कश्मीर- पत्थरबाज़ों पर मामले ख़त्म, बीजेपी ख़फ़ा

    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, जम्मू से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती सरकार ने मंगलवार को सैंकड़ों पत्थरबाज़ों पर दर्ज मामले वापस ले लिए.

महबूबा मुफ़्ती ने सोमवार को श्रीनगर में सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक बैठक की. इसमें उन्होंने पुलिस और गृह विभाग को आदेश दिए कि वो उन युवाओं के मामलों की दोबारा जांच करें जिन पर पत्थरबाज़ी के मामले दर्ज हैं.

एक दिन बाद गृह विभाग ने 634 युवकों पर दर्ज पत्थरबाज़ी के 114 मामले वापस ले लिए.

इन पर आरोप थे कि इन्होंने सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके हैं.

पत्थरबाज़ी के आरोप में दर्ज मामलों की छानबीन के लिए सरकार ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी. इस कमेटी की सिफारिशों को बुधवार को पुलिस को भेजा गया, और उनके मुताबिक कार्रवाई करने को कहा गया.

कमेटी ने साफ़ किया है कि जिन पत्थरबाज़ों के खिलाफ खतरनाक आपराधिक मामले होंगे, उन्हें इस दायरे में नहीं लाया जाएगा.

सरकार के इस फ़ैसले पर श्रीनगर के एक युवक ने कहा कि वो इस फैसले से बहुत ख़ुश हैं. इस युवक पर 2010 में पत्थरबाज़ी का मामला दर्ज हुआ था.

उन्होंने कहा, "आज तक तो कहा ही जाता था लेकिन अब इसे किया गया. मैंने बीटेक किया है. केस दर्ज होने की वजह से मुझे कोई नौकरी देने के लिए तैयार नहीं होता था, अब ऐसा नहीं होगा. मेरी ज़िन्दगी अब वापस पटरी पर आएगी."

इस पत्थरबाज़ के घरवाले भी सरकारी फ़ैसले से काफी खुश हैं.

उनकी बहन इर्तिका कहती हैं, "ये सभी युवा पढ़़े-लिखे हैं. इनसे नादानी में गलती हो गई. अब सरकार से उम्मीद है कि ऐसे जितने भी युवा हैं उन सब के मामले वापस लिए जाएंगे."

वहीं प्रदेश सरकार में साझीदार भाजपा ने महबूबा मुफ़्ती के इस फैसले की निंदा की है.

जम्मू-कश्मीर बीजेपी के मुखिया और विधायक सतपाल शर्मा कहते हैं, "जम्मू कश्मीर में पिछले 25 साल से आंतकवाद की जो आग लगी है उसमें चाहे आतंकवादी हों, या अलगावादी, सभी ने आग में घी डालने का काम किया है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में खून खराबा किया है. ऐसे में ये पत्थरबाज़ हमारे जवानों को ज़ख़्मी करते हैं, हालात खराब करते हैं. इनको छोड़ना कोई अच्छा संकेत नहीं है. आने वाले दिनों में ये हमारे लिए सरदर्द बनेंगे."

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपनी सरकार में 2011 में घोषणा की थी कि सभी पत्थरबाज़ों के लिए आम माफ़ी का एलान होगा. लेकिन उस एलान पर अमल नहीं हो सका.

कश्मीर में पत्थरबाज़ी करता एक युवक

महबूबा मुफ़्ती के इस कदम को लोग कश्मीर में पीडीपी को आम जनता के नज़दीक लाने की एक कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.

बीजेपी के साथ पिछले साल सरकार बनाने के बाद से पीडीपी के ख़िलाफ कश्मीर में नाराज़गी बढ़ गई है.

अप्रैल 2016 में महबूबा मुफ़्ती के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कश्मीर में चरमपंथी हमलों में तेज़ी आई है.

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