मैच के दौरान वीनस की ओर देख ही नहीं पाती: सरीना

सरीना विलियम्स
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साल 1992 में 'ट्रांस वर्ल्ड स्पोर्ट' ने सरीना विलियम्स और वीनस विनस विलियम्स का प्रोफ़ाइल तैयार किया था.

उस वक़्त उनकी उम्र 11 साल और 12 साल थी. दोनों ही बहनें उस वक़्त एक अकेडमी में ट्रेनिंग ले रही थीं और उनमें बहुत ज़्यादा क्षमता नज़र आ रही थी.

उन दोनों से पूछा गया कि अगर वो टेनिस प्लेयर नहीं होतीं तो बड़ी होकर क्या बनना पसंद करतीं?

इस पर सरीना ने कहा कि शायद वो पशुचिकित्सक बनतीं, जबकि वीनस ने आर्कियोलॉजी में अपना भविष्य तलाश की इच्छा जताई.

जब सरीना से पूछा गया कि वो किसके जैसी टेनिस प्लेयर बनना पसंद करेंगी तो उन्होंने कहा था, "मैं ऐसी प्लेयर बनना चाहती हूँ, जिसे लोग पसंद करें".

फ़ेडरर

सरीना विलियम्स ने ग्रैंड स्लैम मुक़ाबलों में सबसे ज़्यादा मैच जीतने के मामले में स्विटज़रलैंड के रोजर फ़ेडरर को पीछे छोड़ दिया है.

सरीना ने यूएस ओपन में कज़ाख़स्तान की यारोस्लावा श्वेदोव को 6-2, 6-3 को हराकर ग्रैंड स्लैम मुक़ाबलों में रिकार्ड 308 वीं जीत दर्ज़ की.

सरीना के बारे में कुछ ख़ास और दिलचस्प बातें जानिए-

टेनिस की प्रभावशाली खिलाड़ी सरीना विलियम्स को अभी और लंबा खेलना है. सफलता और लंबे खेल जीवन के लिहाज से किसी भी खेल में सरीना विलियम्स की बराबरी करने वाले बहुत कम एथलीट होते हैं.

सरीना विलियम्स

सरीना ने ग्रैंड स्लैम में अपने खेल का आगाज़ महज़ 16 साल की उम्र में 1998 में ऑस्ट्रेलियन ओपन से किया था. 34 साल तक की उम्र में सर्वोच्च पायदान पर रहने वाली वो एकमात्र महिला टेनिस खिलाड़ी हैं.

इस दौरान उनकी सफलता किसी के भी होश उड़ा सकती है. उन्होंने सिंगल मुक़ाबलों में 22 ग्रैंड स्लैम, चार ओलंपिक गोल्ड मेडल, 80 मिलियन अमरीकी डॉलर की इनाम राशि जीती है और कुल मिलाकर 770 मैच जीते हैं, जबकि महज़ 128 मैचों में हार का सामना किया है.

क्या वो ख़ुद को अब तक की सबसे महान महिला एथलीटों में से एक मानती हैं?

सरीना कहती हैं, "मैं ख़ुद को अब तक के सबसे महान एथलीटों में से एक मानती हूं."

सरीना ने पहली बार तीन साल की उम्र में टेनिस रैकेट पकड़ा था. उन्होंने कॉम्पटॉन के टेनिस कोर्ट में कठिन अभ्यास किया. कैलिफ़ॉर्निया का यह शहर उपद्रवी गैंग की वजह से कुख्यात है.

सरीना विलियम्स

उनके पिता रिचर्ड ने पूरी तरह सोच समझकर अपने बच्चों को खेल के मैदान में आगे बढ़ाया.

कॉम्पटॉन काउंसिल की एक पूर्व महिला पैट्रिका प्रतिनिधि मूरी ने सीएनएन से कहा है, "गैंग के लोगों ने सरीना और उनकी बहन वीनस की सुरक्षा का प्रस्ताव दिया था और कहा था कि वो टेनिस कोर्ट को घेर कर रखेंगे. वो चाहते थे कि दोनों लड़कियां आगे बढ़ें".

