You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
मां ने की अपने तीन बच्चों की हत्या, क्या जूरी के सामने कोई वजह उन्हें दोषमुक्त साबित कर पाएगी
- Author, एना फागुय
- पदनाम, मैसाचुसेट्स की अदालत से रिपोर्टिंग
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
लिंडसे क्लैंसी पर चल रहे मुक़दमे के मामले ने पिछले पांच हफ़्तों से अमेरिकी लोगों का ध्यान खींचा हुआ है.
36 साल की पूर्व नर्स लिंडसे क्लैंसी ने मैसाचुसेट्स में घर के बेसमेंट में अपने तीन छोटे बच्चों की हत्या कर दी थी.
उन पर फ़र्स्ट-डिग्री मर्डर के तीन मामले दर्ज हैं. वह इस बात से इनकार नहीं करतीं कि उन्होंने साल 2023 में अपने दो बेटों और एक बेटी की हत्या की थी.
लेकिन उनके वकील का तर्क है कि उस समय वह प्रसव के बाद होने वाले मनोविकार यानी पोस्टपार्टम साइकोसिस से जूझ रहीं थीं और इसलिए सही और ग़लत के बीच अंतर नहीं कर सकीं.
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष का तर्क है कि क्लैंसी ने बच्चों की हत्या करने का फ़ैसला सोच-समझकर और जान-बूझकर लिया था और उस समय वह सही और ग़लत के बीच अंतर समझती थीं.
सोमवार सुबह नौ महिलाओं और तीन पुरुषों वाली जूरी विचार-विमर्श जारी रखेगी. उसके सामने कई विकल्प हैं.
- दोषी नहीं
- मानसिक विक्षिप्तता के कारण दोषी नहीं
- फ़र्स्ट-डिग्री मर्डर
- सेकंड-डिग्री मर्डर
- ग़ैर-इरादतन हत्या
दोषी नहीं / मानसिक तौर पर विक्षिप्त होने से दोषी नहीं
यह मामला पोस्टपार्टम साइकोसिस की दलील पर निर्भर करता है.
उनकी क़ानूनी टीम ने तर्क दिया कि अपने सबसे छोटे बच्चे को जन्म देने के बाद क्लैंसी को एक आवाज़ सुनाई देती थी और वह भ्रम में थी. उस आवाज़ ने उनसे बच्चों को मारने के लिए कहा था.
विशेषज्ञ गवाहों ने अदालत को बताया कि यह बीमारी कितनी गंभीर हो सकती है और परिवार के सदस्यों ने क्लैंसी की मानसिक स्थिति के बारे में गवाही दी.
मैसाचुसेट्स के क़ानून के तहत क्लैंसी पर यह साबित करने की जिम्मेदारी नहीं है कि वह मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं.
इसके बजाय अभियोजन पक्ष को यह बिना किसी संदेह के साबित करना होगा कि जब क्लैंसी ने अपने बच्चों की हत्या की, तब वह इसके लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार थीं.
आपराधिक मामलों की वकील एलीस हर्शॉन ने बीबीसी न्यूज़ को यह जानकारी दी.
अभियोजन पक्ष यह दो में से किसी एक तरीके से साबित कर सकता है.
पहला, यह साबित करके कि उस समय क्लैंसी किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित नहीं थीं. और दूसरा, यह साबित करके कि मानसिक बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद वह ख़ुद को नियंत्रित कर सकती थीं और जानती थीं कि वह जो करने जा रही थी, वह ग़लत था.
अगर जूरी क्लैंसी को दोषी नहीं पाती है, तो इसका मतलब होगा कि उन्हें रिहा कर दिया जाएगा. हालांकि, माना जा रहा है कि इसकी संभावना काफ़ी कम है.
इससे कहीं ज्यादा संभावना इस नतीजे की है कि वह मानसिक विक्षिप्तता के कारण दोष मुक्त हो जाएं. ऐसी स्थिति में क्लैंसी को एक अस्पताल में हिरासत में रखा जाएगा.
हर्शॉन ने कहा, "मामला असल में इस बात पर आकर रुकता है कि वह अपनी बाकी ज़िंदगी कहां बिताएंगी. बचाव पक्ष का मानना है कि उन्हें मनोचिकित्सा केंद्र में होना चाहिए, जबकि अभियोजन पक्ष का मानना है कि उन्हें राज्य की जेल में होना चाहिए."
