विलुप्त हो रही है जंगली मधुमक्खियां

जंगली मधुमक्खी
    • Author, हेलेन ब्रिग्स
    • पदनाम, बीबीसी पर्यावरण संवाददाता
  • प्रकाशित

यूरोप में पाई जानी वाली जंगली मधुमक्खियों की करीब हर 10 में से एक प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई है.

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ़ नेचर (आईयूसीएन) की ओर से तैयार किए यूरोपियन रेड लिस्ट में पाया गया है कि मधुमक्खियों की 2000 प्रजातियों में से 9.2 फ़ीसदी प्रजाति विलुप्त होने के ख़तरे से जूझ रही है.

ख़तरा

आने वाले वक्त में और पांच फ़ीसदी प्रजातियों के ऊपर विलुप्त होने का ख़तरा मंडराने वाला है.

यह ख़तरा अंधाधुंध खेती, कीटनाशकों के उपयोग, शहरी विकास और जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हुआ है.

आईयूसीएन के ग्लोबल स्पेसीज प्रोग्राम के जीन क्रिस्टोफ़ वेई का कहना है कि यूरोप में जंगली मधुमक्खियों पर अब तक हुए मूल्यांकन में यह सबसे बेहतर थी लेकिन विशेषज्ञता और संसाधनों की कमी की वजह से यह जानकारी अधूरी है.

उन्होंने बताया, " मधुमक्खियां फसलों के परागण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है. इसलिए हमें भविष्य में इससे संबंधित और शोधों की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि इनकी घटती तदाद को रोकी जा सकें. "

चुकानी पड़ेगी क़ीमत

अध्ययन में इस बात का भी उल्लेख है कि पर्यावरण पर पड़ने वाले कई तरह के दबावों की वजह से भी छत्ते और जंगलों में मधुमक्खियों की तदाद कम हो रही है.

कीटों की मदद से होने वाले परागण हर साल यूरोपियन यूनियन को 15 खरब यूरो का लाभ होता है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ परागण में मदद पहुंचाने वाली कीटों की तदाद बढ़ाने से वन्य जीवन, ग्रामीण इलाकों और खाद्य उत्पादकों को लाभ मिलेगा.

पर्यावरण, समुद्री मामलों और मत्स्य पालन के लिए यूरोपीयन यूनियन के कमीश्नर कैरमीनु वेला का कहना है, "हमारे जीवन की गुणवत्ता और हमारा भविष्य प्रकृति से मिलने वाली मुफ्त की चीजों पर निर्भर है. "

उनका कहना है, " अगर हम समय रहते जंगली मधुमक्खियों की घटती आबादी पर ध्यान नहीं दिए तो हमें इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी. "

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