पहले ही ग्रैंड स्लैम में सरीना का मुक़ाबला अपनी बहन वीनस से हुआ और इसमें सरीना की हार हुई.

अपनी बहन के साथ मुक़ाबले पर उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा था, "मेरे पास धीरे धीरे आगे बढ़ने का वक़्त नहीं है. हम दोनों ही नंबर वन बनना चाहती हैं और मुझे लगता है कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे लेकर कौन ज़्यादा गंभीर है."

सरीना विलियम्स

उसके बाद से दोनों बहनों के बीच कई बार मुक़ाबला हुआ और सरीना ने अपने पिता की भविष्यवाणी को सच कर दिया कि वो ज़्यादा बेहतर खिलाड़ी बनेंगीं. सरीना ने लगातार चार ग्रैंड स्लैम फ़ाइनल में वीनस को पराजित किया और उन्हें 'सरीना स्लैम' कहा जाने लगा.

लेकिन इस जीत के बाद वो साफ तौर पर बेचैन नज़र आ रही थीं. उनका कहना था, "मैं कोर्ट में वीनस की तरफ देखती भी नहीं हूं. मैं नहीं देख सकती. मैं जीत रही हूं, मैं वीनस के लिए दुखी हूं."

क्या महिला टेनिस खिलाड़ियों को भी पुरुषों के बराबर पुरस्कार राशि मिलनी चाहिए, जैसा कि इस साल की शुरुआत में संभव हो पाया?

सरीना साफ तौर पर कहती हैं, "टेनिस में बहुत ज़्यादा सुधार हुआ है, हमें उसे बनाए रखना चाहिए और इन सुधारों को महिला खेल प्रतियोगिताओं तक ले जाना चाहिए. "

सरीना विलियम्स

1980 के दशक में अपनी मां के यहूदी धर्म अपनाने के बाद सरीना भी बाक़ी बहनों की तरह ईश्वर पर यकीन करती हैं.

वो अक्सर मैच के बाद यहूदी भगवान 'जहोवा' का शुक्रिया अदा करती हैं. रिपोर्टों के मुताबिक़ धर्म का प्रचार करने के लिए घर घर तक किताबें बांटने जाती हैं, जैसा कि इस धर्म को मानने वालों के लिए ज़रूरी होता है.

साल 2009 के अमरीकी ओपन के दौरान उनके लिए अपशब्दों के इस्तेमाल की एक घटना हुई थी. उसके बाद उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, "जिस चीज़ ने मुझे सबसे ज़्यादा परेशान किया वो है मेरा धर्म, जिसका मैं प्रतिनिधित्व कर रही थी."

2009 में सरीना और वीनस ने अमरीकी फुटबॉल टीम मियामी डॉल्फ़िन्स में एक छोटा सा हिस्सा ख़रीदा और उन्हें इसका छोटा सा मालिकाना हक़ मिला.

सरीना और वीनस

इस तरह से दोनों बहनें पहली अमरीकी-अफ़्रीकी बनीं जिनके पास नेशनल फ़ुटबॉल लीग में हिस्सेदारी हो.

अपनी सफलताओं के बावज़ूद भी उन पर कई बार हमले हुए हैं. अक्सर इसमें नस्ल और लिंग के आधार पर भेदभाव भी शामिल रहा है. लेकिन 2015 में गुड मॉर्निंग अमरीका को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "मैं पूरी ज़िंदगी इसी तरह रहूंगी, मैं ख़ुद को प्यार करती हूं और मैं जैसी दिखती हूं वह मुझे पसंद है."

उन्होंने कहा, "मैं एक संपूर्ण महिला हूं और यह बात मुझे पसंद है. मैं मज़बूत और ताक़तवर हूं, मैं खुबसूरत भी हूं. और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है."

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