डब्ल्यूएचओ ने इबोला पर कहा- हम इसका पीछा कर रहे, लेकिन वायरस हमसे आगे है, डेमियन ज़ेन

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डीआर कांगो में इबोला के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है.
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़, स्वास्थ्य अधिकारी अब भी वायरस पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन संक्रमण की रफ़्तार उनसे तेज़ बनी हुई है.
देश में इबोला का मौजूदा प्रकोप आधिकारिक घोषणा से क़रीब तीन महीने पहले ही फैलना शुरू हो गया था.
डीआर कांगो में 15 मई को इबोला के प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की गई थी. लेकिन यह इससे क़रीब तीन महीने पहले ही फैलना शुरू हो गया था. इसके बाद से अब तक 1,960 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 4,294 मामलों की पुष्टि हुई है.
डब्ल्यूएचओ के अफ़्रीका डायरेक्टर डॉ मोहम्मद जनाबी ने कहा, "हम वायरस का पीछा कर रहे हैं, जबकि वायरस हमसे आगे है."
उन्होंने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार, वायरस का फैलना फ़रवरी में ही शुरू हो गया था. शुरुआत में कई को मलेरिया या टाइफ़ाइड का मरीज़ समझा गया, जिससे इबोला की पहचान में देरी हुई.
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी केवल क़रीब 30 फ़ीसदी मरीज़ों तक ही पहुंच पा रहे हैं. बाक़ी मरीज़ों की घर पर ही मौत हो रही है.
कुछ इलाक़ों में अंतिम संस्कार की पारंपरिक प्रथाओं से भी संक्रमण फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है. कई जगह अंतिम संस्कार के दौरान लोग मृत व्यक्ति के शरीर को छूते हैं.
इसके अलावा कुछ समुदायों में स्वास्थ्य अधिकारियों पर भरोसा नहीं होने के कारण भी बीमारी को रोकने में दिक़्क़त आ रही है.




















