अमित मालवीय को बीजेपी ने सोशल मीडिया इंचार्ज के पद से क्यों हटाया?

प्रकाशित
पढ़ने का समय: 9 मिनट

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है.

करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है.

उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है.

हालांकि, बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है. पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है.

मालवीय की जगह आने वाले दीपक म्हस्के की पहचान अकादमिक और चुनावी डेटा के जानकार के तौर पर रही है.

म्हस्के का ताल्लुक छत्तीसगढ़ से है. वह केमिस्ट्री के प्रोफेसर रहे हैं और बीजेपी संगठन में भी काम कर चुके हैं. उनकी नियुक्ति को पार्टी के डिजिटल अभियान में डेटा और चुनावी रणनीति पर ज्यादा जोर देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?

मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही.

रॉयटर्स ने भी बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है.

जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन ज़ी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया. उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के ज़रिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मज़ाक उड़ाने के लिए किया. दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है.

जुलाई में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े विचारक रतन शारदा ने बीजेपी की मीडिया और आईटी टीम की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि पार्टी का आईटी सेल अब खुद नैरेटिव बनाने के बजाय दूसरे लोगों के बनाए नैरेटिव पर प्रतिक्रिया देता है. उन्होंने खास तौर पर जंतर-मंतर के छात्र आंदोलन को लेकर पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति पर सवाल उठाए थे.

रतन शारदा ने एक्स पर लिखा था, "#CockroachProtests के बीच हम #BJP की मीडिया टीम, जिसमें आईटी सेल भी शामिल है, की शानदार नाकामी पर ध्यान ही नहीं दे पाए. लेफ्ट इकोसिस्टम ने एक नफ़रत भरा, लेकिन बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया नैरेटिव खड़ा किया और उसे काउंटर करने में बीजेपी पूरी तरह नाकाम रही. बीजेपी की तरफ़ से बात मीम्स या Whataboutery (आरोप-प्रत्यारोप) से आगे नहीं बढ़ी."

रतन शारदा ने लिखा, "मोदी जी को हालात संभालने के लिए अपनी पूरी ताक़त लगानी पड़ी, यहां तक कि आधी रात को एक रील भी बनानी पड़ी. ये बीजेपी के कम्युनिकेशन के लिए अच्छी बात नहीं है. मेरा दिल टूटता है. इसलिए ये कड़वी पोस्ट लिख रहा हूं."

शारदा की यह आलोचना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले वह अमित मालवीय के सोशल मीडिया पोस्ट के तरीके पर भी सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने कहा था कि नागरिकों की चिंताओं का जवाब देने के बजाय उन्हें ट्रोल करना समस्या पैदा करता है.

यूट्यूब चैनल से जुड़े आंकड़े जारी करने वाली संस्था डेटाबीइंग्स के 1 से 7 अगस्त के बीच जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक़ कांग्रेस का चैनल 2 करोड़ 19 लाख व्यूज़ के साथ राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के चैनलों की लिस्ट में पहले नंबर पर था. कांग्रेस का व्यूज़ शेयर 33 प्रतिशत था. जबकि इंडियन यूथ कांग्रेस का चैनल एक 1 करोड़ 39 लाख व्यूज़ और 21 प्रतिशत व्यूज़ शेयर के साथ दूसरे नंबर पर था. वहीं राहुल गांधी का चैनल 1 करोड़ 14 लाख व्यूज़ के साथ तीसरे नंबर पर था. पीएम नरेंद्र मोदी का यूट्यूब चैनल सिर्फ़ 62 लाख व्यूज़ के साथ चौथे नंबर पर था.

स्क्रॉल के एक लेख के मुताबिक़ बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और ख़ासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई. लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है.

लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं.

इंस्टाग्राम पर कंटेंट की पहुंच सिर्फ़ फ़ॉलोअर्स की संख्या से तय नहीं होती. एल्गोरिदम यह देखता है कि लोग वीडियो कितनी देर देखते हैं, दोबारा देखते हैं और उसे निजी चैट में दोस्तों के साथ शेयर करते हैं.

