तमिलनाडु: टीवीके के मंत्री क्यों देख रहे जोसेफ़ विजय में पीएम का चेहरा?

    • Author, विजयानंद अरुमुगम
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

"जो लोग सुबह या शाम, घड़ी देखे बिना काम करते हैं, वो ही भविष्य में भारत के प्रधानमंत्री होंगे."

तमिलनाडु सरकार में मंत्री सरथकुमार ने 18 अगस्त को विधानसभा में यह बयान दिया.

टीवीके के कई मंत्री मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय को "भविष्य का प्रधानमंत्री" बता रहे हैं.

इस पर तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगौर ने कहा है कि टीवीके के लोग अभी भी प्रशंसक मंडली वाली मानसिकता में जी रहे हैं.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद, विजय के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो उस वक़्त कांग्रेस ने सबसे पहले अपने पांच विधायकों का समर्थन देने की पेशकश की थी.

उस समय पनैयूर में टीवीके नेता विजय से मुलाक़ात करने वाले कांग्रेस नेता गिरीश चोडांकर ने घोषणा की थी कि "स्थानीय निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव में भी टीवीके के साथ गठबंधन जारी रहेगा."

10 मई को जोसेफ़ विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के समारोह में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी शामिल हुए थे. विजय की सरकार में कांग्रेस को दो मंत्री पद दिए गए.

इस बीच, पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय को 'प्रधानमंत्री बनने वाले नेता' के तौर पर उनके मंत्री जिस तरह से पेश कर रहे हैं, उससे कांग्रेस के भीतर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

'आज के मुख्यमंत्री, कल के प्रधानमंत्री'

18 अगस्त को विधानसभा में मानव संसाधन प्रबंधन विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री सरथकुमार ने कहा, "पीएम विजय भविष्य में प्रधानमंत्री बनेंगे."

22 अगस्त को विरुधुनगर में आयोजित एक निजी रोज़गार मेले में समाज कल्याण मंत्री जगदीश्वरी शामिल हुईं. इस दौरान उन्होंने कहा, "आज के सीएम, कल के पीएम. भविष्य में सिर्फ हमारी ही सरकार होगी."

इसके बाद एक जनसभा में राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने कहा, "मुख्यमंत्री सिर्फ तमिलनाडु पर शासन करने वाली ताक़त नहीं हैं, बल्कि वह भविष्य के भारत पर शासन करने में सक्षम ताक़त के रूप में उभर सकते हैं."

तमिलनाडु के मत्स्य पालन मंत्री श्रीनाथ ने एक मंच पर कहा, "मुख्यमंत्री जहां भी जाते हैं, उन पर फोकस रहता है. कल दिल्ली में भी उनका राज हो सकता है."

तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र के टीवीके विधायक श्रीनिवास सेतुपति ने एक जनसभा में कहा, "2029 में जोसेफ विजय के लिए भारत का प्रधानमंत्री बनना संभव है. हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं."

उन्होंने यह भी कहा, "तीन साल में तमिलनाडु बेहतर हो जाएगा. उसके बाद भारत बेहतर हो जाएगा. अगर भारत को बेहतर होना है तो एक नेता चाहिए. ऐसे एकमात्र नेता हमारे मुख्यमंत्री हैं."

'प्रशंसक मंडली वाली मानसिकता'

टीवीके के मंत्रियों की ओर से लगातार दिए जा रहे ऐसे बयानों को लेकर तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर से पत्रकारों ने सवाल किया.

उन्होंने कहा, "प्रशंसक मंडली वाली मानसिकता में रहने वाले लोगों को बदला नहीं जा सकता."

प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, "वे परिसीमन लाने की योजना बना रहे हैं. हम इस लड़ाई में उलझे हैं."

वरिष्ठ पत्रकार श्याम कहते हैं, "मणिकम टैगोर की आलोचना से पता चलता है कि टीवीके के पदाधिकारी और मंत्री अभी तक राजनीति में परिपक्व नहीं हुए हैं."

वरिष्ठ पत्रकार मालान कहते हैं, "जोसेफ़ विजय को प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करना कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा करेगा. लेकिन यह बात सिर्फ टीवीके के लोग ही उठा रहे हैं. पार्टी नेतृत्व की ओर से इसपर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है."

'राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश'

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जोसेफ़ विजय को प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करने के पीछे कई रणनीतियां हो सकती हैं.

