पीठ दर्द की क्या वजह होती है, इससे बचने और इसके इलाज के क्या तरीक़े हो सकते हैं?

बीबीसी के बनाए के ग्राफ़िक में तीन लोग तीन अलग-अलग पोजिशन में दिखाई दे रहे हैं. सभी की रीढ़ लाल दिख रही है
इमेज कैप्शन, इंसानों की रीढ़ की हड्डी सिर्फ़ पसलियों और कूल्हे की हड्डियों से ही नहीं जुड़ी होती
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ज़्यादातर लोगों को अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी पीठ दर्द का सामना करना ही पड़ता है.

आमतौर पर तो यह कुछ हफ़्तों में ठीक हो जाता है, लेकिन बार-बार होने वाला दर्द आपको कमज़ोर कर सकता है जिससे रोज़मर्रा की ज़िंदगी मुश्किल बन जाती है.

और चूंकि इंसानों की रीढ़ की हड्डी सिर्फ़ पसलियों और कूल्हे की हड्डियों से ही नहीं जुड़ी होती, बल्कि इसमें कई तरह के टेंडन, लिगामेंट, कार्टिलेज, मांसपेशियां और नसें भी शामिल होती हैं. इसलिए इनमें से किसी भी हिस्से में समस्या होने पर पीठ दर्द हो सकता है.

यहां हम कुछ सुझाव दे रहे हैं जिन पर अमल कर हर उम्र के लोग दर्द से बच सकते हैं और उसे नियंत्रित कर सकते हैं.

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कमर के साथ-साथ गर्दन का दर्द भी चिंता की बात

लैपटॉप सामने रखकर एक महिला अपने दाएं हाथ से अपनी गर्दन को सहला रही है
इमेज कैप्शन, साल 2050 तक कमर के साथ-साथ गर्दन और कंधे की तकलीफ़ की समस्याएं ख़ासी बढ़ सकती हैं

ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिज़ीज़ (जीबीडी) स्टडी के ताज़ा संस्करण के अनुसार, 2050 तक आने वाले 30 वर्षों में लगातार कमर दर्द से पीड़ित रहने वाले लोगों की संख्या में एक-तिहाई से भी ज़्यादा बढ़ोतरी होने का अनुमान है.

यह अध्ययन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ वॉशिंगटन स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के इंस्टीट्यूट फ़ॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के शोधकर्ताओं ने किया है.

तब तक दुनिया में हर दस में से एक से ज़्यादा व्यक्ति प्रभावित होगा. जीबीडी के अनुसार, वैश्विक स्वास्थ्य पर सबसे ज़्यादा असर डालने वाली बीमारियों में स्ट्रोक, दिल और फेफड़ों की बीमारियां, डायबिटीज़ और नवजात शिशुओं से जुड़ी समस्याएं शामिल होंगी.

हालांकि कमर का निचला हिस्सा ज़्यादा दर्द का कारण बनता है, क्योंकि यह शरीर की ज़्यादातर हरकतों को संभालता है और ज़्यादा दबाव झेलता है. लेकिन ऊपरी पीठ, ख़ास तौर पर गर्दन और कंधे भी तकलीफ़ का कारण बन सकते हैं

इलाज से पहले निदान

अलग-अलग नस्ल के स्कूली बच्चे मैदान में रस्साकशी खेल रहे हैं
इमेज कैप्शन, बच्चों की रीढ़ की हड्डी कभी-कभी बाक़ी हड्डियों की तुलना में बहुत तेज़ी से लंबी होती है (सांकेतिक तस्वीर)

पीठ दर्द के मामले में इलाज से पहले निदान का सिद्धांत बेहद अहम है, क्योंकि इस दर्द के कई संभावित कारण हो सकते हैं लेकिन इसका अर्थ यह भी है कि इसके लिए कोई एक टेस्ट मौजूद नहीं है.

