मछली बाज़ार से पीएम मोदी का नाम जोड़े जाने पर क्यों हैं यहां के व्यापारी आमने सामने

    • Author, अजीत गढ़वी
    • पदनाम, संवाददाता, बीबीसी न्यूज़ गुजराती
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

गुजरात के सूरत के नानपुरा लक्कड़कोट इलाक़े में एक नया मछली बाज़ार खुला है. व्यापारियों ने इस बाज़ार का नाम 'श्री नरेंद्र मोदी थोक मछली बाज़ार' रखा. इसको लेकर अब विवाद हो रहा है.

हालांकि, इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आने के बाद प्रधानमंत्री के नाम वाला बोर्ड अचानक हटा दिया गया और उस पर एक सफ़ेद कपड़ा डाल दिया गया है.

मछली बाज़ार में कुछ लोगों का मानना ​​है कि इस बाज़ार का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा जाना चाहिए.

उनका कहना है कि पीएम मोदी ने मत्स्य उद्योग के विकास के लिए करोड़ों रुपये के अनुदान के साथ एक विशेष योजना शुरू की थी.

दूसरी ओर कुछ व्यापारी जो इसका विरोध करते हैं, उनका मानना ​​है कि पीएम मोदी पूरी तरह शाकाहारी हैं और इसलिए उनका नाम मछली बाज़ार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

मछली बाज़ार के व्यापारियों का क्या कहना है?

हालांकि, नानपुरा मछली बाज़ार का अब तक आधिकारिक तौर पर उद्घाटन नहीं हुआ है, लेकिन बाज़ार में काम शुरू हो चुका है.

सूरत मछली व्यापारी संघ के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने बीबीसी को बताया, "प्रधानमंत्री की ओर से मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों के कारण हमने इस बाज़ार का नाम 'श्री नरेंद्र मोदी थोक मछली बाज़ार' रखने का निर्णय लिया है. मेरा मानना ​​है कि इसमें कोई बुराई नहीं है."

उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री मोदी ने 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना शुरू की, जिसमें से पहला आवंटन सूरत नगर निगम को इस नए मछली बाज़ार के लिए 3 करोड़ रुपये का था."

वह कहते हैं, "पिछला बाज़ार बहुत छोटा था और वहां कोई सुविधा नहीं थी. यहां पार्किंग, सीसीटीवी, कॉन्फ़्रेंस रूम जैसी सभी सुविधाएं हैं. इसलिए समुद्री भोजन का व्यापार करने वाले लोगों को बहुत राहत मिली है."

दूसरी ओर मछली बाज़ार के एक अन्य नेता सुरेंद्र लक्ष्मी का कहना है कि "प्रधानमंत्री मोदी शुद्ध शाकाहारी हैं, इसलिए मछली बाज़ार के साथ उनका नाम जोड़ना उनकी छवि को नुक़सान पहुंचाता है."

उन्होंने कहा, "यहां के अधिकांश लोग कहार जाति के हैं, इसलिए इस बाज़ार का उद्घाटन मछुआरा समुदाय के किसी व्यक्ति की ओर से किया जाना चाहिए और बाज़ार के नाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम हटा दिया जाना चाहिए."

सरकार की ओर से इस बाज़ार के लिए आवंटित धनराशि के मुद्दे पर वह कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि मछली उद्योग को इस सरकार के सत्ता में आने के बाद ही बढ़ावा मिला हो. मत्स्य पालन मंत्रालय कई दशकों से अस्तित्व में है और इस उद्योग के विकास के लिए काम कर रहा है. इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि यह विकास केवल प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से ही हुआ है."

सूरत का नया मछली बाज़ार कैसा है?

सूरत के नानपुरा इलाक़े में हाल ही में एक मछली बाज़ार खुला है, जिसके लिए नगर निगम ने ज़मीन आवंटित की है और व्यापारियों को दुकानें पट्टे पर दी गई हैं.

फ़िलहाल, मछली व्यापारियों को प्रति माह नौ हज़ार रुपये किराया देना पड़ता है.

