क्या होगा सरकार के 37 विधेयकों का?

राज्यसभा, कांग्रेस, आनंद शर्मा
    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

जबरन धर्म परिवर्तन पर उठे विवाद और सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों-मंत्रियों के बयानों को लेकर राज्यसभा में बीते कुछ दिनों से गतिरोध जारी है. सत्र का समापन 23 दिसम्बर को होना है और इतने कम समय में सरकार को कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने हैं.

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी की संसदीय दल की बैठक में सांसदों और मंत्रियों से संभलकर बयान देने के लिए कहा है. दूसरी ओर विपक्ष राज्यसभा में प्रधानमंत्री के बयान पर अड़ा हुआ है लेकिन सरकार उनकी मांग पूरी करने के लिए तैयार नहीं है.

'चर्चा से भाग रहा विपक्ष'

राज्यसभा, बीजेपी, मोदी

संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार ने साफ़ कर दिया था कि वह 37 महत्वपूर्ण विधेयक लाना चाहती है जिनमें कोयला अध्यादेश के अलावा बीमा बिल और वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शामिल है.

बीमा विधेयक में एफ़डीआई यानि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है. जीएसटी से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मंत्रिमंडल की मंज़ूरी मिल चुकी है.

सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है और मौजूदा स्थिति में बीमा विधेयक को सिर्फ 70 सदस्यों का समर्थन हासिल है जबकि कांग्रेस के 66 सदस्यों के अलावा अन्य विपक्षी दलों के 105 सदस्य इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं.

संसद के बाहर ममता बनर्जी

वहीं तृणमूल कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि वह हर स्तर पर सरकार का विरोध करेगी. पार्टी शारदा चिट फंड घोटाले की सीबीआई जांच और बर्धवान हमले की एनआईए जांच से भी नाराज़ है.

सत्ता पक्ष के सदस्य और पत्रकार चंदन मित्रा ने बीबीसी से कहा कि गुरुवार तक राज्यसभा की 22 बैठकों में विपक्ष के रवैये की वजह से कोई ख़ास काम नहीं हो पाया.

चंदन मित्रा का कहना है, "पूरा देश देख रहा है कि कांग्रेस जान-बूझकर राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चलने देना चाहती और देश की अर्थनीति बनाने में अड़ंगा डाल रही है. प्रधानमंत्री राज्यसभा में गुरुवार को आए भी थे. अगर जबरन धर्म परिवर्तन पर चर्चा होती तो वह जवाब भी देते, मगर विपक्ष चर्चा से भागता रहा."

राज्यसभा, सीताराम येचुरी

लेकिन मित्रा के आरोपों को राज्यसभा सदस्य और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी बेबुनियाद बताते हैं. वह कहते हैं कि पहली बार राज्यसभा की कार्यवाही देर रात तक चली और सदस्यों ने कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित करवाए.

उन्होंने कहा, "उचित यही होता कि मंत्रिमंडल के नेता होने के नाते प्रधानमंत्री जबरन धर्मांतरण पर अपने साथियों के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयानों पर खुद बयान देकर लोगों का विश्वास जीतते."

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