बीएचयू-आईआईटी से क्यों हटाए गए संदीप पांडे?

    • Author, रोशन जायसवाल
    • पदनाम, बनारस से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. संदीप पांडे को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की आईआईटी से कार्यमुक्त कर दिया गया है.

यह जानकारी खुद डॉ. संदीप पांडे ने बीबीसी हिंदी को टेलीफ़ोन पर दी. उनका साफ़ कहना था कि इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ का हाथ है.

दरअसल पांडे वाराणसी स्थित बीएचयू-आईआईटी में विज़िटिंग फ़ैकल्टी के बतौर कैमिकल, मेकेनिकल और सिरेमिक इंजीनियरिंग में कंट्रोल सिस्टम सहित अन्य विषयों पर पिछले ढाई साल से पढ़ा रहे थे.

लेकिन नए साल की पहली तारीख को ही बीएचयू-आईआईटी प्रशासन ने उनसे उनका पाठयक्रम वापस लेकर पढ़ाने से मना कर दिया.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में डॉ. संदीप पांडे ने सीधे तौर पर बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी और डीन धनंजय पांडे को संघ का व्यक्ति बताया.

उन्होंने बताया कि बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स की मीटिंग में यह फ़ैसला लिया जा चुका है और बस डीन के हस्ताक्षर होने बाक़ी हैं.

वहीं, दूसरी ओर बीएचयू-आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव सैंगल ने डॉ. संदीप पांडे को हटाए जाने की पुष्टि करते हुए बीबीसी हिंदी को बताया कि उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है.

उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में लिखित नोटिस जारी कर दिया गया है और यह लिखित कार्यवाही बुधवार को ही की गई है.

बीएचयू-आईआईटी से हटाए जाने को लेकर उन पर देशद्रोही, नक्सली और प्रतिबंधित निर्भया कांड की सीडी छात्रों के बीच दिखाने के आरोपों को डॉ. संदीप पांडे ने बेबुनियाद बताया.

उन्होंने बताया कि क्लास में प्रतिबंधित निर्भया कांड की सीडी दिखाने के पहले ही क्षेत्रीय लंका थाने की पुलिस और बीएचयू के चीफ़ प्रॉक्टर के हस्तक्षेप के चलते उसे नहीं दिखाया गया था.

उन्होंने कहा, ''जो मेरे साथ हुआ वह ग़लत हुआ, लेकिन यह बीएचयू प्रशासन का अपना अधिकार है. इसके लिए मैं कोई आंदोलन नहीं करने जा रहा हूं लेकिन मैं 8 जनवरी को बनारस जा रहा हूँ.''

उधर, दूसरी ओर संदीप पांडे पर लगे आरोपों के बारे में बीएचयू-आईआईटी निदेशक प्रो. राजीव सैंगल ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

उन्होंने बस इतना कहा कि संदीप पांडे को हटाने का फ़ैसला बोर्ड ऑफ़ गवर्नर की मीटिंग में लिया गया.

उधर, संदीप पांडे को हटाए जाने से बीएचयू-आईआईटी के छात्रों में काफी रोष है. छात्रों ने कहा कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करेंगे.

मेकेनिकल इंजीनियरिंग के चौथे साल के छात्र मनीष बब्बर का कहना है कि ''राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को कैसे हटाया जा सकता है? यह अलोकतांत्रिक फ़ैसला है.''

वहीं, मेकेनिकल इंजीनियरिंग की ही दूसरे साल की छात्रा स्वाति का कहना है कि ''किसी टीचर को एक सत्र के बीच ही कैसे हटाया जा सकता है? संदीप सर को छात्रों का समर्थन है, सर पर लगे आरोप ग़लत हैं.''

मेकेनिकल इंजीनियरिंग के ही छात्र हेमंत का मानना है, ''संदीप सर गांधीवादी हैं न कि नक्सलवादी. बीएचयू-आईआईटी प्रशासन के इस फ़ैसले से छात्रों में नाराज़गी है. उनकी मांग है कि संदीप सर को वापस लिया जाए.''

वैसे इस पूरे प्रकरण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में एक नई बहस छिड़ गई है कि कुछ दिन पहले असहिष्णुता और फिर अवार्ड वापसी में घिरी केंद्र सरकार को अब इस प्रकरण में घसीटा जाएगा, क्योंकि मामला केंद्र से संचालित होने वाले संस्थान का है.

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