ईरान के लिए 'अनचाहा तोहफ़ा': अमेरिकी मिसाइलों और ड्रोन के रिवर्स इंजीनियरिंग की क्यों है चर्चा

ईरान का शाहेद-191 ड्रोन
इमेज कैप्शन, ईरानी स्कूली लड़कियां शाहेद -191 ड्रोन के सामने खड़ी हैं, जिसे अमेरिकी ड्रोन लॉकहिड मार्टिन आरक्यू-170 सेंटिनेंट ड्रोन की कॉपी है. तस्वीर अक्तूबर 2023 की है
    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

ईरान में अब उन अमेरिकी और इसराइली बमों और हथियारों की रिवर्स इंजीनियरिंग की चर्चा चल रही है, जो अब तक नहीं फटे हैं.

ईरान के मीडिया और विश्लेषक हालिया संघर्ष के दौरान मिले इन हथियारों को एक बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं.

उनका कहना है कि इससे देश की सैन्य क्षमता बढ़ाई जा सकती है.

ईरान में अंग्रेज़ी सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने 26 अप्रैल को रिपोर्ट दी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने होरमोज़गान प्रांत में '15 से अधिक भारी अमेरिकी मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया.'

रिपोर्ट में कहा गया कि इन हथियारों को "रिवर्स इंजीनियरिंग (तकनीक समझकर दोबारा बनाने) के लिए टेक्नोलॉजी और रिसर्च यूनिटों को सौंप दिया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, बरामद हथियारों में अमेरिका के चर्चित जीबीयू-57 बंकर-बस्टर बम और ज़ंजान क्षेत्र में मिले हजारों छोटे बम (बॉम्बलेट्स) भी शामिल हैं.

अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच 40 दिनों तक चले युद्ध के बाद 8 अप्रैल को दो हफ़्ते के लिए युद्धविराम की घोषणा की गई थी. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे फिर आगे बढ़ा दिया था.

'अनचाहा तोहफ़ा'

अमेरिका को एमक्यू-9 रिपर ड्रोन
इमेज कैप्शन, अमेरिका को एमक्यू-9 रिपर ड्रोन (फ़ाइल फ़ोटो)

ईरान के कट्टरपंथी स्टूडेंट न्यूज़ नेटवर्क (एसएनएन) ने एक मई को इसे "अनचाहा तोहफ़ा" बताया.

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उसका कहना था कि युद्ध का मैदान अब "देश के रक्षा उद्योग के लिए एक रिसर्च लैब" बन गया है.

एसएनएन के मुताबिक़, अमेरिका और इसराइल की ओर से दागे गए बम और हथियारों को एक रणनीतिक अवसर में बदल सकता है.

स्टूडेंट न्यूज़ नेटवर्क का कहना है कि ईरान में रह गए इन हथियारों का इस्तेमाल बेहतर टेक्नोलॉजी विकिसित करने में हो सकता है.

उसने इस बारे में पश्चिमी देशों का हवाला दिया है और कहा है कि उनका असली डर यही है कि ईरान इन आधुनिक हथियारों की 'गुप्त तकनीक' को समझने में लगा हुआ है.

रिपोर्ट में कहा गया कि प्रतिबंधों के कारण ईरान लंबे समय से रिवर्स इंजीनियरिंग पर निर्भर रहा है.

उदाहरण के तौर पर ईरान ने अमेरिकी हॉक मिसाइलों में बदलाव किया था. 2011 में अमेरिकी आरक्यू-170 ड्रोन मिसाइलों को जब्त करना भी ऐसी ही घटना थी.

एसएनएन का कहना है कि उसी घटना के बाद ईरान "कॉपी करने" से आगे बढ़कर "इनोवेशन" की दिशा में गया.

कट्टरपंथी अख़बार केहान के संपादक होसैन शरियतमदारी ने सुझाव दिया कि ऐसी तकनीक को चीन और रूस जैसे अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों के साथ साझा भी किया जा सकता है.

'हमारे लिए अच्छी और अमेरिका के लिए बुरी ख़बर'

टॉमहॉक मिसाइल
इमेज कैप्शन, टामहॉक मिसाइल

उन्होंने दावा किया कि युद्ध के दौरान टॉमहॉक और एजीएम-158 जैसी एडवांस मिसाइलें और एमक्यू-9 ड्रोन भी बड़ी संख्या में फेल हुए.

सरकारी मीडिया के कुछ चेहरों ने भी इसी तरह की बात दोहराई.

एक टीवी एंकर ने कहा कि "इन मिसाइलों की रिवर्स इंजीनियरिंग की जाएगी और भविष्य में इन्हें दुश्मनों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा सकता है.

सोशल मीडिया पर भी सरकार समर्थक यूज़र्स ने इसे "हमारे लिए अच्छी और अमेरिका के लिए बुरी ख़बर" बताया और कुछ ने "जल्द बड़े पैमाने पर उत्पादन" की भविष्यवाणी की.

तेहरान नगर निगम के अधिकारी एहसान खरामिद ने इसे "सिर्फ ख़बर नहीं, बल्कि ज्ञान की नई लड़ाई की शुरुआत" बताया.

उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया के अनुसार, ''इन हथियारों से अमेरिकी तकनीक के "छिपे हुए पहलुओं" का पता चल सकता है.''

मध्य पूर्व के विश्लेषक एहसान तकद्दोसी ने कहा कि इससे अमेरिका को नई तकनीक विकसित करने पर "दसियों अरब डॉलर" खर्च करने पड़ सकते हैं और वह सैन्य कार्रवाई में ज़्यादा सतर्क हो सकता है.

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि 'यह ऐसे है जैसे किसी जटिल ताले को बिना चाबी के समझ लेना. असली फ़ायदा उसे सीधे इस्तेमाल करने में नहीं, बल्कि उसकी तकनीक को समझकर दोबारा बनाने में है.'

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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