पनबिजली बनाने की इस तकनीक से क्या कुछ बदलेगा

एक बड़ा पारंपरिक बांध
    • Author, एंड्रीन बर्नहार्ड
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
  • प्रकाशित

तरक़्क़ी के साथ बिजली की ज़रूरत बढ़ती जाती है. इंसान तरह-तरह के संसाधनों से बिजली बना रहा है. कोयला, गैस, एटॉमिक और पानी से बिजली बनाई जा रही है.

इनमें से पानी एक ऐसा स्रोत है, जिससे पर्यावरण को बहुत मामूली नुक़सान के साथ बिजली हासिल की जा सकती है. इसके लिए नदियों पर बांध बनाने पड़ते हैं. और पानी को रोक कर तेज़ी से छोड़ा जाता है. इससे चलने वाली टर्बाइन बिजली पैदा करती हैं.

पिछले साल पूरी दुनिया में पानी से 1308 गीगावाट बिजली बनाई जा रही थी. ये उतनी ही बिजली है, जितनी रेसिंग के 13 लाख घोड़े पैदा कर सकते हैं या 2000 जंगी जहाज़ ख़र्च करते हैं.

पानी से पैदा होने वाली बिजली सस्ती होती है. इसे बनाने में कार्बन डाई ऑक्साइड नहीं निकलती. पनबिजली को आसानी से जमा किया जा सकता है और दूर-दूर तक पहुंचाया जा सकता है.

लेकिन, जब हम पानी से बिजली बनाने के लिए बांध बनाते हैं, तो इससे प्रकृति को नुक़सान उठाना पड़ता है. पानी में रहने वाले जीव, जैसे कि मछलियां, टर्बाइन की ब्लेड से टकराकर मर जाते हैं. बांध में जमा पानी स्थिर होता है, वो लगातार न बहने की वजह से बहुत से जीवों का दम घोंट देता है. उनमें ख़तरनाक काई पैदा हो जाती है. जो मछलियों, शेलफ़िश, परिंदों और इंसानों के लिए नुक़सानदेह होती है.

अब इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है. जिससे पनबिजली को और इको-फ्रेंडली बनाया जा सके. अमरीका के नटेल एनर्जी, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स की निवेश कंपनी ब्रेकथ्रू एनर्जी वेंचर्स के साथ मिल कर ऐसी टर्बाइन बना रही है, जो पानी में मौजूद जीवों को कम से कम नुक़सान पहुंचाएं.

बांध

तकनीक में किस तरह के बदलाव

नटेल एनर्जी के सह संस्थापक एब श्नाइडर कहते हैं कि, 'हमारी कोशिश ये है कि पर्यावरण और जीवों को कम से कम नुक़सान पहुंचा कर पनबिजली बना सकें. हमने ऐसी टर्बाइन बनाई है, जो मछलियों के लिए सुरक्षित है. हम इसके लिए नई तकनीक, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट की मदद ले रहे हैं, ताकि नए हाइड्रोपावर सिस्टम को ईजाद कर सकें.'

पारंपरिक टर्बाइन के डैने बहुत पतले होते हैं, जिनसे गुज़र रहे पानी में मौजूद मछलियां और दूसरे जीव कट-मर जाते हैं. अब नटेल एनर्जी ने छोटे और मोटे डैनों वाली टर्बाइन बनाई है. साथ ही इसके डैने मुड़े हुए होते हैं. जिससे पानी के साथ इस टर्बाइन से मछलियां भी सुरक्षित गुज़र जाती हैं.

एब श्नाइडर ने नटेल एनर्जी की स्थापना, अपनी बहन गिया श्नाइडर के साथ की थी. गिया श्नाइडर एक इंजीनियर हैं. उन्होंने पुराने पड़ते बांधों की कमियों का अध्ययन करके ये नई टर्बाइन और नए युग के पनबिजली प्रोजेक्ट ईजाद करने की ठानी. उन्होंने कहा कि अगर बांध बनाए जाते हैं, तो किसी एक इलाक़े में लंबे समय तक पानी न बरसने से वो बांध बेकार हो जाते हैं और ज़्यादा बारिश होने पर बांध ओवरफ्लो हो जाते हैं.

