पाकिस्तान में अधिकारियों की विदेश यात्राओं से लेकर शादी समारोह तक के लिए जारी किए गए फ़रमान

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने देश में फिर से बड़े पैमाने पर ईंधन कटौती के तहत कई प्रतिबंधों की घोषणा की है.

वीडियो छोड़ें और जारी रखें
  • लॉस एंजेलिस में हेलिकॉप्टर क्रैश
  • जेलीफ़िश
  • यूपीआई पेमेंट पर चार्ज को लेकर ये बोले लोग
  • animal
  • Malaysia PM
  • trump
  • MP waterfall
  • महिला बाइकर

लाइव कवरेज

चंदन कुमार जजवाड़े, संदीप राय

  1. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा- 'संसद की स्थायी समिति में यूपीआई टैक्स प्रस्ताव पर नहीं हुई थी चर्चा'

    गौरव गोगोई
    इमेज कैप्शन, गौरव गोगोई

    कांग्रेस सांसद और लोकसभा में पार्टी के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा है कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने हाल ही में मोदी सरकार की ओर से घोषित यूपीआई टैक्स प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की थी.

    उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया, "जब वित्त विभाग के अधिकारी वित्त संबंधी समिति के सदस्यों से मिले थे, तब उनके पास यूपीआई टैक्स को लेकर कोई विशेष प्रस्ताव नहीं था."

    गौरव गोगोई के मुताबिक़, "एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) की ज़रूरत पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकार के प्रतिनिधियों के पास कोई स्पष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं था."

    गौरव गोगोई ने लिखा, "मैं फिर से कह रहा हूं कि हाल की यूपीआई टैक्स पॉलिसी छोटे व्यापारियों, विक्रेताओं और कारोबारों को नुक़सान पहुंचाने वाली हैं और यह बड़ी अमेरिकी कंपनियों के फ़ायदे के लिए है."

    उन्होंने लिखा, "टैक्स वापस लें और प्रधानमंत्री मोदी, आत्मसमर्पण करना बंद करें."

    वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गौरव गोगोई के पोस्ट को शेयर करते हुए एक्स पर लिखा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद की स्थायी समितियों की कार्यवाही, जिन्हें विशेषाधिकार प्राप्त और गोपनीय माना जाता है, उसका इस्तेमाल अब सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाने और राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए कर रही है."

    मनीष तिवारी के मुताबिक़, ये कहना कि यूपीआई से जुड़े हालिया फ़ैसले का समिति के "कुछ सदस्यों ने समर्थन किया था", संसद की समिति की गोपनीय कार्यवाही को ग़लत और भ्रामक तरीके से पेश करना है.

  2. अमेरिका ने फिर से फ़लस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वीज़ा देने से किया मना

    महमूद अब्बास ने पिछले साल भी यूएन में अपना भाषण वीडियो कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए दिया था (फ़ाइल फ़ोटो)
    इमेज कैप्शन, महमूद अब्बास ने पिछले साल भी यूएन में अपना भाषण वीडियो कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए दिया था (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका ने लगातार दूसरे साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए फ़लस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वीज़ा देने से इनकार कर दिया है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी ने इस मामले से जुड़े क़रीबी सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी है.

    वहीं बीबीसी फ़ारसी ने बताया है कि पिछले साल भी महमूद अब्बास को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपना वार्षिक भाषण वीडियो लिंक के माध्यम से देने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

    संयुक्त राष्ट्र महासभा का वार्षिक आयोजन आमतौर पर सितंबर के तीसरे सप्ताह मेंअमेरिका के न्यूयॉर्क में होता है और दुनियाभर के नेता वैश्विक चुनौतियों पर भाषण देते हैं.

  3. ईरान ने अमेरिकी एआई का ही इस्तेमाल कर अमेरिका पर किया हमला- रिपोर्ट

    सांकेतिक तस्वीर
    इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर

    बीबीसी न्यूज़ के अमेरिकी साझेदार सीबीएस न्यूज ने एक विशेष रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका के ख़िलाफ़ युद्ध में ईरान से जुड़े एक समूह ने अमेरिकी नौसेना को निशाना बनाने की कोशिश में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया.

    रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने इसके लिए अमेरिका में विकसित एआई का ही इस्तेमाल किया.

    यह रिपोर्ट एंथ्रोपिक नाम की कंपनी ने पिछले सप्ताह प्रकाशित की थी.

    एंथ्रोपिक ने समूह की पहचान नहीं बताई है, लेकिन इसे "ख़तरा पैदा करने वाला संगठन" कहा है. कंपनी ने बताया कि समूह ने इंटरनेट से सार्वजनिक जानकारी इकट्ठा करने, अमेरिकी नौसेना की स्थिति का पता लगाने और संभावित लक्ष्यों के बारे में सुझाव देने के लिए क्लाउड-आधारित एआई का इस्तेमाल किया.