लेख में पीएम नरेंद्र मोदी के 23 जुलाई के इंस्टाग्राम वीडियो का उदाहरण दिया गया है. वीडियो को 24 घंटे में 30 करोड़ से ज़्यादा व्यूज़ मिले. बीजेपी ने इसे अपनी डिजिटल सफलता माना, जबकि स्क्रॉल के इस लेख के मुताबिक़ बड़ी संख्या में युवा इसे मज़ाक और मीम के तौर पर शेयर कर रहे थे. यानी बहुत ज्यादा व्यूज़ का मतलब ज़रूरी नहीं कि सकारात्मक राजनीतिक प्रभाव भी हो.

जंतर-मंतर पर हुए प्रोटेस्ट के बाद युवा और जेन-ज़ी से जुड़ने को बीजेपी ख़ुद कितनी अहमियत दे रही है इसका संकेत नए सोशल मीडिया इंचार्ज दीपक म्हस्के ने ख़ुद दिया.

एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी अब युवाओं तक पहुंचने के लिए इंस्टाग्राम, रील्स और प्लेटफ़ॉर्म स्पेसिफ़िक मैसेजिंग पर ज़ोर देगी. उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी मिसइन्फ़ॉर्मेशन का जवाब देने और लोगों की गलत धारणाएं दूर करने पर ध्यान देगी.

म्हस्के का यह कहना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी.

बीजेपी के इस बदलाव का स्वागत करते हुए 'द प्रिंट' की पत्रकार रूही तिवारी ने एक्स पर लिखा, "यह बदलाव बहुत पहले हो जाना चाहिए था. शायद पार्टी नेतृत्व को अब एहसास हो गया है कि पूरी तरह से प्लांटेड और सुनियोजित ट्रोल आर्मी वाला मॉडल अब उल्टा नुकसान पहुंचा रहा है. यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सोशल मीडिया वॉरफेयर का विचार देशभर में लोकप्रिय बनाने की शुरुआत बीजेपी ने ही की थी. लेकिन आज उसका सोशल मीडिया अभियान थका हुआ और बनावटी लगता है. वह एक ही तरीके पर निर्भर है-ट्रोल करना और लगातार हमला बोलना. बीजेपी को नए सोच वाले लोगों, नए तरीकों और कम आक्रामक रणनीति की ज़रूरत है."

अमित मालवीय ने क्या कहा?

पद से हटाए जाने के बाद अमित मालवीय ने अपने उत्तराधिकारी दीपक म्हस्के को बधाई दी और कहा कि नई नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब पार्टी देश के हर हिस्से तक अपना संदेश और संगठन पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है.

उन्होंने सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थकों को भी अपने 11 साल के कार्यकाल के दौरान समर्थन के लिए धन्यवाद दिया.

उन्होंने लिखा, "बीजेपी के सभी नए बने पदाधिकारियों को बधाई. उनकी नियुक्ति ऐसे अहम मोड़ पर हुई है, जब पार्टी नई ऊंचाइयों को छूने और अपने संदेश और संगठन को देश के कोने-कोने तक ले जाने की तैयारी कर रही है."

"मैं ख़ासतौर पर दीपक म्हस्के जी को बधाई देना चाहता हूं, जो मेरी जगह बीजेपी के सोशल मीडिया डिपार्टमेंट के हेड का काम संभालेंगे, और सह संयोजकों प्रीति गांधी जी, शिवानंद द्विवेदी जी, आलोक भट्ट जी और अरुण यादव जी को."

अमित मालवीय का 11 साल का कार्यकाल

अमित मालवीय पिछले करीब 11 साल से बीजेपी की डिजिटल राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं. वह सोशल मीडिया पर विपक्षी नेताओं पर हमलों और बीजेपी के पक्ष में नैरेटिव बनाने के लिए जाने जाते रहे हैं.

