ही दक्षिण अफ़्रीका के मुकदमे के ख़िलाफ़ तीखा स्टैंड लिया है.

व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि इसमें “कोई दम नहीं" है और यह बिल्कुल “निराधार" है.

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