देशों के बीच नफ़रत, लोगों में मुहब्बत कैसे?

भारत पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी
इमेज कैप्शन, ये दुश्मनी तो नहीं?
    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित

पिछले महीने जम्मू में भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ मंत्री से मेरी मुलाक़ात हुई. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में लगा है.

लेकिन इंटरव्यू के बाद उन्होंने कहा, "मैं पहली बार पाकिस्तान गया था. मैं ये देखकर हैरान रह गया कि वहाँ के 95 प्रतिशत लोग अच्छे हैं."

मैंने कहा, आप थोड़ा ज़्यादा नहीं बोल रहे? वे नहीं माने, "नहीं जी, वहां के 95 प्रतिशत लोग अच्छे हैं. वो हमारी ही तरह के लोग हैं."

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इमेज कैप्शन, दोनों तरफ़ एक-दूसरे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होते हैं

ख़ैर, हम दोनों में बहस के बाद ये तय हुआ कि पाकिस्तानी जनता और सरकार में फ़र्क़ करना ज़रूरी है. एक तरफ जनता और दूसरी तरफ फ़ौज, नेता, पाकिस्तान सरकार और वहां सक्रिय चरमपंथी.

इसी तरह भारत की जनता एक तरफ. दूसरी तरफ यहाँ की सरकार, यहाँ के नेता और पाकिस्तान के खिलाफ़ ज़हर उगलने वाला भारतीय मीडिया.

इन दिनों भारत और पाकिस्तान में एक दूसरे के खिलाफ चीखने-चिल्लाने की आवाज़ें ज़ोर-शोर से रोज़ सुनाई दे रही हैं. दोनों देशों के न्यूज़ चैनल और नेता इस में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं. हर कोई देशप्रेमी दिखना चाहता है. थोड़ी अलग राय रखी नहीं कि इन चैनलों पर आपको एक मिनट में देशद्रोही घोषित कर दिया जाएगा.

कोई अनजान और बाहरी व्यक्ति देखेगा तो उसे लगेगा कि ये दोनों देशों के लोग वाक़ई एक-दूसरे के जानी दुश्मन हैं.

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इमेज कैप्शन, वाघा बॉर्डर की आक्रामकता अब मनोरंजन में बदल चुकी है

मैं भारतीय अख़बारों की पाकिस्तान विरोधी सुर्खियां पढ़कर जवान हुआ. पत्रकार बनने के बाद भी पाकिस्तान के लोगों को दुश्मन समझता रहा, मेरी नज़र में पाकिस्तानी मुल्ला और चरमपंथी थे.

कई साल पहले बीबीसी हिंदी और उर्दू ने फ़ैसला किया कि मुझे और एक पाकिस्तानी सहकर्मी को एक-दूसरे के देश भेजा जाए. मैं अपने दिल में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ जितनी नफरत लेकर गया था उतनी ही जिज्ञासा भी मेरे मन में थी, यही हाल मेरे पाकिस्तानी दोस्त का भी था.

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लेकिन हम दोनों को झटका लगा. एक बड़ा झटका, दोनों तरफ के मीडिया और नेताओं ने हमें जैसा बताया था, मेरे लिए उससे बहुत अलग था पाकिस्तान, मेरे साथी के मन में भारत की जो तस्वीर थी वो भी पूरी तरह बदल गई.

इसीलिए जब जम्मू में बीजेपी मंत्री ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में 95 प्रतिशत लोग अच्छे हैं, तो मैं हैरान नहीं हुआ. मुझे भी वहां के लोग वैसे ही लगे जैसे भारत के. वो भी रोज़ी रोटी कमाने में जुटे हैं जैसे हम. उनकी शहरी समस्याएं वैसी ही हैं जैसी हमारी.

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इमेज कैप्शन, आम लोगों की समस्याएँ दोनों ओर एक जैसी हैं

मुझे पाकिस्तान में मुल्ला कम नज़र आए, कराची के मुक़ाबले पुरानी दिल्ली में बुर्का वाली महिलाएँ ज़्यादा दिखती हैं.

भारत आए मेरे पाकिस्तानी दोस्त को यही बताया गया कि भारत में मुसलमानों को आज़ादी नहीं है लेकिन उसका भ्रम जल्दी ही टूट गया.

सच जानने-समझने के लिए हमें एक दूसरे के देश जाना पड़ा, कितने लोग ऐसा कर सकते हैं.