श्याम कहते हैं, "राज्य की राजनीति में जीत हासिल कर सरकार बनाने के बाद टीवीके अपने नेता विजय को सिर्फ़ राज्य के नेता तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डालने वाले नेता के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रही है."

फ़िल्मी पृष्ठभूमि से राजनीति में आए विजय के प्रशंसकों का ज़िक्र करते हुए वह कहते हैं, "उनका मानना है कि इससे प्रशंसकों को सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ताओं में बदलने और पार्टी के आधार को अगले स्तर तक ले जाने के लिए प्रेरणा मिलेगी."

श्याम आगे कहते हैं, "कांग्रेस समेत गठबंधन सहयोगियों के साथ समझौते में रहते हुए भी टीवीके के महत्व और बातचीत की ताक़त को बढ़ाकर दिखाने के लिए इसे एक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है."

वरिष्ठ पत्रकार मालान भी इसी तरह की बात कहते हैं, "पार्टी के लोग चाहते हैं कि टीवीके को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित हो. इसका उद्देश्य यह है कि राष्ट्रीय मीडिया टीवीके को केवल एक राज्य पर शासन करने वाली पार्टी के रूप में न देखे."

मालान ने यह भी बताया कि तमिलनाडु में पहले भी राज्य की पार्टियों के नेताओं को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की कोशिशें हुई हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके प्रमुख जयललिता ने 'मोदी या लेडी' का नारा दिया था. इससे पहले दिसंबर 2013 में हुई एआईएडीएमके की आम परिषद की बैठक में जयललिता को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने का प्रस्ताव पारित किया गया था.

हालांकि, जयललिता ने कहा था कि यह पार्टी का फ़ैसला है और उन्होंने ख़ुद को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने के बारे में अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है.

2014 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके ने तमिलनाडु ने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी.

इस मामले में एक अलग नज़रिया पेश करते हुए श्याम कहते हैं, "2029 के लोकसभा चुनाव के दौरान अगर टीवीके जीत हासिल करती है और उसके सांसद चुने जाते हैं, तो कुछ चीज़ें होने की संभावना है."

उनका कहना है कि इसके पीछे दीर्घकालिक योजना यह हो सकती है कि टीवीके राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण फ़ैसले तय करने वाली ताक़त के रूप में उभरे.

मालान कहते हैं, "टीवीके का मानना है कि उसे जनता का समर्थन हासिल है, इसलिए वह राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण ताक़त बनेगी."

वह कहते हैं, "टीवीके का यह नारा लोकसभा चुनाव में ज़्यादा असर नहीं डालेगा. प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार राहुल गांधी होंगे."

मालान कहते हैं, "फ़िलहाल टीवीके इंडिया गठबंधन में नहीं है. साल 2029 में इंडिया गठबंधन में शामिल अन्य पार्टियां राहुल गांधी को स्वीकार करेंगी या नहीं, यह महत्वपूर्ण है. इसके लिए अभी समय है, इसलिए 'प्रधानमंत्री विजय' के नारे को ज़्यादा गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है."

टीवीके का क्या कहना है?

बीबीसी तमिल ने टीवीके के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में से एक एडवोकेट सत्यकुमार से पूछा कि क्या इस तरह की बयानबाज़ी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की रणनीति के तहत की जा रही है.

वह कहते हैं, "जोसेफ़ विजय का प्रधानमंत्री बनना समय की मांग है. खास तौर पर भारत के मतदाताओं में जेन-ज़ी पीढ़ी के लोगों की संख्या काफ़ी है. मुख्यमंत्री जोसेफ़ विजय उनकी पसंद हैं."

वह कहते हैं, "वो एक मज़बूत नेता की उम्मीद कर रहे हैं. राज्य की मौजूदा पार्टियों में मज़बूत नेता नहीं हैं. यह विजय के लिए फ़ायदेमंद साबित हुआ है."

जब उनसे पूछा गया कि "क्या उत्तर भारत में टीवीके के नेता को स्वीकार किया जाएगा?"

उन्होंने कहा, "जोसेफ़ विजय के भाषणों का उत्तर भारतीय भाषाओं में अनुवाद कर उन्हें फैलाया जा रहा है. उनका आधुनिक रूप और दो साल में सत्ता हासिल करना जैसी बातें भरोसा पैदा कर रही हैं."

कांग्रेस की आलोचना पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा, "जोसेफ़ विजय गठबंधन का चेहरा होंगे."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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