यूएनएससी में भारत बोला, 'सदस्यता का इस्तेमाल आतंकियों को ‘वैध’ ठहराने के लिए नहीं होना चाहिए'
भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैध ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
भारत ने यह भी कहा कि सिर्फ राजनीतिक वजहों से किसी संगठन को आतंकी घोषित करना या किसी आतंकवादी का नाम प्रतिबंधों की सूची से हटाने की कोशिश करना सही नहीं है.
बुधवार को सुरक्षा परिषद में कामकाज के तरीकों पर हुई खुली बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि की प्रभारी चार्ज डी’अफेयर्स और राजदूत योजना पटेल ने आतंकियों और आतंकी संगठनों को प्रतिबंध सूची में शामिल करने या उससे हटाने की प्रक्रिया में ज़्यादा पारदर्शिता और निष्पक्षता की ज़रूरत बताई.
योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता अपने साथ बड़ी ज़िम्मेदारियां लेकर आती है और इसका इस्तेमाल सीमित राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के मंच के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "आतंकियों और आतंकी संगठनों को सूची में शामिल करने या हटाने के मामले में प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए. सुरक्षा परिषद में किसी देश की मौजूदगी का इस्तेमाल आतंकवादियों को प्रतिबंध सूची से हटाकर उन्हें वैध ठहराने या बिना किसी ठोस मानदंड और दस्तावेजी सबूत के राजनीतिक आधार पर किसी दूसरे संगठन को आतंकी घोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए."
भारत लंबे समय से यूएनएससी की प्रतिबंध समितियों में आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को सूचीबद्ध करने से जुड़े फैसलों में अपनाई जाने वाली कथित अपारदर्शी प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है.