तस्वीरों में: शरणार्थी कैंप में ऐसी है ज़िंदगी

शरणार्थी कैंप
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दक्षिण सूडान में 2013 के दौरान गृह युद्ध शुरू हुआ था. तब से वहां के 10 लाख से ज़्यादा लोग सीमा पार कर पड़ोसी देश युगांडा पहुंच चुके हैं.

ये लोग वहां के शरणार्थी शिविरों में ज़िंदगी बसर कर रहे हैं. टॉमी ट्रेन्कार्ड इन कैंपों में पहुंचे और वहां मौजूद चीज़ों को कैमरे में कैद किया.

टॉमी की ये तस्वीरें शरणार्थी कैंपों में ज़िंदगी की झलक पेश करती हैं.

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इमेज कैप्शन, ये जूते 32 साल के ओकोंगो चार्ल्स के हैं. रेंग में हुई लड़ाई के दौरान वो अपने बच्चों से बिछड़ गए थे. अब चार्ल्स के बच्चे उनकी मां के साथ जुबा में रहते हैं.

टॉमी कहते हैं, "संकट के शुरुआती दिनों में यहां ज़िंदगी मुश्किल थी. लेकिन धीरे-धीरे यहां रहने वाले शरणार्थियों के हालात सुधारने लगे."

शरणार्थियों के प्रति युगांडा की नीति दूसरे देशों के लिए मिसाल है.

"हर परिवार को खेती करने के लिए ज़मीन का टुकड़ा दिया गया है. वो मुफ्त में देश में व्यापार कर सकते हैं. यहां के शरणार्थी कैंपों में रहने वालों की ज़िंदगी काम करते हुए, खाना बनाते हुए, खेती, खेल-कूद और ना खत्म होने वाले इंतज़ार में बीतती है."

शांति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद शरणार्थियों के स्वदेश लौटने की उम्मीदें बढ़ गई हैं.

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इमेज कैप्शन, मिट्टी की दीवार पर टंगे इस पोस्टर को पढ़कर बच्चे जानवरों के नाम याद करते हैं. ये घर बिडी बिडी शिविर में रहने वाली लोना किजी का है. 2016 को दक्षिण सूडान के सेंट्रल इक्वेटोरिया राज्य में जब हिंसा भड़की तो लोना भागकर इस शरणार्थी शिविर में आ गई थीं.
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इमेज कैप्शन, बिडी बिडी शिविर में ही रहने वाले मलिस जस्टिन की झोपड़ी.
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इमेज कैप्शन, खिलौने वाली कार से खेलता एक बच्चा. यहां पूरे शिविर में बच्चे ऐसी कारों से खेलते दिख जाएंगे. इन कारों को बोतलों के ढक्कन और खराब प्लास्टिक से बनाया जाता है.
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इमेज कैप्शन, अफ्रीका में खेला जाने वाला एक खेल. इस खेल में ज़मीन में गड्ढे बनाकर कंकड़ डाले जाते हैं.
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इमेज कैप्शन, एक सहायता समूह ने मलिस को खेती करने के लिए बीज, उपकरण और ट्रेनिंग दी है.
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इमेज कैप्शन, बिडी बिडी कैंप में रहने वाले शरणार्थियों मे ज़्यादातर बच्चे हैं. एक हिंसक दृश्य का चित्र बनाता रिचर्ड.
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इमेज कैप्शन, शरणार्थियों को दिया जाने वाला खाना.
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इमेज कैप्शन, सजावट के लिए मिट्टी की दीवार पर बनाया गया एक ट्रक का चित्र.
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इमेज कैप्शन, शरणार्थी टेंट के बाहर रखा एक सोलर पैनल. शिविर में बिजली आती-जाती रहती है. इसलिए कुछ शरणार्थियों ने सोलर पैनल खरीद लिए हैं तो कुछ को सहायता समूहों ने दान में दिए हैं.
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इमेज कैप्शन, कील पर टंगी टॉर्चें और ईसा मसीह का निशान.
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इमेज कैप्शन, नील नदी का पानी साफ करने के बाद शरणार्थियों को मुहैया कराया जाता है. टेबल पर रखे पानी के सैंपल.
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इमेज कैप्शन, 42 साल के मार्टिन वारू ने अपने खेतों में भिंडी उगाई है. वो यहां अपनी पत्नी और नौ बच्चों के साथ रहते हैं.

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