मालीण भूस्खलन: जारी है बचाव कार्य

मालीण में ज़िंदा बचे लोग
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महाराष्ट्र में पुणे के पास हुए भूस्खलन के बाद वहां अब भी राहत और बचाव कार्य जारी है जो दो-तीन दिन तक चलेगा.

राहत कर्मियों का कहना था कि इस वक़्त उनकी प्राथमिकता मलबा हटाना और ज़िंदा बचे लोगों को निकालना है. हालांकि मलबे में से किसी के ज़िंदा निकलने की उम्मीद कम ही है.

घटनास्थल पर पहुंचे बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद कहते हैं, "वहां काफ़ी टन गीली मिट्टी गिरी है और उसको देखते हुए वहां किसी का भी ज़िंदा रहना मुश्किल नज़र आता है."

बचाव के बाद राहत पर ज़ोर दिया जाएगा जिसमें अभी एक-दो दिन और लग सकते हैं.

भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद क़रीब पूरा मालीण गांव मलबे में दब गया था. यह गांव पश्चिम घाट की पहाड़ियों की तलहटी पर बसा था और इसमें क़रीब 70 मकान थे.

मालीण में ज़िंदा बचे लोग

मलबे से अभी तक 60 से ज़्यादा शवों को निकाला जा चुका है. नौ लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है.

अतिक्रमण

पहाड़ टूटने के कारणों की समीक्षा भी जारी है. कई लोगों का कहना है कि यहां जंगल काटे गए हैं.

पूरे महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में सड़कें, घर और बड़े-बड़े कॉम्प्लेक्स बना कर पहाड़ों का अतिक्रमण किया गया है.

मालीण में ज़िंदा बचे लोग

एनडीआरएफ (नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) का कहना है कि वे अधिकारियों के निर्देशानुसार ही काम करेंगे. फिलहाल उनका काम है मलबे को साफ करना और अगर कोई ज़िंदा बचा हो तो उसे निकालना.

मालीण में राहतकर्मी

ऐसी घटना होने पर राजनीतिक निर्णय किए जाते हैं ऐसे में एनडीआरएफ ख़ुद कोई फ़ैसला नहीं करेगा.

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