डॉक्टर आमतौर पर सबसे पहले जानलेवा बीमारियों की आशंका को दूर करने की कोशिश करते हैं, जैसे पित्ताशय या गुर्दे की बीमारी, या कुछ प्रकार के कैंसर. इसके इलाज में आमतौर पर शारीरिक जांच और रोगी का मेडिकल इतिहास देखना शामिल होता है.

ब्लड टेस्ट से कैंसर या सूजन का पता लगाया जा सकता है, जो कार्टिलेज को नुक़सान पहुंचा सकते हैं और गठिया का कारण बन सकते हैं.

पीठ दर्द के कई संभावित कारण हो सकते हैं (सांकेतिक तस्वीर)
इमेज कैप्शन, पीठ दर्द के कई संभावित कारण हो सकते हैं (सांकेतिक तस्वीर)
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निदान की पुष्टि के लिए इमेजिंग टेस्ट की ज़रूरत पड़ सकती है, जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई. इनसे जोड़ों, हड्डियों, डिस्क, अंगों या मुलायम ऊतकों की जांच की जाती है.

ज़्यादातर पीठ दर्द हल्के दर्द और अकड़न के रूप में महसूस होते हैं. लेकिन मांसपेशी या लिगामेंट फटने पर अचानक तेज़ दर्द हो सकता है. अगर दर्द नितंबों (हिप्स) और पैरों तक फैलता है और वहां झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है, तो यह नसों की समस्या का संकेत हो सकता है.

इलेक्ट्रोडायग्नोसिस भी मांसपेशी और नसों की बीमारियों में फ़र्क करने में मदद करता है.

यह निदान प्रक्रिया वयस्कों और बच्चों दोनों पर लागू होती है.

डॉक्टर अरीना डी'सूज़ा एक कंसल्टेंट स्पाइन सर्जन हैं. वह भारत और इंग्लैंड में शिशु रोग विशेषज्ञ के तौर पर काम कर चुकी हैं और अब जर्मनी में काम कर रही हैं.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ को बताया कि जब माता-पिता अपने बच्चों को लेकर आते हैं तो वह किन बातों पर ध्यान देती हैं.

"बच्चे हमेशा यहां-वहां कूदते ही रहते हैं, इसलिए मुझे यह देखना होता है कि-

  • क्या बच्चों को खेल-कूद जैसी गतिविधियों में चोट लगी है?
  • कहीं कोई छिपी हुई हड्डी-मांसपेशी की समस्या तो नहीं है?
  • क्या माता-पिता खुद भी पीठ दर्द से परेशान रहते हैं?
  • क्या बच्चे संतुलित आहार ले रहे हैं?

हमने घुटनों और पैरों में बढ़ते दर्द के बारे में सुना है, लेकिन कभी-कभी यह पीठ में भी हो सकता है- क्योंकि बच्चों की पूरी रीढ़ की हड्डी कभी-कभी बाक़ी हड्डियों की तुलना में बहुत तेज़ी से लंबी होती है."

स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर

इंसान की पीठ का एक चित्र जिसमें रीढ़ की हड्डी को संतरी रंग में दिखाया गया है
इमेज कैप्शन, इंसानी रीढ़ की हड्डी में आमतौर पर 33 वर्टेब्रा होते हैं

विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार ठीक हो रहे मरीज़ों की प्रगति सिर्फ़ इस डर से रुक जाती है कि कहीं पीठ दर्द फिर से न हो जाए.

एडम सियू, इंग्लैंड के 'हाउनटूयू हेल्थ एंड वेलबीइंग' के निदेशक हैं.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ को बताया, "भले ही रीढ़ या मांसपेशियों में कोई समस्या न हो लेकिन फिर से चोट लगने की चिंता मरीज़ों के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है. डर की वजह से उनकी सक्रियता कम हो जाती है. कुछ तो वह चीज़ें भी छोड़ देते हैं जिनसे उन्हें अच्छा लगता है."

