ब्राज़ील: 22 साल बाद कैमरे में कैद हुआ जंगल में रह रहा 'अकेला आदमी'

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इमेज कैप्शन, एक मिनट से कुछ अधिक का है यह वीडियो
    • Author, विकी बेकर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

एक वीडियो फुटेज सामने आया है जिसमें दिख रहे एक आदिवासी व्यक्ति को उसकी "दुनिया का नितांत अकेला आदमी" बताया जा रहा है.

50 साल के आस पास की उम्र का यह आदमी अपने कबीले के सभी सदस्यों के मारे जाने के बाद से पिछले 22 सालों से ब्राज़ील के अमेज़न घाटी में अकेला रह रहा है.

ब्राज़ील की सरकारी एजेंसी फुनाई की ओर से जारी किया यह वीडियो काफ़ी हिल रहा है जिसे कुछ दूरी से फ़िल्माया गया है. इस वीडियो में एक मांसल आदमी कुल्हाड़ी से एक पेड़ काटता दिख रहा है.

इस वीडियो को दुनिया भर में शेयर किया गया लेकिन इस वीडियो की कहानी में और भी बहुत कुछ है.

इसे क्यों फिल्माया गया?

फुनाई की टीम इस आदमी की 1996 से ही निगरानी कर रही है और उत्तर-पश्चिमी राज्य रोन्डोनिया के उस इलाक़े में जहां वो रहते हैं उसको प्रतिबंधित क्षेत्र में बनाए रखने के लिए उसे जीवित बताता हुआ वीडियो दुनिया को दिखाने की ज़रूरत थी.

यह इलाक़ा करीब चार हज़ार हेक्टेयर में फैला हुआ है जो खेतों और कटाई किए जंगलों से घिरा है, लेकिन नियम लोगों को इस इलाक़े में घुसने और इसे किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाने से रोकता है.

ब्राज़ील की संविधान के मुताबिक यहां के मूल निवासियों को ज़मीन का अधिकार प्राप्त है.

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आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह सर्वाइवल इंटरनेशनल की रिसर्च और ऐड्वकेसी निदेशक फ़ियोना वाटसन कहती हैं, "उन्हें लगातार यह साबित करना होता है कि यह आदमी जीवित है."

उन्होंने बीबीसी से कहा, "इस वीडियो को जारी करने के पीछे एक राजनीतिक वजह भी है. कांग्रेस में कृषि व्यवसाय करने वालों का प्रभुत्व है, फुनाई का बजट कम कर दिया गया है. इस देश में यहां के मूल निवासियों के अधिकारों पर बड़ा हमला किया जा रहा है."

पहले भी किसानों से फुनाई का अपने दावों को लेकर विवाद हो चुका है.

इस आदमी के बारे में क्या पता है?

यह आदमी कई शोध रिपोर्ट्स, लेखों और अमरीकी पत्रकार मोंटे रील की एक किताब 'द लास्ट ऑफ़ द ट्राइब: द एपिक क्वेस्ट टू सेव ए लोन मैन इन द अमेज़न' का विषय रहा है. बावजूद इसके इनके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है.

इस आदमी को गैरसंपर्क कैटगरी में रखा गया है, मतलब कि कोई भी बाहरी व्यक्ति ने कभी इससे बात नहीं की है (जहां तक यह जानकारी है).

माना जाता है कि यह आदमी 1995 में किसानों के हमले में बचे छह लोगों के समूह का एकमात्र सदस्य है.

उनके जनजाति को कभी कोई नाम नहीं दिया गया और यह भी नहीं पता है कि वो कौन सी भाषा का इस्तेमाल करते हैं.

वर्षों से, ब्राज़ील की मीडिया उन्हें 'द होल इंडियन' कहती रही है, क्योंकि वो अपने पीछे गहरे गड्ढे छोड़ जाते हैं, मुमकिन है इसका इस्तेमाल जानवरों को फंसाने या छिपने के लिए किया जाता हो.

अतीत में उन्होंने पुआल की झोपड़ी और हाथ के बने औजार, जैसे कि राल (धूप या धूना) की मशाल और तीर भी अपने पीछे छोड़े हैं.

