सलीम मलिक ने जब इमरान ख़ान से नाराज़गी की वजह से भारतीय गेंदबाज़ों की थी धुनाई

    • Author, रशीद शकूर
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार
    • ........से, कराची
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर सलीम मलिक की स्टाइलिश बल्लेबाज़ी के बारे में इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डेविड गॉवर ने एक बहुत ख़ूबसूरत बात कही थी.

"ऐसा लगता था कि वह मखमल (वेलवेट) के दस्ताने पहनकर बल्लेबाज़ी करते हैं."

कलाई के इस्तेमाल से खेले गए सलीम मलिक के ख़ूबसूरत शॉट्स और उनकी कई यादगार पारियां आज भी प्रशंसकों को याद हैं. लेकिन अफ़सोस कि दुनिया उनकी शानदार बल्लेबाज़ी के बजाय उन्हें एक दूसरी वजह से ज़्यादा याद करती है.

इसीलिए मशहूर शायर शेफ़्ता का यह मिसरा याद आता है. "बदनाम अगर होंगे तो क्या नाम न होगा."

लेकिन सच यह है कि सलीम मलिक के शानदार करियर के कई पहलू आज भी लोगों की नज़रों से ओझल हैं. इनका संबंध उनकी कई बेहतरीन पारियों और यादगार प्रदर्शनों से है.

किस बात पर नाराज़ थे सलीम मलिक?

इस सवाल का जवाब जानने से पहले सलीम मलिक की उस पारी का ज़िक्र ज़रूरी है, जो शतक या दोहरा शतक न होने के बावजूद वनडे इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है.

18 फ़रवरी 1987 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में लगभग 80 हज़ार दर्शक भारत-पाकिस्तान वनडे मैच देख रहे थे.

वे कृष्णमाचारी श्रीकांत की पाकिस्तान के गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ आक्रामक बल्लेबाज़ी देख चुके थे. लेकिन उनके लिए अभी एक और शानदार पारी बाकी थी.

भारत ने 238 रन बनाए थे. जवाब में पाकिस्तान की शुरुआत अच्छी रही, क्योंकि रमीज़ राजा और 39 वर्षीय यूनुस अहमद ने 106 रन जोड़ दिए थे.

यूनुस अहमद 17 साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटे थे. लेकिन इसके बाद पाकिस्तान के विकेट लगातार गिरने लगे और एक वक़्त टीम का स्कोर 161 रन पर 5 विकेट हो गया.

असली ड्रामा इसके बाद शुरू हुआ, जब सलीम मलिक मैदान पर आए. उन्होंने भारतीय गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की. कोई भी गेंदबाज़ उन्हें रोक नहीं पाया.

कपिल देव, मदन लाल और मनिंदर सिंह जैसे गेंदबाज़ उनके निशाने पर थे. इनके ओवरों में तीन-चार चौके लगना जैसे आम बात बन गई थी.

इस पारी में सिर्फ़ एक मौक़ा ऐसा आया जब भारत सलीम मलिक का विकेट ले सकता था.

करीब 30 रन के स्कोर पर मनिंदर सिंह की गेंद पर विकेट कीपर चंद्रकांत पंडित स्टंपिंग चूक गए. चंद्रकांत पंडित इस ग़लती को कभी नहीं भूल पाए.

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, "सलीम मलिक, मनिंदर सिंह की गेंद पर ऑन ड्राइव खेलने के लिए क्रीज़ से बाहर निकल गए थे. गेंद मेरे दस्तानों से निकल गई और उन्हें वापस क्रीज़ में लौटने का मौक़ा मिल गया. आप कह सकते हैं कि हम यह मैच उसी समय हार गए थे."

अब आते हैं उस बात पर कि सलीम मलिक को आख़िर किस बात का ग़ुस्सा था. यह बात उन्हीं की ज़ुबानी सुनिए.

सलीम मलिक कहते हैं, "उस दौरे पर मेरे रन नहीं बन रहे थे. इसकी एक वजह मेरा बल्लेबाज़ी क्रम भी था, जो बहुत नीचे रखा गया था."

"एक दिन मुदस्सर नज़र ने मुझसे कहा कि कप्तान इमरान ख़ान तुम्हें दौरे से वापस भेजने के बारे में सोच रहे हैं."

"मैंने मुदस्सर नज़र से कहा कि मुझे एक बार ऊपर बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा दिलवा दें ताकि मैं कुछ करके दिखा सकूं."

"मुदस्सर ने कहा कि वह कप्तान से बात करेंगे."

"कोलकाता वनडे में इमरान ख़ान ने मुझसे कहा कि वन डाउन बल्लेबाज़ी के लिए पैड पहन लो. लेकिन मैं हैरान रह गया जब वन डाउन पर पहले जावेद मियांदाद गए, फिर अब्दुल क़ादिर और उसके बाद मंज़ूर इलाही को भेज दिया गया."

"मैं जब भी उठता, इमरान ख़ान मुझे बैठने का इशारा कर देते."

सलीम मलिक बताते हैं, "मुझे इमरान ख़ान पर बहुत ग़ुस्सा आ रहा था. वन डाउन से शुरू होकर मैं सातवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करने आया."

"मेरे सामने इमरान ख़ान भी कपिल देव की गेंद पर बोल्ड हो गए. उन्हें कभी पसंद नहीं था कि वे कपिल देव की गेंद पर आउट हों."

सलीम मलिक कहते हैं, "जब इमरान आउट होकर जा रहे थे तो मैंने उनसे पूछा, 'कप्तान, अब क्या करना है?'"

"इमरान ख़ान ने ग़ुस्से में जवाब दिया, 'जो मर्ज़ी करना है, करो."

फिर जो करना था, वह सलीम मलिक ने करके दिखाया.

उन्होंने सिर्फ़ 36 गेंदों पर नाबाद 72 रन बनाए और पाकिस्तान को आख़िरी ओवर में रोमांचक जीत दिला दी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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