प्रोफे़सर मार्क हैनकॉक, ऑस्ट्रेलिया की मैक्वेरी यूनिवर्सिटी में फिज़ियोथेरेपी के प्रोफे़सर हैं.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ को बताया, "कुछ मरीज़ अपनी पीठ को नुक़सान होने की आशंका से इतने डर जाते हैं कि वे सामाजिक जीवन से ही छिटक जाते हैं. जब आप इन सब चीज़ों को साथ में देखते हैं - सामाजिक तनाव, दर्द की चिंता, और थोड़ी-सी तकलीफ़ दे रही पीठ - तो अचानक यह एक बहुत बड़ी समस्या बन जाती है."

इसी वजह से अब एक अधिक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है.

प्रोफ़ेसर हैनकॉक कहते हैं, "दुनिया भर की हर गाइडलाइन अब यह कहती है कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक सभी कारकों पर ध्यान देना ज़रूरी है."

"सीएफ़टी (कॉग्निटिव फ़क्शनल थेरेपी) मरीज़ों को थेरेपिस्ट के साथ बातचीत करने का मौक़ा देती है ताकि वे समझ सकें कि दर्द कौन-कौन सी चीज़ों की वजह से हो रहा है."

"फिर उनके लिए एक योजना बनाई जाती है, जिसमें वैकल्पिक उपाय शामिल होते हैं, ताकि वे धीरे-धीरे अपनी पसंदीदा गतिविधियां फिर से शुरू कर सकें."

"और अगर ज़रूरत हो तो मरीज़ की जीवनशैली में बदलाव करने के लिए थेरेपिस्ट उनके साथ काम कर सकते हैं."

आगे बढ़ते रहें

एक फ़िज़ियोथैरिपिस्ट फ़ैसेट-जॉएंट का मॉडल दिखा रहा है
इमेज कैप्शन, रीढ़ की हड्डी कई अलग-अलग हड्डियों जिन्हें वर्टेब्रा कहते हैं, उनसे मिलकर बनती है (सांकेतिक तस्वीर)

इस डर से कि कहीं बार-बार होने वाला दर्द और न बढ़ जाए.. कुछ मरीज़ सोचते हैं कि आराम करने से यह ठीक हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं है.

ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ़ स्पाइन सर्जन्स (बीएएसएस) के अनुसार सक्रिय रहना ही पीठ दर्द से बचने की कुंजी है. पिछले दस साल के शोध बताते हैं कि आराम करने से रिकवरी का समय और लंबा हो सकता है.

एडम सियू कहते हैं, "रीढ़ की हड्डी कई अलग-अलग हड्डियों जिन्हें कशेरुक (वर्टेब्रा) कहते हैं, उनसे मिलकर बनती है और कई हिस्सों में प्राकृतिक रूप से मुड़ी हुई होती है. यही शरीर के भार और उसकी हरकतों को संभालने में मदद करती है."

"ऊपरी 24 वर्टेब्रा लचीली होती हैं, जिन्हें पीछे की तरफ़ जोड़ (फ़ैसेट जॉइंट्स) एक-दूसरे से जोड़कर रखते हैं. हर दो वर्टेब्रा के बीच एक इंटरवर्टेब्रल डिस्क होती है."

"इस प्राकृतिक संरचना और डिस्क की झटके सोखने की क्षमता को कमज़ोर होने से बचाने के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि आप लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें - जैसे लगातार बैठे रहना, झुके रहना या खड़े रहना."

लेकिन आज की आधुनिक जीवनशैली की चीज़ें- डेस्क जॉब्स, गेमिंग, पढ़ना और ऑनलाइन कंटेंट देखना- अक्सर बहुत निष्क्रियता वाली होती हैं. ऑफ़िस कर्मचारियों के लिए स्क्रीन ब्रेक लेना या सीढ़ियां चढ़ना-उतरना संभव है, लेकिन कई नौकरियों में यह विकल्प नहीं होता.

एडम सियू कहते हैं, "अगर आप ट्रक चलाते हैं, तो ट्रैफ़िक में रुकें तो बैठे-बैठे स्ट्रेचिंग करने की कोशिश करें. निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मज़दूरों को भारी सामान उठाते समय चोट से बचने के लिए दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए कि क्या व्यायाम करें."

किचन काउंटर के पास खड़ी एक गर्भवती महिला
इमेज कैप्शन, गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में भी पीठ दर्द शुरू हो सकता है (सांकेतिक तस्वीर)

गर्भावस्था भी पीठ दर्द का कारण बन सकती है. यहां तक कि शुरुआती चरणों में भी. गर्भधारण के तुरंत बाद रिलैक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है.

यह पेल्विस के लिगामेंट्स को ढीला करता है और गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) को प्रसव की तैयारी के लिए नरम बनाता है. लेकिन यह रीढ़ की हड्डी के जोड़ों और कनेक्टिव टिश्यूज़ को भी ढीला कर सकता है, जिससे कमर में परेशानी होती है.

जैसे-जैसे भ्रूण बढ़ता है, गर्भवती महिलाओं को शरीर की मुद्रा, वज़न के संतुलन और तनाव को लेकर काफ़ी बदलावों का सामना करना पड़ता है.

यहां हम दर्द कम करने के कुछ सुझाव दे रहे हैं-

  • मुड़ते समय रीढ़ को मोड़ने से बचने के लिए पैरों से घूमकर दिशा बदलें.
  • ऐसे जूते पहनें जो वज़न को समान रूप से बांट सकें.
  • मैटरनिटी के समय इस्तेमाल होने वाले तकिए और अच्छा गद्दा पर्याप्त आराम पाने में मदद कर सकते हैं.

दर्द कम करने वाली दवाएं कब लें

एक बुजुर्ग दिखने वाली महिला की पीठ की जांच करती डॉक्टर जैसी दिख रही एक अन्य महिला
इमेज कैप्शन, कुछ लोगों का मानना है कि दर्द को दबाना उसकी असली वजह को और बिगाड़ सकता है

एडम सियू कहते हैं, "शुरुआती चरण में, सामान्य एंटी-इन्फ़्लेमेटरी दवाएं जो मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाती हैं, उन्हें लेना ठीक है - ताकि आप काम करते रह सकें. लेकिन अगर आप इन्हें हफ़्तों या महीनों तक लगातार लेते हैं और दर्द के असली कारण को नहीं सुलझाते हैं, तो आप सिर्फ़ समस्या को ढक रहे हैं."

वह कहते हैं, "दुर्भाग्य से, मैंने ऐसे क्लाइंट देखे हैं जो कई साल से दवाएं ले रहे हैं."

कुछ लोगों का मानना है कि दर्द को दबाना उसकी असली वजह को और बिगाड़ सकता है. लेकिन ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ़ स्पाइन सर्जन्स (बीएएसएस) का कहना है, "यह बिल्कुल सच नहीं है."

"शरीर में बहुत शक्तिशाली रिएक्शन्स होते हैं और साधारण दर्दनिवारक दवाएं उन्हें ख़त्म नहीं करतीं. उदाहरण के तौर पर, आप सिर्फ़ दर्द दूर करने वाली दवा लेकर उबलते पानी में हाथ नहीं डाल सकते. उसी तरह, दर्द दूर करने वाले साधारण उपाय करने के बाद आप पीठ को हिलाकर कोई नुक़सान नहीं पहुंचाएंगे."

"और अगर आपको ऐसी दवाएं लेने में कोई चिंता है, तो फ़ार्मासिस्ट से सलाह लें."

मूल लेख: बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड सर्विस, ग्लोबल जर्नलिज़म क्यूरेशन और अतिरिक्त रिपोर्टिंग, बीबीसी न्यूज़ मराठी के गणेश पोल की

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