डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव को ठुकराया, क्या कहा?

अराग़ची के अनुसार, अगर अमेरिका इस योजना की शर्तों को मान ले और उन पर अमल करे, तो सात दिनों के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट फिर से खोल दिया जाएगा.

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रौनक भैड़ा, अरशद मिसाल

  1. ट्रंप के सामने जिनपिंग ने ऐसा क्या कहा, जिसे सुनकर ईरान ने जताई खुशी

    शी जिनपिंग
    इमेज कैप्शन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान और अमेरिका से जून में हुए समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है. ईरान ने चीन के इस रुख़ का स्वागत किया है.

    ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान मतभेदों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाने के पक्ष में है. उन्होंने जून समझौते पर लौटने और पहले से तय वादों को पूरा करने पर जोर दिया.

    पेज़ेश्कियान ने शुक्रवार देर रात को एक्स पर लिखा, "मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस समर्थन की सराहना करता हूँ, जिसमें उन्होंने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर वापस लौटने और बातचीत के ज़रिए मतभेदों को दूर करने की बात कही है."

    "ईरान भी इसी सोच का समर्थन करता है और इस बात पर ज़ोर देता है कि उस समझौते पर लौटा जाए. पहले से तय वादों को पूरा किया जाए और ठोस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी माहौल बनाया जाए."

    पेज़ेश्कियान ने लिखा, "ईरान और चीन राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने, तनाव कम करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं. यह आगे दोनों देशों के बीच सहयोग को मज़बूत करने में मदद करेगा."

    गौरतलब है कि शी जिनपिंग ने शांति स्थापित करने वाली बात अमेरिका के वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में आयोजित एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक के दौरान कही.

  2. 'ज्ञानेश कुमार को जनता भगवान मानती है, उन्हें पद्म भूषण मिलना चाहिए', पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष की मांग

    ज्ञानेश कुमार
    इमेज कैप्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फ़ाइल फ़ोटो)

    पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि यहां की जनता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'भगवान' मानती है. भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार के लिए पद्म भूषण की मांग भी की है.

    समिक भट्टाचार्य का बयान ऐसे समय में आया है, जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर विपक्ष सवाल उठाया रहा है.

    समिक भट्टाचार्य ने शुक्रवार को कहा, "पूरा देश जानता है कि पश्चिम बंगाल में क्या हुआ है और क्या होने वाला है. पश्चिम बंगाल में चुनाव कैसा होता है ये सभी जानते हैं. आज पश्चिम बंगाल की जनता ज्ञानेश कुमार को भगवान मानती है जिन्होंने 70 साल के इतिहास में ऐसा भयमुक्त चुनाव करवाया. लोगों का वोट देने का अधिकार जिसने दिलवाया, वह ज्ञानेश कुमार हैं."

    उन्होंने कहा, "ज्ञानेश कुमार को कम से कम पद्म भूषण देना चाहिए. पूरे पश्चिम बंगाल की जनता ख़ुश है. कोई हत्या की घटना नहीं हुई, लोगों को वोट डालने दिया गया. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल जैसे सीमा वाले राज्य में ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने की पहल की. पश्चिम बंगाल के लोगों ने शायद ही कभी ऐसा चुनाव देखा हो. पश्चिम बंगाल की जनता का आशीर्वाद ज्ञानेश कुमार के साथ है."

    समिक भट्टाचार्य के इस बयान पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए.

    सुखदेव भगत ने कहा, "अगर राहुल गांधी चुनाव आयोग से जवाब मांगते हैं, ज़िम्मेदारी तय करने की बातें होती हैं तो बीजेपी सामने आ जाती है. बीजेपी उन्हें (ज्ञानेश कुमार) पद्म भूषण देने की बात करती है. उन्हें पद्म भूषण क्यों दिया जाना चाहिए? इसलिए कि उन्होंने वोट चोरी की, उन्होंने हमारे 13 करोड़ मतदाताओं का नाम काटा और बीजेपी के पक्ष में सारे काम किए."

    उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग को संविधान ने स्वतंत्र और निष्पक्ष रखा है लेकिन ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को बीजेपी का सरकारी कार्यालय बना दिया. मैं कल सूची देख रहा था जिसमें बीजेपी ने अपने प्रभारी नियुक्त किए, मैं खोज रहा था कि ज्ञानेश कुमार को कहां का प्रभारी बनाया गया है."

    गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग करते हुए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में पार्टी ने 2 अक्टूबर से इस मामले को लेकर आंदोलन शुरू करने की बात कही है.