    एंथ्रोपिक ने बताया है कि इस गतिविधि से जुड़े अकाउंट को ब्लॉक कर दिया गया है और उसने इस ख़तरे को रोकने के लिए अमेरिकी सरकार को इससे संबंधित जानकारी मुहैया कराई है.

    विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की घटना अधिक आम हो सकती हैं, क्योंकि अमेरिका के विरोधी सैन्य अभियानों को बढ़ावा देने के लिए एआई का रुख़ कर रहे हैं.

    विशेषज्ञों ने कहा कि एंथ्रोपिक के निष्कर्ष इस बात से मेल खाते हैं कि ईरान अपने रणनीतिक मक़सद के लिए तकनीक का इस्तेमाल किस तरह करता रहा है, जिसमें अमेरिका और इसराइल के साथ उसका संघर्ष भी शामिल है.

  4. एसपी सांसद नदवी ने यूसीसी के मु्द्दे पर लगाया आरोप, 'बीजेपी ने देश की संस्थाओं को कमज़ोर किया'

    समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी
    इमेज कैप्शन, रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

    यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने आरोप लगाया है कि 'बीजेपी एक ख़ास, अनरजिस्टर्ड लोगों का गिरोह है, जिसने पर्दे के पीछे से देश की संस्थाओं को कमज़ोर किया और वहां अपनी विचारधारा के लोगों को शामिल किया.'

    उन्होंने कहा, "ख़ुद अनरजिस्टर्ड होकर ऐसा करना, देश के साथ अपराध की सबसे बड़ी मिसाल है. ऐसे लोग जो आज भी अपने संगठन को रजिस्टर्ड कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हों, उन्हें भारत के अलग-अलग इलाक़ों की धार्मिक और सामाजिक परंपरा को बताने की ज़रूरत नहीं है."

    उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद नदवी ने कहा, "आरएसएस के लोग जो सन 1925 में पैदा हुए आज तक ख़ुद का रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए. जिन्होंने दशकों तक तिरंगा नहीं फहराया, जिनके पूर्वजों ने कभी आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे आज हिंदुओं के, हिन्दू संस्कृति के, हिन्दुस्तानी तहज़ीब के ठेकेदार बन गए हैं?"

    नदवी ने कहा, "उन्होंने ये दिखाया कि हम ही मुसलमानों की नाक रगड़ सकते हैं, उन्हें कमज़ोर कर सकते हैं, उनकी मस्ज़िदों को ढहा सकते हैं."

    उन्होंने सवाल उठाए, "ये लोग यूसीसी की बात करते हैं. अगर इंशाअल्लाह या माशाअल्लाह कहने पर किसी का ट्रांसफ़र हो रहा है तो जो संभल में गदा लेकर नाच रहे थे, उनके ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं हुई. अगर मस्ज़िदों पर आरोप लग रहा है कि उनके पास दस्तावेज़ नहीं हैं तो सड़कों पर हज़ारों लाखों मंदिर क्यों बन रहे हैं."

    "ये देश के भविष्य को और आने वाली पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं, देश सकारात्मक चीज़ों से आगे बढ़ेगा, नफ़रत से नहीं."

    दरअसल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि साल 2029 से पहले बीजेपी के शासन वाले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू कर दिया जाएगा. उनके इस बयान के बाद कई सियासी दलों और नेताओं ने इसका विरोध किया है.

  5. शी जिनपिंग के संभावित अमेरिका दौरे से पहले ईरानी विदेश मंत्री अराग़ची ने चीन में क्या कहा

    अराग़ची और चीनी विदेश मंत्री
    इमेज कैप्शन, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने चीन की यात्रा के दौरान कहा, कि ईरान अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने चीन में कहा है कि ईरान उन राजनयिक समाधानों का स्वागत करता है जो ईरानी लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित करे.

    अराग़ची ने अमेरिका पर 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (एमओयू) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, उन्होंने क्षेत्रीय देशों के साथ ईरान की बातचीत की शुरुआत का ज़िक्र किया और विदेशी ताक़तों की मौजूदगी से मुक्त एक क्षेत्रीय व्यवस्था की स्थापना का आह्वान किया.

    ईरानी विदेश मंत्री की चीन यात्रा, चीनी राष्ट्रपति की अमेरिका की संभावित यात्रा से पहले हुई है.

    बीजिंग में अराग़ची ने यह भी कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है.

    बीते दो सालों में अब्बास अराग़ची की चीन की यह दूसरी यात्रा है.

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लगभग एक सप्ताह में वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने की उम्मीद है, हालांकि चीन ने अभी तक इस यात्रा की पुष्टि नहीं की है.

    दो दिन पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल नेटवर्क ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान "बहुत जल्द" समझौता चाहता है. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन आगे बढ़ने का अंतिम निर्णय उनका ही होगा.

