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तमिलनाडु के सीएम विजय ने अमित शाह से मिलने के बाद क्या अपना रुख़ नरम कर लिया?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बयान से ऐसा लग रहा है कि उन्होंने परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख़ नरम किया है.
पहले वह लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या को स्थिर रखने की मांग कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने मांग की है कि संसद में हर राज्य की मौजूदा सीटों के प्रतिशत को सुरक्षित रखा जाए.
गुरुवार को मामल्लपुरम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विजय ने कहा, "मैं केंद्र सरकार से स्पष्ट गारंटी देने का आग्रह करता हूँ कि परिवार नियोजन में किसी राज्य की सफलता की वजह से संसद में उसके प्रतिनिधित्व का प्रतिशत कम नहीं होगा."
विजय के इस बयान से संकेत मिलता है कि 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में उनकी तरफ़ से पेश किए गए प्रस्ताव में परिसीमन के साफ़ विरोध वाले रुख़ में अब कुछ बदलाव आया है.
इसके उलट, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार से मांग की कि अगले 25 सालों तक लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या बरकरार रखी जाए.
विजय ने कहा, "1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक ख़त्म होने वाली है और परिसीमन विधेयक 2026 पर विचार किया जा रहा है. ऐसे में दक्षिणी राज्यों के बीच यह वास्तविक और साझी चिंता है कि मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर होने वाला परिसीमन संसद में हमारी मौजूदा आवाज़ को कमज़ोर कर सकता है."
उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य परिवार नियोजन, मानव विकास और आर्थिक वृद्धि के क्षेत्र में सबसे आगे रहे हैं.
विजय ने कहा, "ये उपलब्धियां राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की सफलता की कहानी है. इसकी वजह से हमारे प्रतिनिधित्व में कमी नहीं होनी चाहिए."
तमिलनाडु की दूसरी पार्टियां क्या कह रही हैं?
तमिलनाडु के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक्स पर लिखा है, ''लोकसभा सीटों के परिसीमन, तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव और कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव तीनों में एक ही रुख़ अपनाया गया है. लोकसभा की कुल 543 सीटों या तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए.''
''कांग्रेस पार्टी का रुख़ है कि इन मौजूदा सीटों की संख्या को अगले 25 सालों तक बरकरार रखा जाना चाहिए. हमें ख़ुशी है कि तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी और मुख्य विपक्षी दल भी इस रुख़ का समर्थन कर रहे हैं.''
एएमएमके नेता टीटीवी दिनाकरन ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के एक सप्ताह के भीतर ही परिसीमन पर अपना रुख़ बदलने को लेकर टीवीके सरकार पर हमला बोला है.
उन्होंने सवाल किया, "क्या टीवीके सरकार संसद के परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख़ बदल रही है?"
उन्होंने कहा कि गठबंधन के सांसदों की बैठक बुलाने और विधानसभा में परिसीमन के ख़िलाफ़ जल्दबाज़ी में प्रस्ताव पारित कराने के कुछ ही हफ़्तों बाद विजय की हालिया टिप्पणियां स्पष्ट विरोधाभास पेश करती हैं.
तमिलनाडु के ज़्यादातर राजनीतिक दलों का कहना है कि अगर परिसीमन के ज़रिए लोकसभा सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है.
आठ अगस्त को मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में हुई सांसदों की सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने का फ़ैसला किया गया.
मुख्यमंत्री विजय ने 12 अगस्त को विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया था.
प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर परिसीमन विधेयक पारित होता है और राज्यों की आबादी के आधार पर लोकसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन किया जाता है, तो दक्षिणी राज्यों से चुने जाने वाले सांसदों की संख्या कम होने की आशंका है.
इसलिए प्रस्ताव में ज़ोर दिया गया था कि लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या 543 ही रखी जानी चाहिए.
विपक्षी पार्टियों के निशाने पर विजय
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने पूछा है कि विजय का रुख़ क्या परिसीमन पर बदल रहा है?
चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए दयानिधि मारन ने कहा, "परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके का रुख़ स्पष्ट है कि वह निष्पक्ष परिसीमन चाहती है. लेकिन मुख्यमंत्री विजय का रुख़ अमित शाह के सामने आते ही बदल जाता है."
वरिष्ठ पत्रकार एसपी लक्ष्मणन ने बीबीसी तमिल से कहा, "मुख्यमंत्री विजय का परिसीमन के मुद्दे पर बात करना ग़लत नहीं है. लेकिन उन्होंने अपना रुख़ बदला है."
उन्होंने कहा, "परिसीमन को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए थी. इसके बजाय बिना किसी झिझक के केवल सर्वदलीय सांसदों की बैठक बुलाना ग़लत था."
उन्होंने यह भी माना कि इस मामले में डीएमके का यह आरोप सही लगता है कि सर्वदलीय सांसदों की बैठक में पारित प्रस्ताव कांग्रेस के रुख़ को स्वीकार करते हुए पारित किया गया था.
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में डीएमके ने भी सही क़दम नहीं उठाया.
उन्होंने कहा, "हम यह अनुरोध कर सकते थे कि तमिलनाडु विधानसभा में लाए गए प्रस्ताव को उसी रूप में समर्थन देने के बजाय उसमें कुछ अतिरिक्त बिंदु जोड़कर पारित किया जाए."
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर राज्य के राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय दलों पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
तमिलनाडु के क़ानून मंत्री निर्मल कुमार का कहना है कि विजय के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है.
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में जब मंत्री निर्मल कुमार से पूछा गया कि क्या परिसीमन के मुद्दे पर विजय सरकार का रुख़ बदल गया है, तो उन्होंने कहा, "हमारे रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है. इस बात में भी कोई बदलाव नहीं है कि संसद की 543 सीटों और तमिलनाडु की 39 सीटों को स्थायी रखा जाना चाहिए."
तमिलनाडु अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और टीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फेलिक्स गेराल्ड ने बीबीसी तमिल से कहा, "मुख्यमंत्री ने आज पूरे दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधि के तौर पर बात की है. लेकिन डीएमके इस पर झूठा प्रचार कर रही है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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