  3. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कश्मीर पर जो कहा, उस पर भारत ने दिया ये जवाब

    पेटल गहलोत और शहबाज़ शरीफ़
    इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फ़र्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत पाकिस्तान के पीएम के संबोधन का जवाब दिया

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के संबोधन पर भारत ने राइट तो रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए जवाब दिया है.

    संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फ़र्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान 'आतंकवाद' को बढ़ावा देता है.

    उन्होंने कहा, "हमने जो बातें सुनीं, वे उन लोगों की तरफ़ से आईं जिनका लंबे समय से भेदभाव और नफ़रत का रिकॉर्ड रहा है. वे दिन में सुरक्षा की बात करने का दावा करते हैं, लेकिन रात में आतंकवाद करते हैं. इसी सभा में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर उस शासन की तरफ़ से बातें कही गईं, जिसकी सबसे बड़ी ताक़त ईशनिंदा के क़ानून हैं."

    "दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है. कोई भी धार्मिक बातें दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं. जम्मू-कश्मीर का भी ज़िक्र किया गया. यह मेरे देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा. लेकिन अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है, तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए. वहाँ लंबे समय से हो रही बेवजह हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के बारे में पूछा जाना चाहिए."

    पेटल गहलोत ने कहा, "मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही सीमा पार आतंकवाद की नीति है. हमने पिछले साल दिखाया था कि आतंकवादियों के पास भागने और छिपने की कोई जगह नहीं होगी. आतंकवाद से ख़ुद की रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल आगे भी किया जाता रहेगा."

    उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की ओर से हो रहे आतंकवाद के गंभीर नतीजे होंगे. हमें भरोसा है कि यह सभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में जैसा पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने झूठ बोलकर दिखाया है."

    पेटल ने कहा, "हर साल झूठ दोहराने से वह सच नहीं हो जाता. पाकिस्तान का आतंकवाद, धोखा और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए फ़ायदेमंद होगा."

    गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि वो सिंधु नदी के पानी को रोकने के किसी भी भारतीय प्रयास को 'युद्ध की कार्रवाई' (एक्ट ऑफ़ वॉर) मानेंगे.

    साथ ही उन्होंने कहा, "कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन (गले की नस) है और हमेशा रहेगा."

  4. चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे सवालों पर बीजेपी के सहयोगी दलों ने दी ये प्रतिक्रिया

    चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा
    इमेज कैप्शन, एनडीए के कुछ दलों ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष तो इसको लेकर कड़ा रुख अपना ही रहा है, साथ ही एनडीए के कुछ दलों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है.

    केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग को अपना पक्ष मज़बूती से रखना चाहिए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे.

    उन्होंने कहा, "अगर चुनाव आयोग के ऊपर ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं तो मैं मानता हूं कि ये ज़िम्मेदारी भी चुनाव आयोग की है कि वो अपने पक्ष में अपनी बातों को मज़बूती से रखें. विपक्ष क्या बोलता है उससे मुझे फ़र्क नहीं पड़ता है क्योंकि विपक्ष का काम राजनीति करना है... चुनाव आयोग को जनता का विश्वास बना रहे क्योंकि अगर चुनावी प्रक्रिया के ऊपर ही जनता का संदेह खड़ा हो जाएगा तो ये ग़लत है ऐसे में चुनाव आयोग अपनी बातों को मज़बूती से रखना चाहिए. ताकि जनता के मन में कोई संदेह न आए."

    बीजेपी के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से तुरंत स्पष्टीकरण की मांग की है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "एसआईआर से संबंधित विवाद पर जनता में काफ़ी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है. विषय को एड्रेस करने की ज़रूरत है. कन्फ़्यूज़न दूर करने हेतु चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए."

    वहीं, जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग पर दोष मढ़ रहा है.

    जेडीयू नेता राजीव रंजन ने कहा, "राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को पता था कि उनकी हार तय है. उन्होंने बार-बार चुनाव आयोग पर दोष मढ़ने की कोशिश की है. जब भारत के चुनाव आयोग ने एसआईआर में अनियमितताओं के कथित आरोपों को लेकर सफ़ाई मांगी और पूछा कि अगर इतने सारे आरोप थे तो कोई आधिकारिक शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई गई. किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान नहीं हुआ और न ही कोई हिंसा हुई. वोटिंग पूरी तरह पारदर्शी थी और बिहार में जनादेश एनडीए को मिला. इसीलिए वे ऐसे धरना प्रदर्शनों के ज़रिए दबाव बनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिलेगी."

