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कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम बजने के दौरान 'असहजता' के सवाल पर जयराम रमेश ने दिया जवाब
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित लाल क़िले के समारोह में शामिल नहीं हुए.
पिछली बार भी दोनों नेता इसमें शामिल नहीं हुए थे. बीजेपी ने इसे स्वतंत्रता दिवस का अपमान बताया है.
इसके जवाब में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "उन्हें हर बात में अपमान नज़र आता है. जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई या स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया, उन्हें बुरा लगता है."
उधर, दिल्ली स्थित कांग्रेस हेडक्वार्टर में आयोजित ध्वाजारोहण कार्यक्रम में राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम' पूरा बजाया गया. इस दौरान एक अंतराल के बाद कांग्रेस के बड़े नेता 'असहज' दिखे.
दरअसल अब तक वंदे मांतरम के दो छंद ही गाए जाते थे. लेकिन मॉनसून सत्र में सरकार ने 'वंदे मातरम' के पूर्ण संस्करण को राष्ट्रगान के समान क़ानूनी संरक्षण दिया है.
1937 में जब कांग्रेस, जिसका नेतृत्व उस समय जवाहरलाल नेहरू कर रहे थे, ने 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाने को लेकर रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह ली थी, तो टैगोर ने कहा था कि एकेश्वरवाद में विश्वास रखने वाले लोग, जैसे मुसलमान और ब्रह्म समाज के अनुयायी, इसके बाद के पदों पर आपत्ति कर सकते हैं, क्योंकि उनमें देवी दुर्गा का आह्वान किया गया है.
उन्होंने नेहरू को सलाह दी थी कि राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल पहले दो पदों को रखा जाए, क्योंकि उनमें मातृभूमि की सुंदरता का वर्णन है.
इस बात का उल्लेख पत्रकार और लेखक नीलांजन मुखोपाध्यान ने फ्रंटलाइन में 14 अगस्त को प्रकाशित हुए अपने एक लेख में किया है.
नीलांजन मुखोपाध्याय ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''सिसिर कुमार दास की संपादित किताब 'द इंग्लिश राइटिंग्स ऑफ रविंद्रनाथ टैगोर' में इसका स्पष्ट रूप से ज़िक्र है.''
अब तक कांग्रेस भी इसी नीति को मानती थी.
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम चलने का वीडियो रीपोस्ट करते हुए लिखा, "मां-बेटे और राष्ट्रीय अध्यक्ष, लगता है कि 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण बजाए जाने से परेशान हैं. कुछ मानसिकताएं कभी नहीं बदलतीं."
उधर, इस मुद्दे पर पत्रकारों के सवालों को जवाब देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "अक्तूबर 1937 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में गांधीजी समेत सभी प्रमुख नेताओं ने तय किया था कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाया जाएगा. यह राष्ट्रीय गीत है."
लेकिन वंदे मातरम को दो ही छंद को इस रूप में स्वीकार किया गया था.
कांग्रेस हेडक्वार्टर में क्या हुआ?
कांग्रेस हेडक्वार्टर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में सीपीपी यानी कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी चेयरपर्सन सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे.
जब राष्ट्र गीत बंदे मातरम बज रहा था तभी कुछ देर बाद कांग्रेस नेताओं में असहजता देखी गई. वंदे मातरम के दो छंद बजने तक सब कुछ ठीक था लेकिन बाद में असहजता साफ़ दिख रही है.
कांग्रेस नेता शुरू के क़रीब 55 सेकेंड तक राष्ट्र गीत को गा रहे थे लेकिन इसके बाद भी जब यह बजता रहा तो राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी असहज दिखाई दिए. राष्ट्र गीत बजता रहा लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता चुप हो गए.
इस कार्यक्रम के वीडियो में दिखाई दे रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी के बीच कुछ बात होती है.
सोनिया गांधी थोड़ी असहज दिखीं और मल्लिकार्जुन खड़गे से उनकी कुछ बात हुई. इसके बाद एक कांग्रेस कार्यकर्ता को बुलाकर दोनों नेताओं ने कुछ कहा.
इस बीच सोनिया गांधी सिर हिलाते हुए दिखीं. राष्ट्र गीत क़रीब तीन मिनट तक चला, इसके बाद ध्वज फहराया गया और फिर झंडा गीत विजयी 'विश्व तिरंगा प्यारा' गाया गया.
वंदे मातरम के डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने पर लाल क़िले के आधिकारिक समारोह में इस बार 80 साल की परंपरा में पहली बार नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के लिखे राष्ट्रगान 'जन गण मन' से पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' गाया गया.
विवाद पर क्या बोले जयराम रमेश
अखिल भारतीय कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम गाने के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित असहजता को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश से पत्रकारों ने सवाल किया.
इस पर जयराम रमेश ने कहा, ''पूरा वंदे मातरम गाया गया. इसमें कोई विवाद का सवाल नहीं उठता. कोई रोकने का प्रयास नहीं था. क्योंकि लंबे समय से कांग्रेस अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन खड़गे) खड़े थे, सोनिया जी कह रही थीं कि उनके लिए कुर्सी लाकर रख दो. बस."
पत्रकारों ने पूछा कि इसे केरल में नहीं गाया जा रहा है, इस सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में यह पूरा गीत गाया गया.
ऐसा लगता है कि समारोह में वंदे मातरम को लेकर स्पष्टता नहीं थी. दूसरा, जयराम रमेश कह रहे हैं कि इसे पूरा गाने में कोई ग़लती नहीं है तो इस मुद्दे पर कांग्रेस का वास्तविक रुख़ क्या है?
यह घटना उनके पुराने घोषित रुख़ के उलट है. पहले वे हमेशा कहते आए हैं कि केवल पहले दो छंद गाए जाने चाहिए. संसद में भी कांग्रेस का यही स्टैंड रहा है. यह घटना पार्टी के लिए थोड़ी असहज स्थिति पैदा कर सकती है.
केरल में 'वंदे मातरम' के गाने को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य के स्कूलों को 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने और 'जन गण मन' गाने के लिए कहा गया था.
हालांकि, सामान्य शिक्षा विभाग की ओर से जारी ताज़ा दिशानिर्देशों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का कोई उल्लेख नहीं था.
लोक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक़, संस्थानों के प्रमुखों को 15 अगस्त को सुबह 9 बजे या उसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराना होगा और इसके बाद राष्ट्रगान गाया जाएगा. दिशानिर्देशों में केवल 'जन गण मन' का उल्लेख है और स्कूलों से 'वंदे मातरम' गाने के लिए नहीं कहा गया था.
ये निर्देश प्रोटोकॉल अधिकारी की ओर से जारी एक सर्कुलर के आधार पर दिए गए थे.
यह निर्देश ऐसे समय आया था जब 'वंदे मातरम्' के पूरे संस्करण गाने को लेकर केंद्र के निर्देशों पर राजनीतिक विवाद चल रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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