गिया कहती हैं, ''जलवायु परिवर्तन का मतलब है पानी की उपलब्धता में बदलाव. अब हम मछलियों के लिए सुरक्षित टर्बाइन, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट की मदद से पर्यावरण के लिए सुरक्षित पनबिजली प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं.''

एक जलीय जीव

इसके लिए नटेल की टर्बाइनों को सैटेलाइट से जोड़ा जाता है. जिससे कि पनबिजली प्रोजेक्ट चलाने वालों को ये पता चलता रहता है कि जिन इलाक़ों का पानी बांध तक आ रहा है, वहां हरियाली है या सूखा और इसी हिसाब से टर्बाइनें चलाई जाती हैं. बर्फ़ पिघलने और सूखी ज़मीन की जानकारी देने के लिए भी तकनीक की मदद ली जा रही है. जिससे पानी की उपलब्धता का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सके.

अमरीका की एल्डेन रिसर्च लैब के स्टीफेन अमारल कहते हैं, ''ये परिकल्पना पनबिजली योजनाओं के भविष्य के लिए बहुत अहम है क्योंकि ये मौजूदा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के मुक़ाबले, पर्यावरण के ज़्यादा अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराते हैं.''

एल्डेन लैब भी कम नुकीले और तीखे ब्लेड वाली टर्बाइन विकसित कर रही है. पिछले साल इसकी टर्बाइन भी प्रयोग में सफल रही थी.

वहीं नटेल एनर्जी का मक़सद, विशाल बांधों की जगह छोटे-छोटे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बनाना है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा इलाक़े में पानी का इस्तेमाल हो सके और बांध के कारण, बड़े इलाक़े की वॉटर टेबल को भी बेहतर किया जा सके. यानी ज़मीन के भीतर जमा पानी का स्तर बढ़ाया जा सके. जब बांध के लिए बड़े इलाक़े का पानी रोका जाता है, तो भूगर्भ जल का स्तर बढ़ता है. अगर कभी सूखा पड़ा, तो ये पानी भी लोगों के काम आता है.

टर्बाइन

विकासशील देशों के लिए फायदेमंद

अब ये आपस में जुड़ी परियोजनाएं, नदी के संरक्षण का भी काम करेंगी. ताकि मछलियों और अन्य वन्य जीवों की प्रजातियों को बचाया जा सके.

गिया श्नाइडर कहती हैं कि, 'हमारी पनबिजली योजनाएं विकासशील देशों के लिए काफ़ी मुफ़ीद हैं. जहां पर किसी विशाल बांध की जगह छोटे-छोटे बांध बनाकर उन्हें आपस में कनेक्ट करके एक व्यापक नेटवर्क बनाया जाए.'

चूंकि, पानी से पैदा होने वाली बिजली को तुरंत ग्रिड तक पहुंचाया जा सकता है. तो, अगर ग्रिड फेल होती है, तो ये पनबिजली योजनाएं बिजली की अनवरत सप्लाई में भी कारगर साबित होती हैं.

नटेल एनर्जी ने अमरीका में अपना एक प्रोजेक्ट पिछले साल ही शुरू किया है. जबकि, एक और पावर प्लांट इस साल के आख़िर तक काम करना शुरू कर देगा.

अब जबकि दुनिया, बिना कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली के स्रोत तलाश रही है, तो नटेल एनर्जी जैसे प्रोजेक्ट इस काम में काफ़ी मददगार साबित होंगे. इससे नदी और उस पर पलने वाले जीव भी सुरक्षित होंगे और इंसान की बिजली की ज़रूरत भी पूरी होगी.

(बीबीसी फ़्यूचर पर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी ट्रैवल को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)