हैदराबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति इस्तीफ़ा दें: राहुल

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों से मिलने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुंचे.

छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा.

राहुल गांधी ने मृतक रोहित की मां से भी मुलाक़ात की.

राहुल ने कहा कि वो एक राजनेता की हैसियत से नहीं आए हैं, बल्कि एक युवा की तरह दूसरे युवाओं से मिलने आए हैं.

राहुल गांधी ने कहा, "उनके परिवार और माँ को जो छति पहुंची है, उसका मुआवजा़ दिया जाना चाहिए. लेकिन इस मुआवज़े का मतलब सिर्फ़ पैसा नहीं होना चाहिए. इसका मतलब सम्मान भी है."

राहुल गांधी ने रोहित के परिजनों का हाल जाना.
इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने रोहित के परिजनों का हाल जाना.

राहुल गांधी ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति के इस्तीफ़े की मांग की.

राहुल ने कहा,"इस आत्महत्या के पीछे कुछ लोग ज़िम्मेदार है. इनमें कुलपति और मंत्री भी है. जो भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं उन्हें कड़ा दंड मिलना चाहिए."

राहुल गांधी ने कहा,"हमें एक ऐसे कानून की ज़रुरत है जिससे छात्रों को अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी मिले."

इससे पहले, हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शोध कर रहे दलित छात्र रोहित वेमुला ने रविवार रात फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली थी.

रोहित और चार अन्य दलित छात्रों को कुछ दिनों पहले यूनिवर्सिटी से सस्पेंड कर दिया गया था और उन्हें हॉस्टल से भी निकाल दिया गया था.

हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष ज़ुहैल केपी ने बीबीसी को बताया, ''हम केंद्रीय राज्य मंत्री बंडारु दत्तात्रेय, कुलपति अप्पा राव पिंडले और अन्य लोगों की अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण क़ानून के तहत तुरंत गिरफ़्तारी की मांग कर रहे हैं. हमारी पांच मांगें हैं, हम चाहते हैं कि उन्हें तत्काल लागू किया जाए.''

अपने साथियों के साथ रोहित वेमुला

छात्र संघ की इन मांगों में कुलपति को तत्काल हटाने, रोहित के परिवार को 50 लाख रुपए की मुआवज़ा, रोहित के पिछले साल जुलाई से बक़ाए रक़म को अविलंब भुगतान किया जाए, एएसए के नेताओं पर दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाए और विश्वविद्यालय से उनके निलंबन को ख़त्म किया जाए.

केंद्र सरकार में श्रम-रोज़गार राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के हैदराबाद स्थित घर के बाहर मंगलवार को छात्रों ने प्रदर्शन कर नारेबाज़ी की.

सिकंदराबाद के भाजपा सांसद बंडारू दत्तात्रेय ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को एक पत्र लिखा था. इसके बाद पांच छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया था. दत्तात्रेय ने पिछले साल अगस्त में लिखे अपने पत्र में अंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन (एएसए) को जातिवादी, चरमपंथी और राष्ट्रविरोधी संगठन बनाया था.

रोहित वेमुला

इन पांचों छात्रों को विश्वविद्यालय के हर सार्वजनिक स्थल पर जाने से प्रतिबंधित कर दिया गया था.

दो जनवरी से रोहित और उनके चार साथी छात्र निष्कासन के विरोध में विश्वविद्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे और अपने निष्कासन को वापस लेने की मांग कर रहे थे.

एएसए का आरोप है कि बंडारू दत्तात्रेय के दबाव के कारण ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रोहित और उनके साथियों को दंडित करने का फ़ैसला लिया था.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक सदस्य ने इन छात्रों पर मारपीट करने का आरोप लगाया था.

बंडारू दत्तात्रेय.

यूनिवर्सिटी की पहली जांच में इन आरोपों को ग़लत पाया गया था.

एक स्थानीय नेता ने भी अपनी शिकायत दर्ज कराई और नए कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने बिना कोई नई वजह बताए, बिना किसी नई जांच के, पहली जांच के फ़ैसले को उलट दिया और रोहित और उनके साथी छात्रों को दंडित करने का निर्णय लिया.

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