हाल के छात्र आंदोलन के दौरान भी वह सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहे. उन्होंने प्रदर्शन से जुड़े कुछ वीडियो और दावों को लेकर सवाल उठाए और आंदोलन के मुद्दों पर बीजेपी का पक्ष रखने की कोशिश की.

मालवीय बैंकिंग क्षेत्र में काम कर चुके हैं. उनकी एक्स प्रोफ़ाइल में उन्हें 'एक्स-बैंकर' बताया गया है. उनके मुताबिक, उन्होंने 2009 में बीजेपी से जुड़े ऑनलाइन मंच 'फ़्रेंड्स ऑफ़ बीजेपी' के साथ काम करना शुरू किया था.

उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि बिज़नेस मैनेजमेंट और फाइनेंस से जुड़ी है. बीजेपी की डिजिटल टीम में आने के बाद मालवीय तेजी से पार्टी के सोशल मीडिया अभियान का प्रमुख चेहरा बन गए. 2015 में उन्हें पार्टी के आईटी सेल की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद करीब एक दशक तक वह बीजेपी के डिजिटल नैरेटिव और सोशल मीडिया रणनीति से जुड़े रहे.

अब सवाल यह है कि क्या दीपक म्हस्के के आने के साथ बीजेपी अपनी सोशल मीडिया रणनीति में भी बदलाव करेगी? खासकर युवा मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाना और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी मजबूत करना आने वाले समय में नई टीम की बड़ी चुनौती हो सकती है.

मालवीय को हटाने पर प्रतिक्रियाएं

अमित मालवीय को बीजेपी सोशल मीडिया इंचार्ज के पद से हटाने के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल और विशेषज्ञ प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने एक्स पर लिखा, "तो आखिरकार पोर्न फैलाने और फ़ेक न्यूज़ फैलाने वाले अमित मालवीय को बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख के पद से हटा दिया गया."

कांग्रेस नेता मुमताज़ पटेल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, "सबसे स्वागत योग्य बदलाव अमित मालवीय को हटाया जाना है, जिस नेता ने अकेले अपने दम पर आईटी सेल के ज़रिए देशभर में कांग्रेस के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाई."

मुमताज पटेल ने कहा, "उन्होंने राहुल गांधी के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा चलाया और झूठी अफ़वाहें और ग़लत ख़बरें फैलाईं. उनका जाना तो बनता था. हम देख रहे हैं कि इनके आईटी सेल जिनके पीछे करोड़ों रुपये ख़र्च किए गए, उनका पूरा प्रोपेगेंडा हमारे स्टूडेंट्स ने तोड़ दिया."

फ़ैक्ट चेकर मोहम्मद ज़ुबैर ने लिखा, "एक दशक से भी ज़्यादा समय तक अमित मालवीय बीजेपी की प्रोपेगेंडा मशीनरी चलाते रहे. उन पर ग़लत सूचनाएं फैलाने और ऑनलाइन ट्रोल्स की एक बड़ी फ़ौज को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे."

वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा, "अमित मालवीय बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख पद से बाहर हो गए हैं. आप लोगों का क्या कहना है? क्या जनरल मोदी के नेतृत्व में यह बदनाम सेल इसी तरह काम करता रहेगा?"

वहीं पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने लिखा, "अमित मालवीय को लेकर आज ऐसे लोग लिख रहे हैं, जैसे कि अमित मालवीय को कोई सज़ा दी गई है. अमित मालवीय ने पिछले एक दशक में भाजपा की आईटी सेल को बखूबी चलाया है. यह सही है कि, पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर भाजपा विमर्श में पीछे जाती दिखी, लेकिन यह सच है कि, किसी भी पद पर किसी व्यक्ति को एक समय के बाद हटना ही उसके और उसके दल के लिए उचित होता है, लेकिन अमित मालवीय ने बहुत लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत अच्छा काम किया है. अब भाजपा की नई सोशल मीडिया टीम को उसे आगे ले जाने की बड़ी चुनौती होगी. शुभकामनाएं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.