फ़र्स्ट-डिग्री मर्डर
क्लैंसी के लिए यह सबसे गंभीर संभावित नतीजा है. इसमें उन्हें फ़र्स्ट-डिग्री मर्डर का दोषी ठहराया जा सकता है, जिसका मतलब किसी व्यक्ति की जानबूझकर और पहले से योजना बनाकर हत्या करना.
मैसाचुसेट्स राज्य में इस अपराध में दोषी ठहराए जाने पर बिना पैरोल की संभावना के उम्रकैद की अनिवार्य सज़ा होती है.
न्यूयॉर्क लॉ स्कूल की प्रोफ़ेसर और मेंटल हेल्थ लॉ की विशेषज्ञ हीदर कुकुलो ने बीबीसी से कहा कि अगर जूरी यह नतीजा चुनती है, तो जूरी को प्रभावी तौर पर क्लैंसी को "एक राक्षस" मानना होगा.
जूरी के सदस्यों को यह मानना होगा कि क्लैंसी को दोषी ठहराने के लिए अपराध में अत्यधिक क्रूरता या बर्बरता थी या हत्या पहले से योजनाबद्ध थी या दोनों बातें थीं.
इसका मतलब होगा कि अभियोजन पक्ष ने साबित कर दिया है कि क्लैंसी को राहत देने वाली कोई भी वजह मौजूद नहीं थी.
इस मामले में मानसिक बीमारी या मानसिक विकार, जैसा कि कानून में इसकी व्याख्या की गई है, राहत देने वाला आधार हो सकता है.
सरकारी वकील जेनिफर स्प्रेग ने अंतिम दलीलों के दौरान कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि क्लैंसी मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं, लेकिन उनकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं थी कि वह सही और ग़लत के बीच अंतर न समझ सकें.
अभियोजन पक्ष (सरकारी) के विशेषज्ञ गवाहों ने इस बात पर संदेह जताया कि क्लैंसी ने वास्तव में वह आवाज़ सुनी थी, जिसके बारे में उनका कहना था कि उसने उन्हें अपने बच्चों की हत्या करने का आदेश दिया था.
सेकंड-डिग्री मर्डर
मैसाचुसेट्स के क़ानून के तहत यह ऐसे किसी भी मर्डर के लिए लागू होता है, जो फर्स्ट-डिग्री मर्डर नहीं है.
यह उन हत्याओं पर लागू होता है, जो दुर्भावना या अत्यधिक लापरवाही के साथ की गई हों, लेकिन जिनकी पहले से योजना न बनाई गई हो.
कुकुलो ने कहा, "इस फ़ैसले के लिए जूरी के सदस्य शायद इस बात को लेकर आश्वस्त न हों कि हत्या से पहले की घटनाएं, इतनी गंभीर थीं कि हत्या के लिए पहले से योजना बनाई गई."
सेकंड-डिग्री मर्डर के मामले में भी क्लैंसी को उम्रक़ैद की सज़ा होगी, लेकिन पैरोल की संभावना रहेगी.
ग़ैर-इरादतन हत्या
जज ने जब जूरी को क्लैंसी को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराने का विकल्प दिया, तो उसे एक और विकल्प मिला. यह पहले बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच विवाद का मुद्दा था.
ग़ैर-इरादतन हत्या का मतलब अनजाने में, ग़लती से या लापरवाही के कारण किसी की मौत होना है. इसमें हर मामले में अधिकतम 20 साल की जेल की सज़ा हो सकती है.
विशेषज्ञों ने कहा कि ग़ैर-इरादतन हत्या और दोनों तरह के मर्डर के फ़ैसलों के बीच हत्या का इरादा एक महत्वपूर्ण अंतर है.
कुकुलो ने कहा, "यह विकल्प जूरी को यह मानने की अनुमति देता है कि हत्याएं पहले से योजनाबद्ध या सोच-समझकर नहीं की गई थीं, बल्कि क्लैंसी ने अचानक ऐसा कर दिया."
उन्होंने कहा कि ग़ैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष के लिए यह साबित करना जरूरी नहीं है कि क्लैंसी का इरादा बच्चों की मौत का कारण बना था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.