तालिबान ने दी पाकिस्तान को चेतावनी, विदेश मंत्री बोले - 'आख़िर आप चाहते क्या हैं'

    • Author, बीबीसी पश्तो
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तालिबान प्रशासन के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने बीबीसी पश्तो को एक इंटरव्यू दिया है. उनका कहना है कि बार-बार कोशिश करने के बावजूद, वह ये समझने में असमर्थ रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान के साथ चल रहे संघर्ष से पाकिस्तान क्या चाहता है.

मुत्तक़ी कहते हैं, "हालात इस मुकाम तक पहुंच गए हैं, लेकिन हमारी तरफ से कोई समस्या नहीं हुई है."

पिछले साल अक्टूबर से पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान एक-दूसरे पर घातक हमले कर रहे हैं, फिर भी अफ़ग़ानिस्तान इसे एकतरफ़ा मानता है.

बीबीसी संवाददाता सैयद अब्दुल्ला निज़ामी के साथ एक इंटरव्यू में अमीर ख़ान मुत्तक़ी ने कहा, "हमने उन पर कभी हमला नहीं किया. हमारी सड़कें बंद नहीं की गईं. हमने उनके लिए कोई समस्या पैदा नहीं की."

उन्होंने कहा, "यहां तक ​​कि ट्रांजिट गुड्स को भी नहीं रोका गया. चाहे सड़कें हों, ट्रांजिट गुड्स हो, उन्होंने ही बंद किया. उन्होंने हमले भी किए हैं."

अफ़ग़ानिस्तान ने ये चेतावनी भी दी है कि अगर पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ता है तो वह संयम बरतने की अपनी नीति में बदलाव ला सकता है.

मुत्तक़ी ने पाकिस्तान पर इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का आरोप लगाया है.

मुत्तक़ी ने कहा कि पाकिस्तान से सवाल होना चाहिए उन्होंने ऐसा क्यों किया है, जबकि अफ़ग़ानिस्तान ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया.

बीते साल अक्टूबर से ही दोनों देश एक-दूसरे पर हमले करने का आरोप लगाते रहे हैं.

पाकिस्तान इस बात को मानता है ख़तरा

इन हमलों के संबंध में, पाकिस्तान का रुख़ यह है कि अफ़ग़ानिस्तान के साथ हालिया तनाव का एक प्रमुख कारण सशस्त्र समूहों के किए गए हमले हैं, जिन्हें वह अपने क्षेत्र और नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा मानता है.

इस पर मुत्तक़ी का कहना है, "पाकिस्तान की अपनी घरेलू समस्याएं हैं. वहां भी सत्ता का वितरण असंतुलित है. कोई नहीं कह सकता कि उनकी वास्तविक समस्याएं और मजबूरियां क्या हैं."

पाकिस्तान की ओर से लगातार ये दावा किया जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान की धरती उसके दुश्मनों की सबसे सुरक्षित पनाहगाह है.

पाकिस्तान के इस दावे पर मुत्तक़ी ने कहा, "अगर बात बलूचों की है, तो बलूच 78 सालों से सरकार (पाकिस्तान) का विरोध कर रहे हैं. अगर बात तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की है, तो टीटीपी 20 सालों से ज़्यादा समय से पाकिस्तान के साथ युद्ध में है."

"और अगर बात डूरंड लाइन की है, तो हमने किसी भी पिछली अफ़ग़ान सरकार से ज़्यादा इस लाइन पर बेहतर नियंत्रण रखने की कोशिश की है."

बीबीसी ने पूछा, "क्या अपने प्रतिद्वंदी की मांगों का पता लगाना, यह समझना कि वे क्या चाहते हैं, आपका काम नहीं है?"

तालिबान सरकार के विदेश मंत्री ने कहा, "हमारी तरफ से सभी आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं. हमारी तरफ से कोई समस्या नहीं है. उन्हें क्या समस्या है? कभी-कभी किसी के दिल और दिमाग में झांककर यह देखना असंभव होता है कि वे क्या चाहते हैं."

अमीर ख़ान मुत्तक़ी के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार को पाकिस्तानी अधिकारियों और सरकार समर्थक मीडिया से पहले से कहीं अधिक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

लगातार तनाव कायम

हालांकि तालिबान सरकार बातचीत और संयम का रुख़ अपना रही है.

लेकिन उसने यह भी संकेत दिया है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो वह अपनी नीति पर पुनर्विचार कर सकती है.

तालिबान सरकार के रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने हाल ही में अफ़ग़ान राज्य टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रहती है, तो सरकार को अपनी नीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है.

लेकिन इनके सबके बीच यह बात साफ़ है अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष ने डूरंड लाइन के दोनों ओर रहने वाले उन लोगों के दर्द को बढ़ा दिया है, जिनके व्यापार और अन्य आजीविका बाधित हुई है.

अगस्त 2021 में अफ़ग़ान तालिबान के सत्ता पर क़ब्ज़ा करने के बाद से अब तक पाकिस्तान ने काबुल और दूसरे क्षेत्रों में कई हवाई हमले किए हैं और इस वजह से सीमा पर झड़पें भी हुई हैं.

पाकिस्तान सरकार लगातार यह आरोप लगाती रही है कि प्रतिबंधित टीटीपी को अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार का समर्थन मिला हुआ है.

उधर, अफ़ग़ान तालिबान इसका खंडन करते हैं और इसे पाकिस्तान का आंतरिक मुद्दा बताते हैं और इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पाकिस्तान अपने देश की सुरक्षा बेहतर करे.

इस हालिया तनाव ने पिछले साल दोनों देशों के बीच होने वाली सरहदी झड़पों और उसके बाद क़तर और तुर्की की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के बाद पहले से ही तनावग्रस्त संबंधों को एक बार फिर तनावपूर्ण कर दिया है.

अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान के प्रतिद्वंद्वियों से बढ़ा रहा है दोस्ती

इस साल जब अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा और सैकड़ों नागरिक मारे गए, तो कई देशों ने संघर्ष रोकने के लिए हस्तक्षेप किया.

सैकड़ों नागरिकों की मौत के बाद चीन ने वार्ता की मेजबानी की.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, क़तर, सऊदी अरब, ओमान, ईरान, तुर्की, उज़्बेकिस्तान और मलेशिया भी युद्ध को रोकने के प्रयासों में शामिल थे.

इस बीच, भारत, ने तालिबान सरकार के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं.

पिछले साल मुत्तक़ी ने भारत का दौरा किया था. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ लगाए गए कुछ प्रतिबंधों से छूट हासिल करने में कामयाबी हासिल की थी.

जून में, संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि ने सुझाव दिया था कि तालिबान के दर्जनों सदस्यों पर लगाए गए प्रतिबंधों, जैसे यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति ज़ब्ती और हथियार प्रतिबंध, की समीक्षा जरूरी हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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