    तेलुगु देशम पार्टी के नेता लावू श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा कि आंध्र प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई, लेकिन इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

    लावू ने डेक्कन हेराल्ड से कहा, "निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे हमारे लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी दी गई है. इसलिए, जब भी कोई सवाल उठाता है, तो उचित जवाब देना और पारदर्शिता बनाए रखने पर ही संस्था के प्रति लोगों का भरोसा मज़बूत होगा."

    'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न यानी एसआईआर अभियान के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों को कई फ़ैसलों की जानकारी नहीं दी गई थी. दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने इन फ़ैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी.

    रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए गए फैसलों पर 14 बार लिखित रूप से औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं.

  5. पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र में 'कश्मीर' और 'सिंधु जल संधि' पर क्या कहा

    शहबाज़ शरीफ़
    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें अधिवेशन को संबोधित किया

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि सिंधु नदी के पानी को रोकने के किसी भी भारतीय प्रयास को पाकिस्तान 'युद्ध की कार्रवाई' (एक्ट ऑफ़ वॉर) मानेगा.

    न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने शुक्रवार को यह बात कही.

    उन्होंने कहा, "सिंधु नदी का पानी न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए लाइफ़ लाइन है और मौजूदा संधि को रोकने के भारत के एकतरफ़ा फ़ैसले का कोई क़ानूनी आधार नहीं है."

    "भारत के दावों और क़दमों को यूएन के विशेषज्ञों और कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन ने भी ख़ारिज किया है. पानी का इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए. नदियों से देशों को समृद्ध बनाना चाहिए, न कि उन्हें बांटना चाहिए."

    शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा. भारत को इसे लेकर कोई ग़लती नहीं करनी चाहिए."

    इसके इतर, पाकिस्तान ने यूएन में एक बार फिर 'कश्मीर' का मुद्दा उठाया है.

    शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "मैं इस मंच से अपने कश्मीरी भाई-बहनों को पूरी ज़िम्मेदारी के साथ भरोसा दिलाता हूं कि जब तक उन्हें ख़ुद फ़ैसला लेने का अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक हम उन्हें कूटनीतिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देते रहेंगे."

    उन्होंने कहा, "कश्मीर पाकिस्तान की जुगुलर वेन (गले की नस) है और हमेशा रहेगा."

    वहीं, भारत का ज़िक्र करते हुए शहबाज़ ने आरोप लगाया कि सीमा पार आरएसएस से प्रभावित विचारधारा धार्मिक नफ़रत को बढ़ावा दे रही है.

    उन्होंने कहा कि इसका असर भीड़ की हिंसा, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमलों और धार्मिक आज़ादी पर पाबंदियों के रूप में दिखाई दे रहा है.

  6. ईरान का अमेरिका को ऑफ़र- ये शर्तें पूरी कीं तो सात दिन में खोल देंगे होर्मुज़ स्ट्रेट, यारोस्लाव लुकीव और क्रिस ग्राहम

    अब्बास अराग़ची
    इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों बातचीत की (फ़ाइल फ़ोटो)

    ईरान ने अमेरिका के सामने एक समझौते का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत होर्मुज़ स्ट्रेट को एक हफ़्ते के भीतर फिर से खोला जा सकता है.

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी.

    उन्होंने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने की प्रक्रिया तभी शुरू होगी, जब अमेरिका समझौते में तय ज़रूरी शर्तों को पूरा करेगा.

    अराग़ची ने इन शर्तों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया. हालांकि, उन्होंने कहा, "इनका उल्लेख जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) में पहले ही किया जा चुका है."

    ईरानी विदेश मंत्री स्पष्ट तौर पर कहा कि अब फ़ैसला अमेरिका के हाथ में है. उन्होंने बताया कि ईरान का प्रस्ताव क़तर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है.

    ईरान के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर एक अमेरिकी अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के ज़रिए सकारात्मक बातचीत चल रही है. अधिकारी के मुताबिक़, इन बातचीत में परमाणु मुद्दे भी शामिल हैं.

    समझौते में क्या शर्तें थीं?

    दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुए 14 सूत्री एमओयू का उद्देश्य संघर्षविराम लागू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को आंशिक रूप से खोलना था.

    समझौते में ईरान के परमाणु हथियार हासिल नहीं करने की शर्त शामिल थी. इसके अलावा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगियों की ओर से सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान समाप्त करने की बात थी.

    एमओयू में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ख़त्म करने और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे.