ज़ोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम का किया विरोध

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अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने मंगलवार को कहा कि वह मेडिसन स्क्वेयर गार्डन में होने वाले उस प्रस्तावित कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे.

हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके पास इस निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार हो भी सकता है और नहीं भी. यह कार्यक्रम 29 अगस्त को होना है.

मोहन भागवत मंगलवार को दिन में ही अमेरिका पहुँच गए थे. यह यात्रा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है. न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान वह 'यूनिवर्सल वननेस' कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और शनिवार को प्रसिद्ध मेडिसन स्क्वेयर गार्डन में क़रीब 5,000 लोगों की सभा को संबोधित करेंगे.

न्यूयॉर्क में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममदानी ने कहा, "मैं इस रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर के पास है या नहीं."

ज़ोहरान ममदानी के माता-पिता भारतीय मूल के हैं. उनकी माँ जानी-मानी फ़िल्मकार मीरा नायर हैं. मीरा नायर ने 'मिसिसिपी मसाला', 'मॉनसून वेडिंग', 'सलाम बॉम्बे' और 9/11 की पृष्ठभूमि में 'द रिलक्टेंट फंडामेंटलिस्ट' जैसी अहम फ़िल्में बनाई हैं. मीरा नायर भी डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रोग्रेसिव विंग से जुड़ी हैं.

ज़ोहरान के पिता, महमूद ममदानी कोलंबिया यूनिवर्सिटी के चर्चित प्रोफ़ेसर रहे हैं. वो केपटाउन यूनिवर्सिटी में भी प्रोफ़ेसर थे. केपटाउन में ही 1848 में शुरू हुए दक्षिण अफ़्रीका के सबसे पुराने स्कूल सेंट जॉर्ज ग्रामर में उन्होंने शुरुआती पढ़ाई-लिखाई की थी.

ज़ोहराम ममदानी ने क्या कहा?

मंगलवार को ममदानी से आरएसएस के मेडिसन स्क्वेयर गार्डन (एमएसजी) में प्रस्तावित कार्यक्रम और इसके ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों को लेकर सवाल पूछा गया था.

उनसे पूछा गया था कि क्या एमएसजी में मोहन भागवत की होने वाली रैली को रद्द कर दिया जाना चाहिए?

इसके जवाब में ममदानी ने कहा था, "मैं अपने शहर के इतिहास में पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के रूप में भी यहाँ खड़ा हूँ और मेरी मां की पूरी रिश्तेदारी अब भी भारत में है."

उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने उन्हें भारत की जिस तस्वीर से परिचित कराया और जिस भारत को उन्होंने बचपन से क़रीब से जाना, वह "एक बहुलतावादी समाज और एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र का भारत था, जो भारत से जुड़े हर व्यक्ति को अपनाने में भरोसा रखता था."

ममदानी ने कहा, "इसलिए किसी भी देश की ऐसी बहिष्कारवादी सोच पर आधारित आंदोलन के उभार को देखना परेशान करने वाला है. मैं इसके सख़्त विरोध में हूँ, न केवल एक भारतीय-अमेरिकी के तौर पर, बल्कि ऐसे शहर के मेयर के तौर पर भी जो हर व्यक्ति के अपनेपन में गहरा भरोसा रखता है, चाहे उसका रंग, विचार, धर्म, आस्था या मूल स्थान कुछ भी हो."

कई अंतरधार्मिक और नागरिक अधिकार संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने एमएसजी में मोहन भागवत की मौजूदगी का विरोध किया और इस प्रतिष्ठित आयोजन स्थल से कार्यक्रम रद्द करने की अपील की.

इन संगठनों में हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल और इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क समेत कई अन्य संगठन शामिल थे.

भागवत की मेज़बानी कर रहे अहेड फोरम की ओर से आयोजित यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आरएसएस प्रमुख 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में इस कार्यक्रम में शामिल होंगे.