मछली व्यापारी संघ के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने कहा कि मछली बाज़ार का प्रस्ताव 2018 में ही स्वीकृत हो गया था, लेकिन कुछ क़ानूनी मुद्दों और फिर कोरोना महामारी के कारण मछली बाज़ार के खुलने में देरी हुई है.

उन्होंने कहा कि मछली बाज़ार में 80 दुकानें हैं और यहां समुद्री भोजन पोरबंदर, द्वारका, वेरावल और कच्छ के साथ-साथ मुंबई सहित देश के अन्य हिस्सों से भी आता है.

नवसारीवाला कहते हैं, "गुजरात की राजकीय मछली मानी जाने वाली घोल मछली भी यहाँ आती है. इसके अलावा दारा, पॉम्फ्रेट, कतला मछली और झींगा भी यहाँ आते हैं. जब कच्छ का रण बारिश के पानी से भर जाता है, तो वहाँ एक ख़ास तरह का झींगा पैदा होता है, जो इस बाज़ार में भी आता है."

सूरत के नए मछली बाज़ार में कई दुकानें महिलाएं चला रही हैं. मछली बेचने के अलावा वे बाहर से भी ऑर्डर लेती हैं और बिक्री खातों का काम संभालती हैं.

महिलाओं का कहना है कि मछली बाज़ार ने उन्हें आर्थिक आज़ादी दी है.

दक्षाबेन कहार व्यापारी हैं. वह कहती हैं, "जब यह मछली बाज़ार नहीं था, तब हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था."

"यह बाज़ार खुल गया है, इसलिए हम महिलाएं यहां अच्छा कारोबार कर सकती हैं. हम सुबह चार बजे पहुंच जाते हैं. हम इस काम का सारा हिसाब-किताब भी ख़ुद ही करते हैं."

सूरत के मछली बाज़ार में गंदगी की बड़ी समस्या

सूरत में भले ही एक नया मछली बाज़ार खुल गया है, लेकिन जल निकासी व्यवस्था में अभी भी खामी है. इस वजह से गंदा पानी बाज़ार में भर जाता है.

ऐसी शिकायतें हैं कि यहां हज़ारों किलो मछली, झींगा आदि खुले में रखे जाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

बीबीसी की टीम जब इस मछली बाज़ार में पहुंची, तो कई व्यापारियों को ख़ुद ही सीवेज का निपटान करते हुए देखा गया. इसके अलावा कई स्थानों पर कूड़े के ढेर भी दिखाई दिए.

मछली बाज़ार के व्यापारी सुरेंद्र लक्ष्मी कहते हैं, "नगर निगम हमसे किराए के रूप में हर महीने नौ हज़ार रुपये वसूलता है, फिर भी निगम ने कोई साफ-सफाई की सुविधा नहीं दी है."

"हर जगह गंदगी फैली हुई है, जिससे लोगों के बीमार पड़ने की संभावना है. निगम को यहां सफाई कर्मचारियों की तैनाती करनी चाहिए."

इस संबंध में सूरत नगर निगम के कार्यकारी अभियंता राजेश गांजावाला ने सोमवार को मीडिया को बताया कि "नामकरण के संबंध में हमें जो प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, उसे सांस्कृतिक समिति को भेज दिया गया है. अब समिति इस पर निर्णय लेगी."

हालांकि, इसके ठीक अगले दिन मंगलवार को इस बारे में मीडिया में खबरें आने के बाद मछली बाज़ार का बोर्ड हटा दिया गया और उसकी जगह सफेद कपड़ा लगा दिया गया.

मछली बाज़ार में प्रदूषण के मुद्दे के संबंध में उप स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित गामित ने कहा, "वर्तमान में बाज़ार में जल निकासी कक्ष में समस्या है, जिसकी मरम्मत का काम चल रहा है."

"अंदर फैले कचरे की सफाई की ज़िम्मेदारी मछली संघ की होगी. हम गंदगी के मामले की जांच करेंगे."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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