'छात्रों का निष्कासन रद्द करें राष्ट्रपति'

रोहित वेमुला
    • Author, पीएल पुनिया
    • पदनाम, अध्यक्ष, एससी-एसटी आयोग
  • प्रकाशित

पीएच.डी कर रहे एक होनहार दलित छात्र की आत्महत्या बहुत ही दुखद घटना है. अगर आप उनका लिखा सुसाइड नोट पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि हमने कैसा इंसान खो दिया है.

इस पूरे मामले को देखेने से पता चलता है कि विश्वविद्यालय के फ़ैकल्टी, एससी-एसटी फ़ैकल्टी, कई और छात्र संगठनों ने इन पांच छात्रों के विश्वविद्यालय से निष्कासन का विरोध किया था.

इस मामले में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे पता चलता है कि छात्रों का झगड़ा कभी हुआ ही नहीं. जिस तीसरे व्यक्ति ने शिकायत की है, वह न तो पीड़ित है, न वह मौक़े पर मौजूद था और न ही वह गवाह है. उसे ज़बर्दस्ती इस मामले में घुसाया गया.

विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने भी कहा कि कहीं कोई झगड़ा नहीं हुआ. विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में भी इस बात का ज़िक्र है कि कोई झगड़ा नहीं हुआ.

रोहित वेमुला की मौत के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन.

लेकिन बाद में केंद्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य बंडारू दत्तात्रेय ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को चिट्ठी लिखी. इसके बाद इस मामले ने यू टर्न ले लिया. नई जांच कमेटी बनती है, जो बच्चों को दोषी साबित करती है. इसके बाद पांच छात्रों के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया जाता है. उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया जाता है.

इन सब बातों को देखते हुए मैं राष्ट्रपति महोदय से मांग करुंगा कि इन छात्रों के निष्कासन को वापस लिया जाए. हम उनसे इस तरह की व्यवस्था करने की भी मांग करेंगे जिससे कि भविष्य में ऐसी घटना न होने पाए.

बंडारू दत्तात्रेय.

इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बंडारू दत्तात्रेय की चिट्ठी मिलने के बाद दूसरी जांच कमेटी बनाई. जिसने इन छात्रों की बात सुने बिना और बिना किसी सबूत के निष्कर्ष निकाल लिए और उन्हें दोषी माना.

इस छात्र ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि मेरी आत्महत्या के लिए किसी को दोषी न माना जाए. इसके लिए न तो मेरे दोस्तों और न दुश्मनों को दोष दिया जाए. लेकिन इससे एक बात तो समझ में आती है कि कुछ दुश्मन तो थे, उस छात्र के.

हम विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस, प्रशासन और राज्य सरकार को लिखेंगे कि आप इस मामले में कार्रवाई करें और आयोग को अपनी कार्रवाई से अवगत कराएं.

(बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से बातचीत पर आधारित)

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