पुआल के बनी इस झोपड़ी को मलोका कहते हैं, इसे उस आदमी ने बनाया और बाद में छोड़ भी दिया (तस्वीर 2005 की है)
इमेज कैप्शन, पुआल के बनी इस झोपड़ी को मलोका कहते हैं, इसे उस आदमी ने बनाया और बाद में छोड़ भी दिया (तस्वीर 2005 की है)

यह फुटेज़ इतना दुर्लभ क्यों है?

अब तक इस आदमी का केवल एक ही धुंधली तस्वीर मौजूद है. जिसे उस फिल्मकार ने लिया था जो फुनाई की निगरानी के दौरान उनके साथ थे और जिसे 1998 में ब्राज़ील की डॉक्यूमेंट्री कोरुम्बियारा में बहुत थोड़े समय के लिए जिसे दिखाया गया था.

सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि वो इस बात से खुश हैं और साथ ही आश्यर्यचकित भी कि वीडियो में इस आदमी का स्वास्थ्य अच्छा दिख रहा है.

फुनाई के प्रादेशिक संयोजक अल्टेयर अल्गायर ने गार्जियन से कहा, "वो स्वस्थ दिख रहा है, शिकार कर रहा है, पपीता और मकई उगा रहा है."

एजेंसी की पॉलिसी है कि वो पृथक (अकेले) रह रहे मूल निवासियों से संपर्क करने से बचती है और कहती है कि अतीत में उस आदमी ने उससे संपर्क करने की कोशिश करने वालों पर तीर चलाकर यह स्पष्ट कर दिया है वो बाहरी लोगों से नहीं मिलना चाहता है.

उस इलाक़े में जाकर उस आदमी के तंबू को देखने वाली फियोना वाटसन कहती हैं, "उसने इतने भयावह अनुभव किए हैं कि वो बाहरी दुनिया को बहुत ख़तरनाक जगह के रूप मे देखता है."

हालांकि यह वीडियो बार बार देखने वाला है, वाटसन कहती हैं कि उसे संरक्षित किया जाना बेहद ज़रूरी है.

वो कहती हैं, "हमें बहुत से वीडियो पेश किए गए, लेकिन उन्हें पब्लिश करने के लिए वास्तव में आदेश चाहिए होंगे."

क्या वो बहुत ख़तरे में है?

बढ़ती बिजनेस की मांग को पूरा करने के दौरान 1970 और 80 के दशक में इस इलाक़े में सड़क बनाए जाने के दौरान इस जनजाति के अधिकांश लोग तबाह हो गए.

किसान और अवैध लकड़ी काटने वाले आज भी उनकी ज़मीन को हड़पना चाहते हैं.

उसका पिस्तौल लिए लोगों से भी सामना हो सकता है जो दरअसल अपने मवेशियों को चराने के दौरान इस इलाके का गश्त करने के लिए बंदूकें किराए पर लेते हैं.

2009 में फुनाई के बनाए एक अस्थायी शिवर को एक ऐसे ही सशस्त्र समूह ने बर्बाद कर दिया था और स्पष्ट ख़तरे के तौर पर अपने पीछे बंदूक की दो गोली छोड़ गए थे.

अमेज़न
इमेज कैप्शन, अमेज़न रेन फॉरेस्ट की एरियल तस्वीर (फ़ाइल तस्वीर)

सर्वाइवल इंटरनेशनल के मुताबिक ब्राज़ील के अमेज़न रेन फॉरेस्ट में दुनिया के किसी भी कोने से कहीं अधिक ऐसे आदिवासी रहते हैं जिनसे अब तक संपर्क नहीं किया जा सका है.

इन जनजातियों की इम्युनिटी लेवल (प्रतिरक्षा स्तर) बहुत कम होता है इसलिए बाहरी दुनिया के लोगों से संपर्क में आने पर इनके फ्लू, चेचक या अन्य आम बीमारियों से मौत का ख़तरा भी है.

वाटसन कहती हैं, "एक तरह से हमें उनके बारे में बहुत कुछ जानने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन साथ ही ये उस जबरदस्त इंसानी विविधता का प्रतीक भी है, जिसे हम खोते जा रहे हैं."

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