  6. अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के विरोध के बावजूद फ़ेडरल रिज़र्व ने लिया ये फ़ैसला, माइकल रेस, बिज़नेस रिपोर्टर, वॉशिंगटन डीसी

    राष्ट्रपति ट्रंप ब्याज दरें बढ़ाने के ख़िलाफ़ रहे हैं
    इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति ट्रंप ब्याज दरें बढ़ाने के ख़िलाफ़ रहे हैं

    अमेरिका में तीन साल से अधिक समय में पहली बार ब्याज दरें बढ़ाई गई हैं. यह कवायद बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने की कोशिश में की गई है और इन्हें आगे भी बढ़ाया जा सकता है.

    फेडरल रिजर्व ने सर्वसम्मत फ़ैसले में ब्याज दरों को बढ़ाकर 3.75% से4% के बीच कर दिया. पहले यह 3.5% से 3.75% के बीच था.

    यह फ़ैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े विरोध के बावजूद लिया गया. ट्रंप ने ब्याज दरों में कटौती की मांग की थी.

    फेडरल रिज़र्व के प्रमुख केविन वॉर्श ने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि "महंगाई बहुत ज़्यादा है और यह लंबे समय से बनी हुई है." उन्होंने इसे "गंभीर" और "जिम्मेदारी भरा फैसला" बताया.

    हालांकि, ट्रंप ने कहा कि ब्याज दरें "1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि हम दुनिया में सबसे बेहतर क्रेडिट हैं, इसमें कोई मुक़ाबला नहीं है."

    ब्याज दरें बढ़ने से कर्ज, होम लोन और क्रेडिट कार्ड लेना महंगा हो जाता है. हालांकि, इससे बचत पर बेहतर रिटर्न मिल सकता है.

    बुधवार को फैसले के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वॉर्श ने कहा कि फेडरल रिज़र्व के नेतृत्व के बीच "आशावाद का माहौल" है, लेकिन महंगाई अब भी एक समस्या बनी हुई है.

    कई केंद्रीय बैंकों की तरह फेड का लक्ष्य भी महंगाई को 2% या उससे नीचे रखना है. वॉर्श ने कहा कि अमेरिका में महंगाई पांच साल से अधिक समय से इस सीमा से ऊपर बनी हुई है.

    इस स्थिति ने अमेरिकी मतदाताओं के लिए चीजों की बढ़ती कीमत और उन्हें वहन करने की क्षमता को प्रमुख चिंताओं में शामिल कर दिया है.

    ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल युद्ध शुरू होने के बाद थोक तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते ईंधन की कीमतें भी बढ़ी हैं. इससे कई वस्तुओं और सेवाओं की लागत भी बढ़ी है.

  7. पाकिस्तान ने लगाया आरोप- 'भारतीय नौसेना की कार्रवाई उकसावे वाली', कड़ा विरोध दर्ज कराया

    सांकेतिक तस्वीर
    इमेज कैप्शन, मंगलवार को अरब सागर में हुई घटना पर भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं (सांकेतिक तस्वीर)

    पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि 'उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र में भारतीय नौसेना ने उकसावे वाली कार्रवाई' की है. पाकिस्तान ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है.

    इस मुद्दे पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के प्रभारी राजदूत को तलब किया और मंगलवार को भारतीय नौसेनिक युद्धपोत के साथ टकराव पर विरोध दर्ज कराया.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा है कि जब पाकिस्तान नौसेना अपना द्विवार्षिक सीपार्क-26 अभ्यास कर रही थी, तब भारतीय पोत ने पाकिस्तानी नौसैनिक पोत के बेहद क़रीब आकर आक्रामक तरीके से युद्धाभ्यास किया.

    पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि इसके बाद दोनों पोतों के बीच संपर्क हुआ. यह घटना अंतरराष्ट्रीय कानून और सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की पूर्व सूचना पर 1991 के द्विपक्षीय समझौते का गंभीर उल्लंघन थी, और इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हुआ.

    पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “प्रभारी राजदूत से कहा गया कि वह भारत सरकार तक यह संदेश पहुंचाएं कि पाकिस्तान इस भारतीय कार्रवाई को कड़े शब्दों में ख़ारिज करता है."

    "भारतीय पक्ष से अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों, विशेष रूप से समुद्र में घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से किए गए समझौतों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया गया.”

    इसमें बताया गया है कि नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी राजदूत भारत के विदेश मंत्रालय के साथ इसी तरह का विरोध दर्ज कराएंगे.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स, एएनआई और आईएएनएस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मंगलवार शाम को उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज़ नियमित निगरानी पर मौजूद भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत की ओर तेज़ी से आया, जिससे दोनों में टक्कर हो गई.

    इस घटना पर बुधवार को नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के कार्यवाहक प्रमुख को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया था और भारत ने अपना विरोध दर्ज कराया था.

  8. बीबीसी हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा.

    कल के लाइव पेज की ख़बरें पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक करें.

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद इन अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए इनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करें.