पोस्ट में कहा गया है, "इस कार्यक्रम का संदेश समय से परे और सार्वभौमिक है- वसुधैव कुटुबंकम. यह लोगों से कृत्रिम विभाजनों और मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता को जोड़ने वाले रिश्तों को पहचानने, आपसी सम्मान, सद्भाव और एकता की भावना अपनाने की अपील करता है."

मोहन भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा कर रहे हैं.

पीएम मोदी के आलोचक रहे हैं ममदानी

ज़ोहरान ममदानी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी खुलकर आलोचना करते रहे हैं. 21 जून 2023 को नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौक़े पर न्यूयॉर्क गए थे और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में योग दिवस की अगुआई की थी.

मोदी के इस दौरे को लेकर ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी असेंबली के सदस्य के तौर पर बयान जारी किया था. यह तीन लोगों का साझा बयान था.

ज़ोहरान ममदानी के अलावा सिटी काउंसिल मेंबर शहाना हनीफ़ और शेखर कृष्णा भी शामिल थे. इस बयान में कहा गया था कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मुसलमानों के ख़िलाफ़ जानलेवा दंगों को होने दिया था. इन तीनों ने न्यूयॉर्क के लोगों से मोदी के दौरे की निंदा करने की अपील की थी.

ज़ोहरान ममदानी ने एनआरसी की भी आलोचना की थी और कहा था कि बीजेपी हिन्दुत्व की विचारधारा से भारत की विविधता और धर्मनिरपेक्षता को ख़त्म करना चाहती है. ममदानी ने तब अपने ट्वीट में कहा था, ''भारत की विरासत यह रही है कि मेरी हिन्दू नानी उर्दू में कविता पढ़ती थीं और मुस्लिम दादा गुजराती में भजन गाते थे.''

एक अनुमान के मुताबिक़ अमेरिका में मुसलमान 30 से 40 लाख हैं. ज़ोहरान ममदानी फ़लस्तीनी इलाक़े में इसराइली क़ब्ज़े की खुलकर आलोचना करते रहे हैं. जब ममदानी ने प्राइमरी जीती तो इसराइल के मीडिया में कहा जा रहा था कि इसराइल विरोधी ज़ोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर बन सकते हैं.

ममदानी ने झेले हैं नस्ली हमले

ज़ोहरान ममदानी 2018 में अमेरिका के नागरिक बने, 2020 में न्यूयॉर्क स्टेट एसेंबली के सदस्य और 2025 में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर बन गए.

लेकिन इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि 34 साल के ममदानी ने अमेरिका की राजनीति में नई बहस छेड़ दी थी.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक ममदानी को निशाने पर ले रहे थे. ट्रंप ने कहा था कि अगर ज़ोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर बनते हैं तो वह फंड रोक देंगे.

ज़ोहरान ममदानी ने जब से न्यूयॉर्क सिटी के मेयर के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी जीती थी, तब से उन पर इस्लामोफ़ोबिक हमले और बढ़ गए थे.

ज़ोहरान ममदानी की मुस्लिम पहचान पर यूएस कांग्रेस के सदस्यों ने तंज़ किया था. ममदानी पर जिस तरह से खुलेआम नस्ली हमले हुए थे, उसे कई लोग अमेरिकी राजनीति में ऐसे हमले सामान्य होने की तरह भी देख रहे थे.

रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने तो जस्टिस डिपार्टमेंट को पत्र लिखकर ज़ोहरान ममदानी की नागरिकता रद्द कर वापस भेजने की मांग की थी. ज़ोहरान का जन्म युगांडा में हुआ था और 2018 में अमेरिका के नागरिक बने थे.

अमेरिकी फेडरल क़ानून के मुताबिक़ अमेरिका में किसी को नागरिकता से वंचित करना एक जटिल प्रक्रिया है. यह तब संभव हो पाता है, जब नागरिकता हासिल करने के दौरान वह व्यक्ति किसी धोखाधड़ी में शामिल रहा हो.

एंडी ओगल्स ज़ोहरान को 'छोटा मुहम्मद' कहकर संबोधित करते थे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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